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कौन हैं वो जज, जिन्होंने सुनाई राम रहीम को 20 साल की सजा?

साल 2016 में सीबीआई स्पेशल जज बने जगदीप सिंह ने राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई है

FP Staff Updated On: Aug 28, 2017 07:48 PM IST

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कौन हैं वो जज, जिन्होंने सुनाई राम रहीम को 20 साल की सजा?

जिस मामले से पांच प्रदेशों की सरकारें डरी हुई थीं, पूरी पुलिस व्यवस्था अस्त-व्यस्त थी, लाखों लोगों ने शहर को बंधक बना लिया था, सैकड़ों बसें और दर्जनों ट्रेनें रद्द कर दी गई थीं,  पांच प्रदेशों में धारा 144 लगाई थी, इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया था, ऐसे माहौल में कौन हैं वो जज, जो बिना किसी दबाव में आए राम रहीम पर लगे रेप के आरोपों के हाई प्रोफाइल मामले में निष्पक्ष फैसला सुनाया.

नजीर पेश करने वाला फैसला

साल 2016 में सीबीआई स्पेशल जज बने जगदीप सिंह 15 साल पुराने इस हाई प्रोफाइल केस में राम रहीम सिंह को दोषी करार दिया है. यही नहीं जज जगदीप सिंह ने राम रहीम को दोषी ठहराने के बाद नजीर पेश करते हुए इसे एक अपराध की जगह दो अपराध मानते हुए दो साध्वियों से रेप करने के लिए 10-10 साल की सजा सुनाई. ये दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी और राम रहीम को कुल 20 साल की सजा भुगतनी होगी.

जगदीप सिंह ने राम रहीम को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के लिए हरियाणा पुलिस को फटकार भी लगाई. जब राम रहीम के वकील ने कहा कि जेल में खाना खराब है और राम रहीम के लिए अलग से व्यवस्था की जाए तो जज ने झाड़ लगाते हुए कहा जो जेल में खाना मिल रहा है वही राम रहीम को भी खाना पड़ेगा.

गुरमीत सिंह बाबा राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाने पर सीबीआई के पूर्व पब्लिक प्रोसिक्यूटर एमपी सिंह का कहना है, इस केस की मैरिट पर अब बात हो नहीं सकती. सीबीआई की तरफ से दलीलें दी गई कि यह एक गंभीर अपराध है. यह आम आदमी के द्वारा किया गया गुनाह नहीं है. यह गुनाह वैसे व्यक्ति ने किया है. जिसके लाखों अनुयायी हैं. जिसका समाज में एक स्थान है. ऐसे में उन लाखों लोगों के विश्वास के साथ इस व्यक्ति ने धोखा दिया है.

गुरमीत सिंह राम रहीम के लिए अब हाईकोर्ट जाना ही होगा. साथ ही हाईकोर्ट में अपील भी करनी होगी. बगैर अपील किए बेल नहीं मिलेगी. सीबीआई लगातार कहती आ रही है कि यह जो अपराध है वह जघन्य श्रेणी में आता है. सीबीआई अदालत का यह निर्णय है राम रहीम की सोशल और पोलिटिकल स्टेटस को ध्यान में रख कर लिया गया है.

हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट में कर चुके हैं वकालत

एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज की रैंक वाले जगदीप सिंह साल 2012 में हरियाणा न्यायिक सेवाओं में जज के तौर पर शामिल हुए. पोस्टिंग के 4 साल के भीतर ही उन्हें स्पेशल सीबीआई जज के तौर पर नियुक्त किया जाना उनके साफ करियर और क्षमता की गवाही देता है. जज बनने से पहले जगदीप सिंह 12 साल तक एक वकील के तौर पर हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं. उनके साथ काम कर चुके वकील बताते हैं कि जगदीप सिंह को कम बोलना और लो-प्रोफाइल रहना पसंद है.

जस्टिस जगदीप सिंह इसके अलावा मेवात गैंगरेप व डबल मर्डर और जाट आरक्षण आंदोलन में हरियाणा के मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का घर जलाए जाने के महत्वपूर्ण मामलों में भी सुनवाई कर रहे हैं.

जगदीप ने अपनी लॉ की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी से साल 2000 में पूरी की थी. जो कॉलेज के दिनों से उन्हें जानते हैं, उनका कहना है कि जगदीप एक ब्राइट स्टूडेंट थे. वो बहुत मेहनती और ईमानदार हैं.

जगदीप सिंह सितंबर 2016 में उस वक्त सुर्खियों में आए जब उन्होंने एक हादसे में घायल चार लोगों की जिंदगी बचाई. जिस वक्त ये हादसा हुआ था उस वक्त जगदीप हिसार से पंचकुला जा रहे थे. उन्होंने पहले तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और घायलों को गाड़ी से बाहर निकाला. एंबुलेंस को आने में देरी हुई तो उन्होंने एक प्राइवेट गाड़ी रुकवाई और खुद घायलों को हॉस्पिटल छोड़ने गए.

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