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राजस्थान: लव जिहाद के नाम पर लाइव मर्डर की असल कहानी कुछ और ही है

राजस्थान में हाल के कुछ घटनाक्रमों पर नजर डालें तो अलग ही तस्वीर उभरती दिखती है. ऐसा लगता है जैसे शहर दर शहर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की जबरदस्त साजिश रची जा रही हो

Mahendra Saini Updated On: Dec 08, 2017 10:30 AM IST

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राजस्थान: लव जिहाद के नाम पर लाइव मर्डर की असल कहानी कुछ और ही है

राजस्थान का मेवाड़ संभाग वही है, जहां बैठकर ब्रिटिश इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने लिखा था कि यहां ऐसा कोई नगर नहीं, जहां लियोनीडास जैसे वीर पुरुष ने जन्म न लिया हो. लेकिन यही मेवाड़ संभाग पिछले कुछ दिनों से लगातार गलत वजहों से चर्चा में है. 1 दिसंबर को ईद पर नाथद्वारा समेत कई इलाकों में तनाव देखा गया तो अब राजसमंद में एक नृशंस हत्या और उसके वायरल वीडियो ने पूरे देश में हलचल मचा दी है.

इस वीडियो में शम्भू लाल रैगर नाम का आरोपी बुजुर्ग मोहम्मद अफराजुल उर्फ भुट्टो शेख नाम के शख्स का बेरहमी से कत्ल कर रहा है. उसने कत्ल का बाकायदा वीडियो बनवाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल भी किया है.

आरोपी ने कुल 3 वीडियो अपने ही नाबालिग भांजे से शूट करवाए हैं. एक क़त्ल का लाइव वीडियो है तो 2 वीडियो कत्ल के पहले के हैं. इनमें से एक में ये वहशी दरिंदा अपनी नाबालिग भांजी को साथ मे बैठाकर स्त्री सम्मान, लव जिहाद और देशभक्ति जैसे कई मुद्दों पर भाषणबाजी कर रहा है. कत्ल के वीडियो में आरोपी दावा कर रहा है कि अपनी बहन की बेइज्जती का बदला लेने के लिए और लव जिहाद को खत्म करने के लिए वो इस हत्याकांड को अंजाम दे रहा है. आरोपी चेतावनी भी देता है कि हिंदू लड़कियों को पथभ्रष्ट करने वालों का यही अंजाम होगा.

हालांकि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया और पुलिस महानिदेशक ओ पी गल्होत्रा ने लव जिहाद थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने आरोपी के किसी भी संगठन से जुड़े होने से भी इंकार किया. आईजी आनंद श्रीवास्तव ने खुद आरोपी से लंबी पूछताछ की है.

वारदात की पूरी कहानी

राजसमंद पुलिस के मुताबिक आरोपी और मृतक दोनों ही कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं. घटना के समय भी मृतक को कंस्ट्रक्शन साइट दिखाने के बहाने ही लाया गया था. मृतक अपनी बाइक पर था और आरोपी अपनी स्कूटी पर.

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कत्ल राजनगर थाने की कोतवाली के 100 फ़ीट रोड के पास देव हेरिटेज रोड पर दिन दहाड़े किया गया. मृतक भुट्टो शेख जैसे ही बाइक से उतर कर आगे बढ़ा, आरोपी ने उसपर गैंती से ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिया. मरने वाला शख्स अपनी गलती पूछता रहा लेकिन आरोपी रहम दिखाने के बजाय लव जिहाद के कारण सजा देने का भाषण देता रहा.

इसी दौरान वह गैंती छोड़कर दराती से वार शुरू करता है. फिर साथ लाई पेट्रोल की बोतल उडे़लकर भुट्टो शेख की बॉडी को जला देता है. घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था. लेकिन राजसमंद पुलिस ने उसे 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर ली. मामले की गंभीरता देखते हुए गृहमंत्री ने फौरन एक एसआईटी के गठन के आदेश जारी कर दिए थे.

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कत्ल के पीछे लव जिहाद या निजी रंजिश?

मृतक अफराजुल मूल रूप से बंगाल के मालदा का रहने वाला था. जांच में सामने आया है कि मृतक और आरोपी एक ही मोहल्ले में रहते थे. आरोपी ठेकेदारी करता है और मृतक के जरिए वो बंगाल से मजदूर मंगाया करता था.

आरोपी ने वीडियो में लव जिहाद का जिक्र किया है. लेकिन पुलिस के मुताबिक कहानी कुछ और ही है. बताया जा रहा है कि आरोपी की लिव इन गर्लफ्रैंड उसे छोड़कर मृतक के साथ रहने लगी थी. इससे वो परेशान था और कई बार दोनों के बीच मारपीट भी हो चुकी थी.

आरोप है कि कुछ महीने पहले इसी मोहल्ले की दो लड़कियां गायब हो गई थी. शंकर रैगर ने इसका शक भी भुट्टो शेख पर ही जताया था. आरोपी ने पकड़े जाने के बाद दावा किया कि इन्हें छुड़ाने वह मालदा भी गया था. लेकिन वहां उसे जान से मारने की धमकी दी गई.

पुलिस के मुताबिक पिछले कई दिन से शंकर लाल भुट्टो शेख के मर्डर की प्लानिंग कर रहा था. इसी दौरान उसने इंटरनेट पर लव जिहाद के बारे में पढ़ा और कत्ल को धार्मिक एंगल देने की योजना बना डाली.

अब जागने का वक़्त आ गया है!

राजस्थान में हाल के कुछ घटनाक्रमों पर नजर डालें तो अलग ही तस्वीर उभरती दिखती है. ऐसा लगता है जैसे शहर दर शहर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की जबरदस्त साजिश रची जा रही हो. डर है कि ये चिंगारी कहीं ज्वालामुखी न बन जाए.

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पहले इतिहास से छेड़छाड़ के नाम पर फ़िल्म पद्मावती का जबरदस्त विरोध किया गया. इसके बाद पिछले महीने जयपुर में चेतन सैनी नाम के शख्स का नाहरगढ़ किले पर सुसाइड/मर्डर केस सामने आया. यहां चट्टानों पर घोर साम्प्रदायिक बातें लिखी हुई मिली. पुलिस इस मामले की तह तक भी नहीं पहुंच पाई थी कि चौमूं में मामूली कहासुनी ने साम्प्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया. इसी दौरान ईद-ए-मिलादुन्नबी पर एकसाथ कई शहरों से तनाव की खबरें आई. भीलवाड़ा में एहतियातन इंटरनेट शटडाउन करना पड़ा.

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राजसमंद की वर्तमान घटना भी हमारे सामने कई यक्ष प्रश्न खड़े कर रही है. इनका जवाब अब भी नहीं खोजा गया तो आगे बहुत देर हो चुकी होगी. कहीं ऐसा न हो कि फिर कुछ सही कर सकने लायक न समय बचे और न ही समझ.

हालिया समय में सम्प्रदायों के ध्रुवीकरण पर खूब बहसें हुई हैं. बुद्धिजीवियों ने भारत में लगातार कम होती सहिष्णुता पर चिंताएं जताई हैं तो दूसरे पक्ष ने सहिष्णुता का जिम्मा सिर्फ एक पक्ष तक ही सीमित करने की कोशिशों पर भी सवाल उठाए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

इस दौरान अभिव्यक्ति की आजादी या वैचारिक स्वतंत्रता सबसे ज्यादा विवादित शब्द हो गए. ये शब्द इतने विशाल हैं कि गौरक्षा से लेकर देशप्रेम और खाने की स्वतंत्रता से लेकर शादी से अलग होने की विधि तक; परंपराओं को कायम रखने की हठ और सुधारों को लागू करने के उत्साह तक; मीडिया की हदों से लेकर शारीरिक संबंधों की मनमर्जी तक सभी की चर्चा के केंद्र में यही रहे हैं.

हमें समझना होगा कि कट्टरवाद केवल तोड़ता है. 1947 में ऐसा एक बार देखा भी जा चुका है. इसके बावजूद सामने वाले को सम्मान देने के भारतीय दर्शन के उलट ही व्यवहार किया जा रहा है.

भारत जैसे बहुलवादी समाज को बचाए रखने के लिए हमें कुछ और नहीं करना, सिर्फ अपनी जड़ों की और लौटना है. जैन धर्म का अनेकान्तवाद कहता है कि संसार में कोई भी स्वयं में सम्पूर्ण नहीं है. एक ही विषय को लेकर दो या अधिक मान्यताएं और विश्वास हो सकते हैं. लेकिन अपने विचार को सम्पूर्ण सच मान लेना ही सहिष्णुता की समाप्ति और कट्टरता का जन्म है. हमें फिर से सहिष्णु बनना ही होगा. हमें फिर से कट्टरता खत्म करनी ही होगी.

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