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रांची: खुले में शौच रोकने के लिए 'हल्ला बोल, लुंगी खोल' अभियान

नगर निगम ने बाकायदा लुंगी इनफोर्समेंट टीम बनाई है, जिसका काम ही है खुले में शौच करते लोगों की लुंगी खोलकर उनकी फोटो खींचकर अधिकारियों को भेजना

Updated On: Sep 25, 2017 01:43 PM IST

Anand Dutta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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रांची: खुले में शौच रोकने के लिए 'हल्ला बोल, लुंगी खोल' अभियान

मोदी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है स्वच्छ भारत अभियान. लेकिन देश को गदंगी मुक्त करने के इस अभियान को जिस तरह से लागू किया जा रहा है, उस पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. झारखंड की राजधानी रांची में स्वच्छता मिशन को लागू करने के नाम पर नगर निगम लोगों की लुंगी उतार रही है.

रांची में खुले में शौच करने वालों को रोकने के लिए नगर निगम का ये अजीबोगरीब अभियान है. इस अभियान में जो भी खुले में शौच करते पाए जा रहे हैं, उनकी लुंगी खोल दी जा रही है. यही नहीं खुली लुंगी के साथ ऐसे शख्स का फोटो खींचकर अधिकारियों को व्हाट्सएप पर भेजा जा रहा है.

नगर निगम ने बाकायदा लुंगी इनफोर्समेंट टीम बनाई है, जिसका काम ही है खुले में शौच करते लोगों की लुंगी खोलकर उनकी फोटो खींचकर अधिकारियों को भेजना. ऐसे लोगों की लुंगी नगर निगम की लुंगी इनफोर्समेंट टीम जब्त कर लेती है. साथ ही 100 रुपए का फाइन भी काट रही है. कुछ देर तक लुंगी रखने के बाद और स्वच्छता की शपथ लेने के बाद लुंगी को वापस दे दिया जाता है.

10 लोगों से वसूला जा चुका है जुर्माना 

पहले दिन 10 लोगों से जुर्माना वसूल किया गया. रांची नगर निगम के आयुक्त शांतनु अग्रहरि के मुताबिक खुले में शौच से मुक्ति के लिए यह सब किया जा रहा है. नगर निगम को 30 सितंबर 2017 तक रांची को खुले में शौच से मुक्त करना है. इस दौरान सुबह और शाम के समय लगातार इस तरह का सघन अभियान चलाया जाएगा. ताकि निगम क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त (ODF) किया जा सके.

निगम के तौर तरीकों पर आवाज उठाने लगे हैं लोग 

हालांकि इसके खिलाफ लोग आवाज भी उठाने लगे हैं. उनका कहना है कि यह तरीका गलत है. भला लोगों को बेइज्जत करके कैसे सफाई अभियान चलाया जा सकता है. यह तो उनके कानूनी अधिकारों का भी हनन है. निजता के अधिकार का हनन है.

जो भी खुले में शौच को जा रहे हैं, वह गरीब तबके के लोग हैं. अगर उनके साथ इस तरीके का व्यवहार हो रहा है तो यह बहुत ही निंदनीय है. लोग शिकायत कर रहे हैं कि एयर कंडीशन कमरे में बैठकर आईएएस को ऐसे ही विचार आते हैं.

उनको लज्जित करने के बजाए अगर प्रशासन उनके घर पहुंचे शौचालय निर्माण करवा दे तो भला कौन जाएगा खुले में शौच करने. इधर शांतनु अग्रहरि ने बताया कि निगम के द्वारा उन लोगों के लिए जो झुग्गी झोपड़ियों में रहते हैं और जिनके घरो में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु प्रयाप्त जगह की उपलब्धता नहीं है, उनके लिए सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया जा रहा है. ताकि उस जगह के लोग शौच के लिए इसका इस्तेमाल करें और निगम क्षेत्र को खुले में शौच मुक्त करने के अभियान में अपना बहुमूल्य योगदान दे सके.

मेयर ने कहा पीएम के अभियान को पूरा करने के लिए यह सब जरूरी 

वहीं मेयर आशा लकड़ा (बीजेपी) ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि पीएम के अभियान को पूरा करना है, उसके लिए यह सब किया जा रहा है. इसके लिए पहले भी प्रयास किए गए हैं. यह कोई नई बात नहीं है. 30 सितंबर तक हर हाल में रांची नगर निगम क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त बनाना है.

हालांकि वो ये सफाई देने में सफल नहीं हो सकीं कि लुंगी खोलना कितना उचित है. उन्होंने रटा रटाया फोटोशॉप का बहाना बनाकर कहा कि आजकल टेक्नोलॉजी का जमाना है, लोगों ने फोटोशॉप करके फोटो वायरल करवाया है.

झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता बी. के. दुबे का कहना है कि नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम कानून हाथ में ले रही है. यह मानवाधिकार का उल्लंघन भी है.  किसी योजना या अभियान में जोड़ने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है. मारपीट अौर लुंगी खोलना लोगों को बेइज्जत करना है अौर उनके सम्मान को गिराना है. ऐसे लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कारर्वाई की जा सकती है.

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