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‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से राहुल गांधी को इतना प्यार क्यों है?

खबर आई है कि राहुल गांधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अमेरिका में एक सेमिनार में लेक्चर देने जा रहे हैं

Updated On: Sep 06, 2017 04:13 PM IST

Arun Tiwari Arun Tiwari
सीनियर वेब प्रॉड्यूसर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से राहुल गांधी को इतना प्यार क्यों है?

खबर आई है कि राहुल गांधी अमेरिका के एक सेमिनार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर लेक्चर देने जा रहे हैं. उनके नजदीकी लोगों का ये भी कहना है कि राहुल गांधी को इस तकनीक में बेहद दिलचस्पी है. लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि राहुल गांधी इस समय उस पार्टी के नेता हैं जो लगभग हर चुनाव हार रही है. इस साल के अंत तक होने वाले गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी के लिए संभावनाएं बेहद कम है. ऐसे में राहुल गांधी का एकदम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरफ झुकाव अच्छे संकेत नहीं हैं!

अभी दो ही चार दिन बीते हैं जब राहुल गांधी नॉर्वे से लौट कर आए थे. कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की उम्मीद जागी थी कि अब वे शायद टिक कर कुछ दिन रहेंगे और सामने चंद्रमा की कलाओं की तरह बढ़ती बीजेपी का सामना करेंगे. लेकिन राहुल गांधी अगर किसी बात के साथ सबसे ज्यादा खेलते हैं तो वो है कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास.

राहुल के ऐसे न जाने कितने भाषण हैं जिनका बचाव कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपनी रियल इंटेलिंजेंस के दम पर दिया है. लेकिन अब उनके नेता ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर व्याख्यान देने जा रहे हैं!

राहुल गांधी के इस तकनीक के जितने हिमायती होने की बात सामने आ रही है संभव है कि उनका भरोसा इस बात में हो कि कांग्रेस पार्टी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ही बाहर निकाला जा सकता है! शायद अपने आस-पास के कांग्रेसी नेताओं की रियल इंटेलिजेंस की जगह उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही बेड़ा पार कर पाए!

खुद का अनुभव दे रहा है प्रेरणा!

rahul gandhi

संभव है कि राहुल गांधी खुद भी अपने तकरीबन 20 साल के राजनीतिक अनुभव के यह ज्ञान हो चुका हो कि देश के लिए ही नहीं पार्टी के भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बेहद जरूरत है. उसी के सहारे सारे राज्यों में बीजेपी को राजनीतिक शतरंज की चालों में मात दी जा सकती है. सोचना भी गलत नहीं है. आखिर जब इसी आर्टिफिशयल कंप्यूटर ने शतरंज के खेल में गैरी कास्पोरोव को मात दे दी थी तो फिर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की बिसात ही क्या.

मतलब देश भर में जीत हासिल कर रहे भगवा झंडे को कोई शिकस्त दे सकता है तो वो इस समय सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फायदा ये भी है कि पार्टी नेता ज्यादा सक्रिय न दिखें तो उससे भी सवालों का जवाब मांगा जा सकता है. लेकिन इसका नुकसान ये है कि पहले से शिथिल पड़ी पार्टी के कार्यकर्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भरोसे रहेंगे और पार्टी का और ज्यादा बंटाधार ही होगा.

इसलिए भले ही राहुल भाषण देने जा रहे हों लेकिन इस समय निराश कांग्रेसी नेता यही प्रार्थना कर रहा होगा कि हे प्रभु! हमारे नेता का भरोसा रियल इंटेलिजेंस में करवा दो.

क्या होती है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अर्थ है कृत्रिम तरीके से विकसित की गई बौदि्धक क्षमता. कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आरंभ 1950 के दशक में हुआ था. इसके जरिए के कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है जो उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास करता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क चलते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले सिस्टम के जरिए 1997 में शतरंज के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शुमार गैरी कास्पोरोव को भी हराया जा चुका है.

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