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कितना कामयाब होगा मुसाफिरों का सफर सुहाना बनाने का फॉर्मूला

किराया-भाड़ा में बढ़ोतरी करने के बावजूद कमाई के मोर्चे पर मात खा रहा रेलवे अब अपनी आमदनी बढ़ाने के दूसरे तरीके पर जोर-शोर से लग गया है

Updated On: Nov 03, 2017 03:32 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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कितना कामयाब होगा मुसाफिरों का सफर सुहाना बनाने का फॉर्मूला

पिछले एक-दो महीनों से भारतीय रेल में कई नए-नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं. एक तरफ जहां नए रेलमंत्री पीयूष गोयल और रेलवे बोर्ड के नए चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने रेलवे के अंदर के सिस्टम को सुधारने की दिशा में कई कदम उठाए हैं तो वहीं रेल प्रशासन ने अब लोगों को रेलवे के बारे में चली आ रही पुरानी धारणाओं को बदलने का प्रयास भी तेज कर दिया है.

गौरतलब है कि बुधवार से ही रेलवे ने अपना नया टाइम टेबल लागू किया है, जिसके तहत कई ट्रेनों की समय सारिणी में बदलाव किए गए हैं.

रेलवे से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि रेलवे ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि यात्रियों को उनकी मंजिल तक जल्द से जल्द पहुंचाया जा सके और उनकी सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा जा सके.

हम आपको बता दें कि रेलवे ने ट्रेनों की स्पीड बढ़ा कर यात्रा की टाइमिंग को 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक कम किया है. लंबी अवधि वाली लगभग 700 ट्रेनों की यात्रा अवधि में कटौती की गई है.

खास बात यह है कि रेलवे ने पिछले तीन सालों में लगभग 150 ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा दिया है. लेकिन, ताज्जुब यह है कि इनमें से ज्यादातर ट्रेनें अभी भी एक्सप्रेस टाइम-टेबल से ही चल रही हैं.

किराया ज्यादा सुविधा कम

सुपरफास्ट का दर्जा मिलने के बाद स्लीपर में 30 रुपए और एसी में 45 से 75 रुपए ज्यादा किराया वसूले जा रहे हैं. दूसरी तरफ यात्रियों की सुविधाओं में कोई खास इजाफा नहीं देखा गया है.

रेल मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक रेलवे अगले पांच साल में 150 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की योजना बना रहा है. इससे 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा. इसी साल अगस्त में रेल मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले गोयल ने कहा कि वह रेलवे को नई दिशा देने की लगातार कोशिशों में जुटे हैं.

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गोयल ने कहा कि उनका मंत्रालय रेल लाइन के पूर्ण रूप से विद्युतीकरण के काम को चार साल में ही पूरा करने पर ध्यान दे रहा है जबकि पूर्व योजना के मुताबिक इसे 10 साल में पूरा किया जाना था. इससे घाटे में चल रहे रेलवे को अपनी लागत में करीब 30 प्रतिशत कमी लाने में मदद मिलेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि विद्युतीकरण की पहल से रेलवे को ईंधन बिल में सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपए की बचत में भी मदद मिलेगी.

इसके अलावा रेलवे अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए अब एक नई योजना बना रहा है. इसके तहत रेलवे अब विज्ञापनों के जरिए अपना राजस्व बढ़ाएगा. इसके लिए देशभर में 2 लाख स्क्रीन्स लगाने की योजना बनाई गई है. इस मेगा एडवरटाईजिंग प्लेटफॉर्म से रेलवे को 10 सालों में करीब 10 हजार करोड़ मुनाफा होने की उम्मीद है.

ऐड से होगी कमाई

गौरतलब है कि पुरानी दिल्ली, गोरखपुर, ग्वालियर और वाराणसी में बड़े और छोटे डिजिटल स्क्रीन पहले से ही काम कर रहे हैं. रेल प्रशासन ने इन स्टेशनों पर पहले ही इसके लिए अनुबंध की स्वीकृति दे दी है.

इस प्रस्ताव के अंतर्गत रेलवे की देशभर के 2 हजार 175 रेलवे स्टेशनों पर लगभग दो लाख डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन स्थापित करने की योजना है.

कहा जा सकता है कि किराया-भाड़ा में बढ़ोतरी करने के बावजूद कमाई के मोर्चे पर मात खा रहा रेलवे अब अपनी आमदनी बढ़ाने के दूसरे तरीके पर जोर-शोर से लग गया है. इसी कड़ी के तहत रेलवे अपने पुराने ढर्रे से इतर नए-नए नुस्खे का भी इजाद कर रहा है.

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