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रेलवे के इस विकल्प से आप बचा सकते हैं खाने का पैसा

इन ट्रेनों में टिकट बुक करते समय ऑप्ट आउट का विकल्प चुनेंगे तो आप 200-400 रुपए बचा सकते हैं

FP Staff Updated On: Jul 27, 2017 10:07 PM IST

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रेलवे के इस विकल्प से आप बचा सकते हैं खाने का पैसा

ट्रेन में एक यात्री के खाने में छिपकली निकलने के बाद भारतीय रेल ने आनन-फानन में कई कदम उठाए हैं. सबसे पहले तो उसने पूर्वा एक्सप्रेस के पैंट्री कार के ठेकेदार आर के एसोसिएट्स का लाइसेंस कैंसिल कर दिया. भारतीय रेल ट्रेनों में हर रोज ग्यारह लाख लोगों को खाना सर्व करता है. लेकिन खानपान की बुरी व्यवस्था और लोगों की लंबी शिकायतों की वजह से वह अपना ये बाजार भी छोड़ना चाहता है.

बुधवार को भारतीय रेल ने 31 राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और गतिमान ट्रेनों में लोगों को रेलवे का खाना ऑप्ट आउट करने का विकल्प शुरू करने का आदेश जारी कर दिया. इन ट्रेनों में टिकट बुक कराते समय ही आपसे खानपान का पैसा भी लिया जाता है. लेकिन अब ऑप्ट आउट कर आप 200 से 400 रुपए तक बचा सकते हैं.

इससे पहले भी भारतीय रेल दो ऐसी ही ट्रेनों में ट्रायल के तौर पर ऑप्ट आउट का विकल्प दे रहा था. लेकिन महज 7 फीसदी लोगों ने ही इसे चुना. जाहिर है चलती हुई ट्रेन में लोगों के भोजन का विकल्प भारतीय रेल ही होता है इसलिए रेलवे का भोजन उसकी मजबूरी है. लेकिन भारतीय रेल धीरे-धीरे अपनी इस जिम्मेदारी से मुक्त होता चाहता है.

पूर्वा एक्सप्रेस में वेज बिरयानी में छिपकली निकलने की घटना के ठीक तीन दिन पहले यानि पिछले शुक्रवार को ही भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में रेल के खानपान को बेहद घटिया बताया था. भारतीय रेल को भी हर महीने खानपान से जुड़ी एक हजार से ज्यादा शिकायतें मिलती हैं. इसकी वजह से 2016 में 3800 बार ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया गया. जबकि 2017 में अब तक ऐसा 3100 बार हो चुका है.

अब खानपान की सारी जिम्मेदारी आईआरसीटीसी के पास

वहीं रेल ने इस साल अब तक 12 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द किए हैं. भारतीय रेल करीब 350 ट्रेनों में पैंट्री कार चलाती है. इनमें 145 पैंट्री कार सीधे तौर पर आईआरसीटीसी के पास हैं या फिर उसकी निगरानी में किसी ठेकेदार के पास. जबकि 206 ट्रेनों के पैंट्री कार सीधा भारतीय रेल के अलग-अलग जोन की निगरानी में निजी ठेकेदारों के पास हैं. खानपान से जुड़ी ज्यादातर शिकायतें निजी ठेकेदारों के अधीन चलने वाले पैंट्री कार से आते हैं.

लेकिन भारतीय रेल पर महज कुछ बड़े ठेकेदारों का कब्जा है जो कई साल या दशकों से ट्रेनों और स्टेशनों पर खानपान का अपना बिजनेस चला रहे हैं. आलम ये है कि इस साल जिन 12 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द हुए हैं, उनमें से कम से कम 5 आरके एसोसिएस्ट के हैं, जिसने अलग-अलग नाम की कंपनी बनाकर कई ट्रेनों का ठेका ले रखा है.

रेलवे के अब ये भी तय कर लिया है कि इस साल के अंत तक सभी 350 ट्रेनों के पैंट्री कार आईआरसीटीसी को दे दिए जाएंगे. यानी अब इन ट्रेनों में खानपान की सारी जिम्मेदारी आईआरसीटीसी की होगी. जाहिर है मौजूदा हालात और ठेकेदारों के कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक आईआरसीटीसी हर ट्रेन में खाना उपलब्ध नहीं करा सकता बल्कि वो केवल इसकी निगरानी कर सकता है.

रेलवे के साथ हुए करार के मुताबिक 2019 तक सभी ठेकेदारों का रेलवे के साथ खानपान का करार खत्म हो जाएगा. उम्मीद करते हैं कि तब तक भारतीय रेल अपना आधारभूत ढांचा बेहतर कर पाएगा और मुसाफिरों को बेहतर खानपान की सुविधा मिल पाएगी.

(साभार: न्यूज़18)

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