S M L

राजस्थान में अब नहीं होंगे सरकारी स्कूल!

स्कूलों के निजीकरण के लिए बाकायदा 'स्कूली शिक्षा में पीपीपी नीति-2017' का मसौदा तैयार किया गया है

Mahendra Saini Updated On: Sep 07, 2017 07:03 PM IST

0
राजस्थान में अब नहीं होंगे सरकारी स्कूल!

ज्यादा समय नहीं हुआ जब इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला दिया था कि नेताओं, नौकरशाहों और जजों के बच्चे राजकीय यानी सरकारी स्कूलों में पढ़ें. इसके बाद सरकारी शिक्षा व्यवस्था की दशा और दिशा पर काफी बहस हुई थी.

आमतौर पर सरकारी/राजकीय स्कूल के नाम से जेहन में ऐसी तस्वीर उभरती है जिसमें खराब इंफ्रास्ट्रक्चर यानी खस्ताहाल इमारत या इमारत विहीन जगह; टूटा फर्नीचर या नीचे टाट पट्टी पर बैठे बच्चे; ऊंघते से न पढ़ाने की इच्छा वाले या हाजिरी लगा कर गायब हो जाने वाले टीचर और बेहद खराब परिणामों वाले स्कूल होते हैं.

आजादी के बाद शिक्षा और चिकित्सा को विशेष तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र में रखे जाने पर जोर दिया गया था. इसका उद्देश्य था कि गरीब जनता को कम से कम खर्च में उचित सुविधाएं मिल सकें. लेकिन बाद के दौर में लालफीताशाही और लापरवाही ने दोनों ही क्षेत्रों की हालत बदतर कर दी. ASER रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे सरकारी स्कूल में पांचवीं का बच्चा दूसरी कक्षा की किताब भी नहीं पढ़ पाता.

यहीं कारण है कि समय-समय पर सरकारी स्कूलों की दशा सुधारे जाने की आवाज उठती रही है. विभिन्न राज्यों ने कदम भी उठाए हैं जैसे शिक्षकों की वेतनवृद्धि को छात्रों के परिणामों से जोड़ना या बायोमैट्रिक हाजिरी की व्यवस्था. लेकिन राजस्थान सरकार ने दूसरा ही तरीका ढूंढ़ा है.

सरकारी को निजी करने की 'राजे' नीति

वसुंधरा राजे सरकार ने राजकीय स्कूलों को निजी क्षेत्र में देने का फैसला कर लिया है. इसके लिए बाकायदा "स्कूली शिक्षा में PPP नीति-2017" का मसौदा तैयार किया गया है. कैबिनेट ने इसकी मंजूरी भी दे दी है. पहले चरण में राज्य की 300 स्कूलों को निजी भागीदारों को सौंपा जाएगा. निजी भागीदार सरकारी स्कूलों की जमीन, इमारत और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करेगा लेकिन उसे स्टाफ की व्यवस्था खुद करनी होगी. इन स्कूलों में लगे शिक्षकों को दूसरी सरकारी स्कूलों में समायोजित कर दिया जाएगा.

पंचायती राज मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि सरकारी स्कूलों को निजी क्षेत्र में देने के बावजूद छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं में कोई कमी नहीं होगी. हालांकि अभी ये साफ नहीं किया गया है कि निजी भागीदार फीस बढ़ाकर अपना मुनाफा निकालेगा या उसे सब्सिडी दी जाएगी.

राठौड़ का कहना है कि स्कूली शिक्षा में PPP नीति लागू करने से सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने में सहायता मिलेगी. श्रम मंत्री जसवंत यादव का भी कहना है कि वही स्कूल निजी भागीदारी में दिए जाएंगे जहां संचालन में दिक्कतें आ रही हैं. यादव का कहना है कि इससे सरकार का खर्च घटेगा.

प्राइवेट पर विरोध बहुत 'पब्लिक' है 

school

हालांकि जानकार लोग राजे सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं. विरोध के सुर खुद बीजेपी से भी उठने लगे हैं. विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा है कि ऐसे समय में जब राजस्थान में सरकारी स्कूलों के छात्रों ने मेरिट में प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ा है; 30% एडमिशन बढ़े हैं और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर तक इसकी तारीफ कर चुके हैं. तब सरकारी स्कूलों को निजी क्षेत्र में देने का फैसला सही नहीं लगता है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि PPP के नाम पर यह पूरी शिक्षा व्यवस्था को अपने चहेतों के हाथों सौंपने की नीति है. सरकार ने यह नहीं बताया है कि उसने किससे और किन शर्तों पर MoU किया है. पायलट के मुताबिक शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी और संवैधानिक जिम्मेदारियों से राज्य को मुंह नहीं मोड़ना चाहिए.

कुछ महीनों पहले ही राजे सरकार ने छात्रों की कम संख्या और कम दूरी पर ज्यादा स्कूल होने के नाम पर सरकारी स्कूलों के समायोजन की योजना लागू की थी. कांग्रेस का आरोप है कि इस योजना के तहत करीब 19 हजार छोटी स्कूलों को बंद कर दिया गया.

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को भी निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं 

राजे सरकार ने ही चिकित्सा क्षेत्र में भी सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) को लागू किया है. इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) निजी क्षेत्र को सौंपे जा रहे हैं. इसी तरह निजी बस ऑपरेटरों को अभी तक रोडवेज बसों के लिए आरक्षित रहे रूटों पर मान्यता देकर और रोडवेज बस अड्डों से निजी बसों के संचालन को मंजूरी देकर परिवहन क्षेत्र में भी अधिकारिक तौर पर निजी क्षेत्र की एंट्री करवाई गई है.

जानकारों और विपक्ष ने बीजेपी सरकार के इन कदमों का विश्लेषण अलग-अलग तरह किया है. कइयों का मानना है कि यह निजी क्षेत्र के नवाचार, संसाधन और दक्षता के उपयोग की दिशा में सही कदम है. खुद नीति आयोग भी सरकार से उत्पादक की भूमिका के बजाय फैसिलिटेटर का रोल निभाने की अनुशंसा कर चुका है. मोदी सरकार भी मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सीमम गवर्नेंस का नारा देती है.

घोटाले की आशंका जता रहे हैं लोग 

लेकिन कई लोग निजी क्षेत्र की दक्षता और मैक्सीमम गवर्नेंस की आड़ में किसी बड़े घपले की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं. गांवों और शहरों में सरकारी स्कूलों के पास करोड़ों करोड़ की जमीनें हैं. सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और रोडवेज बस अड्डों के पास भी कुल मिलाकर करोड़ों-अरबों की संपत्तियां हैं. विपक्ष का आरोप है कि इसी संपत्ति से अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ही इन तीनों क्षेत्रों में PPP का सहारा लिया जा रहा है.

एक ही समय में दो परस्पर विरोधी बातें भी समझ से परे हैं. राजस्थान की बीजेपी सरकार, सरकारी स्कूलों को प्राइवेट हाथों में देने का यह कदम ऐसे समय में उठा रही है जब दिल्ली की आप सरकार प्राइवेट स्कूलों के शोषण को रोकने के लिए उन्हे सरकारी क्षेत्र में लेने का मन बना रही है.

कुछ भी हो, एक बात तो तय है कि निजी क्षेत्र नुकसान वाले सौदों में हाथ नहीं डालता. वह खर्च की भरपाई और मुनाफे के लिए फीस बढ़ाएगा. ऐसे में देखने वाली बात ये है कि उस गरीब जनता का कल्याण कैसे होगा जो कम खर्च वाली सरकारी स्कूलों, सरकारी अस्पतालों और सरकारी बसों के सहारे जीती है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi