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रामजस विवाद: जेएनयू विवाद के रिप्ले जैसी लग रही है यह कहानी

रामजस विवाद की परिणति क्या होगी यह अभी से कहना तो मुश्किल है

Updated On: Feb 28, 2017 11:16 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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रामजस विवाद: जेएनयू विवाद के रिप्ले जैसी लग रही है यह कहानी

रामजस कॉलेज का विवाद देख कर ऐसा लग रहा है मानों हमलोग एक साल पहले हुए जेएनयू विवाद का रिप्ले देख रहे हैं. एक साल पहले भी जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारे लगने के आरोप में काफी बवाल मचा था.

जेएनयू में छात्र संगठनों के लेफ्टविंग पर देश विरोधी नारे लगाने का वीडियो वायरल हुआ था. एक साल पहले भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने काफी विरोध किया था. विरोध का स्वरूप राजनीतिक गलियारे से गुजरते हुए सोशल मीडिया और मीडिया पर छा गया था.

फिर सोशल मीडिया छाया मुद्दा

ठीक एक साल बाद वही मुद्दा मीडिया और सोशल मीडिया पर फिर छा गया है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार जगह जेएनयू से बदल कर डीयू का नॉर्थ कैंपस हो गई है. दिल्ली विश्वविद्यालय के ताजा घटनाक्रम ने एक साल पहले जेएनयू में हुए घटनाक्रम की याद फिर से ताजा कर दी है.

रामजस विवाद हर दिन अपना रंग बदल रहा है. मंगलवार को वामपंथी छात्र संगठनों ने नॉर्थ कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया. विरोध शांतिपूर्ण संपन्न हो गया. किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने नॉर्थ कैंपस में पुलिस की जबरदस्त तैनाती कर रखी थी.

मोदी सरकार पर बरसे केजरीवाल

सबसे पहले दिल्ली के सीएम अरिविंद केजरीवाल ने सुबह ट्वीट कर जानकारी दी कि वह इस मुद्दे पर आज दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलेंगे.

दोपहर होते-होते अरविंद केजरीवाल एलजी से मिलने पहुंच गए. एलजी से मिल कर बाहर निकलते ही सीएम केजरीवाल मोदी सरकार पर जम कर बरसे.

केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए एक साल पहले जेएनयू में हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा, जिन लोगों ने उस समय नारे लगाए आजतक दिल्ली पुलिस उन लोगों को पकड़ नहीं पाई है.

केजरीवाल ने बड़ी चतुराई से जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने वालों को पकड़ने की बात कर दिल्ली पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए दिल्ली की ताजा घटनाक्रम से जोड़ दिया.

छात्र राजनीति से आगे बढ़ा रामजस विवाद

रामजस विवाद अब छात्र राजनीति से आगे बढ़ चुका है. आपको याद होगा कि किस तरह बीते साल जेएनयू विवाद के समय में कन्हैया कुमार के समर्थन में सभी विपक्षी पार्टियां खड़ी हो गई थीं.

मीडिया चैनलों पर कन्हैया कुमार के खूब कार्यक्रम दिखाए गए. कह सकते हैं कि छात्र राजनीति का विवाद कन्हैया कुमार के रूप में देश को टीवी चैनलों और अखबारों को एक और चेहरा दे दिया.

ताजा प्रकरण में गुरमेहर कौर सोशल मीडिया ट्रोल झेलकर सभी तरफ सुर्खियों में आ गई हैं.

राजनीतिक बयानबाजी देखकर ऐसा लग रहा है कि गुरमेहर पर विवाद अभी और बढ़ेगा. मतलब तस्वीर कुछ वैसी ही बन रही है जैसी जेएनयू विवाद के समय बनी थी.

क्यों अलग है यह विवाद

हालांकि एक बात है जो इस विवाद को अगल बना रही है, वो है पुलिस की सक्रियता.

रामजस विवाद के पहले दिन की घटना पर भले ही पुलिस पर उंगलियां उठाई गई हों लेकिन उसके बाद पुलिस तुरंत चेत गई.

अब लग रहा है पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. इसे अच्छा संकेत कहा जा सकता है.

रामजस विवाद की परिणति क्या होगी यह अभी से कहना तो मुश्किल है लेकिन जिस तरह से ये लंबा खिंचता जा रहा है लोगों को इस फरवरी में बीती फरवरी की याद तो जरूर आ रही होगी.

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