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राजस्थान: कांस्टेबल परीक्षा से कटघरे में 'आधार'

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने हरियाणा से जुड़े ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ किया है जो हाईटेक तरीके से नकल कर रहे थे

Mahendra Saini Updated On: Mar 19, 2018 10:47 AM IST

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राजस्थान: कांस्टेबल परीक्षा से कटघरे में 'आधार'

आधार डेटाबेस के एक बार फिर लीक होने की खबरों के बीच UIDAI ने लोगों की पहचान को पूरी तरह सुरक्षित बताते हुए इसमें सेंध से इनकार किया है. दरअसल, पिछले कुछ दिन से ऐसी खबरें आ रही हैं कि गूगल पर 'मेरा आधार, मेरी पहचान' सर्च करने पर आधार की जानकारी निकल आती है. UIDAI ने हालांकि आगाह करते हुए कहा है कि ऑनलाइन सेवाएं लेते वक्त लोग सावधानी जरूर बरतें.

मुमकिन है, डेटाबेस पूरी तरह सुरक्षित हो लेकिन राजस्थान में ऑनलाइन कांस्टेबल परीक्षा के दौरान कई नकलची गिरोह पकड़े गए हैं. उनसे हुई पूछताछ के बाद इस पर भरोसा करना असंभव लग रहा है. UIDAI का कहना है कि आधार की जानकारी हो जाने मात्र से किसी की पहचान को नहीं चुराया जा सकता क्योंकि बायोमीट्रिक्स मैच करना भी जरूरी है. लेकिन तब क्या हो जब आप घर बैठे हों और आपकी अंगुलियों के निशान से चोरी हो जाए ?

नकल गिरोहों ने ऐसी तरकीबें आजमाई हैं जिनको देखकर साइबर एक्सपर्ट भी हैरान हैं. बायोमीट्रिक मशीन को 'बेवकूफ' बनाने के लिए सिर्फ मोम की सहायता से अंगुलियों के निशान बदल दिए गए हैं. ये तरीके आजमाए गए हैं कांस्टेबल बनने के लिए, लेकिन अब इनसे आधार डेटाबेस के साथ ही पूरी साइबर सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं.

भर्ती परीक्षा कांस्टेबल की, सेंध लगेगी आधार में!

पुलिस कांस्टेबल के करीब 5500 पदों पर भर्ती के लिए राजस्थान पुलिस इन दिनों ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन कर रही है. 45 दिन तक चरणबद्ध रूप में चलने वाली ये परीक्षा अब सिरदर्द बनती जा रही है. स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने हरियाणा से जुड़े ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ किया है जो हाईटेक तरीके से नकल कर रहे थे. एक मामले में परीक्षा केंद्र के नेटवर्क को हैक करके बाहर से उत्तर दर्ज किए जा रहे थे.

एक अन्य मामले में तो सेंधमार इससे भी बहुत आगे निकल गए. इसमें असली अभ्यर्थी के थंब प्रिंट की क्लोनिंग कर ली गई और उसकी जगह फर्जी अभ्यर्थी पेपर देने पहुंच गया. SOG ने जब एक ग्रामसेवक समेत 3 संदिग्धों को पकड़ा तो पता चला कि क्लोनिंग के जरिए फर्जीवाड़ा कर परीक्षा दे रहे एक-दो लोग नहीं बल्कि पूरे 25 लोग हैं. अकेले इस गिरोह ने ही 7 सेंटरों का ठेका लिया था. हर अभ्यर्थी से डेढ़ से लेकर 4 लाख रुपए तक वसूले गए थे.

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कांस्टेबल भर्ती परीक्षा भले ही बड़ी न हो लेकिन थंबप्रिंट की क्लोनिंग ने सरकार के बड़े-बड़े दावों को फेल कर दिया है. डेटाबेस में हैकिंग के आरोपों के बीच सरकार बार-बार जोर देकर इसे फुलप्रूफ करार देती रही है. लेकिन राजस्थान में पकड़े गए गिरोह और उसके तरीके ने साबित कर दिया है कि भारत में कुछ भी संभव है, हैकिंग से सुरक्षा के दावे बेकार हैं.

Representational image. AFP

प्रतीकात्मक तस्वीर

थंबप्रिंट की क्लोनिंग कैसे?

यूनिक आइडेंटिफिकेशन यानी आधार को इसलिए कारगर माना जा रहा था क्योंकि ये बायोमीट्रिक अवयवों के आधार पर पहचान सुनिश्चित करता है. अभी तक माना जाता रहा है कि व्यक्ति की अंगुलियों की छाप की नकल दूसरा शख्स नहीं कर सकता. लेकिन अब ये भी गलत साबित हो गया है. कांस्टेबल परीक्षा में नकल करा रहे लोगों की चालाकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन्होने थंब प्रिंट तक का क्लोन भी तैयार कर लिया है.

थंब प्रिंट के क्लोन का इस्तेमाल कर परीक्षा दे रहे जो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, उन्होंने इसका पूरा तरीका बताया है कि कैसे ये क्लोन तैयार किए गए. आरोपियों ने ये तरीका यू-ट्यूब पर मौजूद कई वीडियो से सीखा है. इनके मुताबिक सबसे पहले वैक्स को गरम कर एक सतह पर डाला जाता है. जिसका थंब इंप्रेशन लेना होता है, उसके अंगूठे पर फिश ऑयल लगाकर वैक्स पर थंब इंप्रेशन ले लिया जाता है. इंप्रेशन आ जाने पर वैक्स की परत पर फेविकोल की हल्की सी परत डाली जाती है ताकि इंप्रेशन फिक्स हो जाए.

ये लोग अपनी बदमाशी को कामयाब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे. इसीलिए इन्होने वैक्स पर लिए गए थंब इंप्रेशन का बाकायदा टेस्ट किया. परीक्षा से पहले टेस्टिंग के लिए आरोपियों ने क्लोन थंब प्रिंट से आधार कार्ड वैरीफाई करवाया. वैक्स पर लिए गए थंब इंप्रेशन को दूसरे शख्स के अंगूठे पर चिपकाया और आधार वैरीफाई करवाया गया. इस नकली थंब इंप्रेशन को न आधार वैरीफिकेशन मशीन पकड़ पाई और न ही परीक्षा हॉल में लगी बायोमीट्रिक वेरीफिकेशन मशीन.

सिर्फ नकल नहीं, दुस्साहस भी !

बात सिर्फ इतनी नहीं है कि असली अभ्यर्थी के थंब इंप्रेशन को नकली लेकिन एक्सपर्ट शख्स के अंगूठे पर लगाकर नकल करवाई जा रही थी. हैरानी की बात नकली थंब इंप्रेशन गिरोह के मुखिया का दुस्साहस भी है. पुलिस के मुताबिक मास्टरमाइंड नरेश सिनसिनवार सांठगांठ करने के लिए परीक्षा आयोजित करवा रही कंपनी एप्टेक के हैड ऑफिस मुंबई पहुंच गया. कंपनी को बड़े पैमाने पर 'सेटिंग' करने के लिए लालच दिया गया.

जब संचालक नहीं पिघला तो सिनसिनवार ने सोचकर जवाब देने के लिए अपने 2 मोबाइल नंबर उसके पास छोड़ दिए. कंपनी ने इसकी सूचना राजस्थान पुलिस को दी. जब पुलिस ने उसके दिए नंबरों को खंगाला तो एक राजस्थान का और दूसरा कर्नाटक का निकला. राजस्थान वाला नंबर लगातार बंद आया लेकिन कर्नाटक वाला नंबर चालू था. पुलिस ने पूरी पड़ताल कर जाल बिछाया तो मास्टरमाइंड समेत 3 लोग गिरफ्त में आ गए. हालांकि एक आरोपी जितेंद्र अभी फरार बताया जा रहा है.

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इसी परीक्षा में नकल के दूसरे मामले में सरस्वती इंफोटेक के मालिक कपिल ने सिस्टम को हैक करने के लिए उन लोगों पर दबाव बनाया जिनको उसने कर्ज दे रखा था. पुलिस के मुताबिक इन लोगों ने वायरलेस रिमोट से सेंटर के कम्प्यूटरों को हैक कर लिया. सेंटर के पास ही दूसरी बिल्डिंग में एक्सपर्ट को बैठाकर पेपर सॉल्व कराया गया. इस दौरान सेंटर के अंदर असली अभ्यर्थी सिर्फ डमी के तौर पर बैठे रहे.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

आगे की परीक्षा रद्द, पीछे वाली का क्या?

7 मार्च से शुरू हुई इस परीक्षा का पहला राउंड 17 मार्च को पूरा हुआ. दूसरा राउंड 20 मार्च से 31 मार्च तक होना था. आगे के राउंड कुल मिलाकर 45 दिन तक चलने थे. हर राउंड में करीब 3 लाख लोग परीक्षा देने वाले थे. लेकिन पहले 10 दिन में नकल के इतने हाईटेक और इतने ज्यादा मामले सामने आए कि अब दूसरे चरण को फिलहाल रोक दिया गया है. फिलहाल परीक्षा भले ही स्थगित कर दी गई हो लेकिन कई सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब अभी दिए जाने बाकी हैं.

सबसे पहले तो परीक्षा का जिम्मा संभाल रहे पुलिस मुख्यालय पर ही सवाल उठ रहे हैं. करीब 5500 पदों के लिए 17 लाख लोगों ने आवेदन किया था. पुलिस ने आवेदन फॉर्म के साथ अभ्यर्थियों से फीस के रूप में जितना रुपया लिया उससे बहुत कम एप्टेक कंपनी को चुकाया गया. अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि मुनाफा कमाने के चक्कर में पुलिस ने परीक्षा की पारदर्शिता से समझौता कर लिया.

ऐसा लगता है जैसे एप्टेक कंपनी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एप्टेक ने परीक्षा को कराने का ठेका आगे कई छोटी कंपनियों को सबलेट कर दिया. इन्हीं में से एक है मेपल कंपनी. मेपल कंपनी ने ये ठेका सरस्वती इंफोटेक जैसे छोटे-छोटे सेंटरों को बिना जांच पड़ताल के बांट दिया. खुलासा हुआ है कि सरस्वती इंफोटेक को दिल्ली में ऑनलाइन परीक्षा कराने से बैन कर दिया गया था.

मेपल कंपनी ने एप्टेक को 100 सेंटरों की लिस्ट दी थी. इन्ही में सरस्वती इंफोटेक शामिल थी. अब एसओजी ने मेपल कंपनी के संचालकों से भी पूछताछ की है. पुलिस महानिदेशक ओ पी गल्होत्रा ने कहा है कि एप्टेक की कार्यशैली की भी जांच की जाएगी. अगर एप्टेक की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

हालांकि अभी इस सवाल का संतोषजवाब नहीं मिल रहा है कि पहले चरण में परीक्षा दे चुके 3 लाख लोगों के बारे में क्या फैसला किया गया है. आईजी संजीव कुमार नार्जारी के मुताबिक एसओजी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पहले चरण के संबंध में फैसला किया जाएगा. नार्जारी के मुताबिक अभी तक जयपुर और अजमेर से 34 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

पूछताछ में नकल स्तर के बड़े पैमाने पर सक्रिय होने की बात सामने आई है. इसी के बाद दूसरे चरण को स्थगित करने का फैसला किया गया. एसओजी की जांच के बाद साफ हो पाएगा कि क्या परीक्षा नए सिरे से कराई जाएगी. पहले से SSC परीक्षा में धांधलेबाजी को लेकर पहले से आंदोलन चल रहा है. अब राजस्थान में कांस्टेबल परीक्षा भी चुनावी साल में सरकार के लिए नासूर बन सकती है. बहरहाल, सरकार और एजेंसियों की असली परीक्षा तो बायोमीट्रिक डेटा को सुरक्षित रखने की है. सिर्फ वैक्स की सहायता से ही आधार वैरीफिकेशन हो जाना बड़े खतरे का इशारा है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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