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राम जन्मभूमि: ASI के पूर्व निदेशक का दावा, खुदाई में मिले मंदिर के सबूत

राम मंदिर की सत्यता तलाशने की कोशिश में खुदाई करने वाली टीम के सदस्य थे के के मोहम्मद

Updated On: Mar 31, 2017 02:29 PM IST

Pranay Upadhyay

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राम जन्मभूमि: ASI के पूर्व निदेशक का दावा, खुदाई में मिले मंदिर के सबूत

राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्दी सुनवाई से इनकार कर दिया है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में राम मंदिर को लेकर मध्यस्थता की कोई बात नहीं हुई. लेकिन सर्वोच्च अदालत ने सुब्रमण्यम स्वामी की जल्दी सुनवाई करने वाली याचिका पर रोज सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

इस बीच अयोध्या में राम मंदिर की सत्यता तलाशने की कोशिश में खुदाई करने वाली एएसआई टीम के सदस्य रहे के के मोहम्मद ने कहा है कि खुदाई में मंदिर के प्रमाण मिले थे. न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में एएसआई के पूर्व निदेशक (उत्तर) और अयोध्या में खुदाई करने वाली टीम के सदस्य मोहम्मद ने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई मध्यस्थता की पेशकश मुस्लिम बिरादरी के लिए इस विवाद को सुलझाने का एक सुनहरा मौका है.

उन्होंने कहा कि पहली बार 1977-78 में और बाद में भी जब एएसआई ने खुदाई की तो बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर के प्रमाण मिले थे. उन्होंने बताया कि जल की मकरमुख वाली परनाली, शिखर के नीचे अमलका और सबसे बड़ा प्रमाण विष्णु हरि शिला फलक जो कहता है कि यह मंदिर उसका है, जिसने दस शीश वाले का वध किया. उन्होंने कहा कि खुदाई में मंदिर के 14 स्तंभ मिले थे.

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को समझना चाहिए कि इतिहास में कई गलतियां हुई हैं और उन्हें स्वीकारने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए. मोहम्मद ने कहा कि यह दुखद है कि वामपंथी इतिहासकारों और कुछ अंग्रेजी समाचारपत्रों ने इस मामले को उलझा दिया.

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हालांकि मामले में पक्षकार हाजी महबूब ने मोहम्मद के बयान को खारिज करते हुए कहा कि राम के जमाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि वह मामले को सुलझाने के लिए बातचीत के पक्षधर हैं.

Ram Mandir Model Replica

(फोटो: रॉयटर्स)

इससे पहले, बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 21 मार्च को कहा था कि इस मामले में सभी पक्ष आपस में बातचीत कर विवाद सुलझाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राम मंदिर एक संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा है और यह बेहतर होगा कि इस मुद्दे को मैत्रीपूर्ण ढंग से सुलझाया जाए. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे सुलझाने के लिए सभी पक्ष सर्वसम्मति के लिए एक साथ बैठें.

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कोर्ट ने स्वामी से संबंधित पक्षों से सलाह करने और इस संदर्भ में लिए गए फैसले के बारे में कोर्ट को सूचित करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया था. लेकिन 31 मार्च को हुई सुनवाई में मध्यस्थता को लेकर सर्वोच्च अदालत में कोई बात ही नहीं हुई.

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