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अब आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं में बोल सकेंगे राज्यसभा सांसद

राज्यसभा सचिवालय ने अगले मॉनसून सत्र से पांच और भाषाओं- डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, संथाली और सिंधी भाषाओं को भी शामिल कर दिया है

Updated On: Jul 11, 2018 04:37 PM IST

FP Staff

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अब आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं में बोल सकेंगे राज्यसभा सांसद

18 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है. लेकिन इस बार राज्यसभा कुछ नया होगा. अब राज्यसभा सांसद आठवीं सूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में बोल सकेंगे. राज्यसभा सचिवालय ने अगले सत्र से पांच और भाषाओं- डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, संथाली और सिंधी भाषाओं को भी शामिल कर दिया है. इन भाषाओं के लिए अनुवादकों की व्यवस्था की जाएगी.

मंगलवार को सचिवालय ने अनुवादकों का एक पैनल शामिल किया. राज्यसभा में डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, संथाली और सिंधी के लिए अनुवादक रखे गए. वहीं इनके अलावा इन 22 भाषाओं में से असमी, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू भाषा के लिए पहले ही सदन में अनुवादक रखे हुए हैं. लोकसभा में भी बोडो, मैथिली, मणिपुरी, मराठी और नेपाली के लिए अनुवादक रखे जा रहे हैं.

हालांकि, सांसदों को अनुवादकों के लिए पहले नोटिस देना होगा.

इस पहल पर सदन के सभापति एम. वैंकेया नायडू ने खुशी जताते हुए कहा कि 'मैंने हमेशा से महसूस किया है कि मातृभाषा अपनी बात और भावनाएं पूरी तरह से जाहिर करने का सबसे अच्छा माध्यम होती है. सांसदों को भाषा की वजह से अपनी बात रखने में कोई बाधा का सामना नहीं करना चाहिए. इसलिए मैं चाहता था कि सूची की सभी 22 भाषाओं के लिए अनुवाद रखे जाएं. मुझे काफी खुशी है कि अगले मॉनसून सत्र से ये हकीकत बन जाएगा.'

नायडू ने जब सदन में सभापति का पद संभाला था, तभी उन्होंने कहा था कि सदन में सांसद 22 भाषाओं में अपनी पसंद की भाषा में बोल सकें, इसके लिए अनुवादकों की व्यवस्था की जाएगी.

मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होगा और 10 अगस्त तक चलेगा. 18 दिन तक चलने वाले इस सत्र में तीन तलाक सहित अन्य विधेयक सरकार के एजेंडा में टॉप पर रहने की संभावना है. संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार के अनुसार मॉनसून सत्र में लगभग 18 बैठकें होंगी. इसके पहले लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सांसदों ने सत्र को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया था.

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