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महात्मा गांधी जयंती पर वर्धा से राहुल गांधी का मोदी पर निशाना, सेवाग्राम से क्या नई शुरुआत कर पाएंगे राहुल ?

महाराष्ट्र के वर्धा में कांग्रेस के तमाम दिग्गज जमा हुए थे. कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह भी मौजूद थे.

Updated On: Oct 02, 2018 07:49 PM IST

Amitesh Amitesh

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महात्मा गांधी जयंती पर वर्धा से राहुल गांधी का मोदी पर निशाना, सेवाग्राम से क्या नई शुरुआत कर पाएंगे राहुल ?

महाराष्ट्र के वर्धा में कांग्रेस के तमाम दिग्गज जमा हुए थे. कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह भी मौजूद थे. गांधी जयंती के मौके पर सेवाग्राम में हुई इस बैठक में 2019 की रणनीति पर मंथन हुआ.

सेवाग्राम में ही महात्मा गांधी ने अपनी जिंदगी के आखिरी दस साल गुजारे थे, लिहाजा, इस जगह पर पहुंचकर कांग्रेस फिर से बापू के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा ले रही है. कांग्रेस को लगता है कि आज बापू ज्यादा प्रासंगिक हैं, क्योंकि, बीजेपी के नफरत की राजनीति का जवाब गांधीवादी तरीके से ही दिया जा सकता है.

सेवाग्राम में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक के बाद राहुल गांधी को एक रैली को संबोधित भी किया. रैली के दौरान राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की केंद्र की सरकार पर निशाना साधा. हालांकि वर्धा की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोई नई बात नहीं कही. राहुल गांधी की तरफ से पिछले कुछ महीनों से राफेल डील का मुद्दा उठाया जा रहा है. भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जा रहा है. प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला जा रहा है. एक बार फिर वही हुआ.

RAHUL GANDHI

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल सौदे में गड़बड़ी के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 526 करोड़ रुपए के बदले 1600 करोड़ रुपए क्यों दिए गए? राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए फिर कहा कि प्रधानमंत्री उनकी आंखों में आंख डालकर इस मुद्दे पर बोल नहीं पा रहे हैं ?

राहुल गांधी जब वर्धा में थे, ठीक उसी दिन यूपी-दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के साथ पुलिस की झड़प हो रही थी. राहुल ने भी किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा. खासतौर से मोदी सरकार पर अमीरों की हितैषी और गरीब मजदूर-किसान विरोधी बताने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी.

राहुल ने कहा, ‘देश का किसान हाथ जोड़कर पीएम से कहता है. लेकिन, आपने दाम नहीं दिया, जबकि देश के 15-20 पूंजीपतियों का आपने 20 हजार करोड़ रूपए कर्ज माफ कर दिया.’ राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री किसानों के कर्ज माफी नहीं करते हैं, बल्कि कहते हैं कि यह हमारी पॉलिसी नहीं है.

वर्धा की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम को लेकर भी मोदी सरकार की नीति को जनविरोधी बताया. यहां भी राहुल गांधी ने आम लोगों का पैसा निकालकर अमीरों के जेब भरने का आरोप लगाया. नोटबंदी पर लोगों की परेशानी और रोजगार के मुद्दे पर मोदी सरकार के वादे के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रैली के दौरान सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताने की कोशिश की.

लेकिन, वर्धा की रैली के दौरान दो बातें साफ दिख रही थीं. पहला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ और ईमानदार छवि पर निशाना साधने की रणनीति और दूसरा मोदी सरकार की जनता के साथ वादाखिलाफी यानी जो वादा किया था उसे पांच साल में पूरा नहीं करने का आरोप लगाना.

अगर पहले मुद्दे पर बात करें तो लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तय कर लिया है कि हर मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जिम्मेदार ठहराना है. खासतौर से भ्रष्टाचार के आरोपों पर मोदी पर हमला कर राहुल गांधी उनकी साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं. लगता है राहुल गांधी के सलाहकारों ने उन्हें यह गुरु-मंत्र दे दिया है कि मोदी के तिलिस्म को तोड़ने के लिए जनता के बीच उनकी ईमानदार और जनता के प्रति समर्पित चौकीदार की छवि को तोड़ना होगा. लिहाजा राहुल गांधी राफेल डील के मुद्दे पर बार-बार आरोप लगाकर मोदी की चौकीदार पर सवाल खड़ा कर रहे हैं.

RAHUL GANDHI

ये अलग बात है कि राहुल गांधी के आरोपों का सरकार की तरफ से कई बार कई मोर्चों पर जवाब दे दिया गया है. लेकिन, फिर भी राहुल गांधी एक रणनीति के तहत बिना तथ्य के ही सही राफेल डील पर गड़बड़ी का आरोप लगाकर ‘चौकीदार को भागीदार’ बता रहे हैं. कोशिश सिर्फ मोदी की छवि धूमिल करने की है.

अगर दूसरी बात पर गौर करें तो राहुल गांधी ने अपने भाषण के तरीके में आजकल बदलाव किया है. राहुल गांधी का भाषण पहले एकतरफा हुआ करता था. इसमें जनता की भागीदारी कम होती थी. लेकिन, अब राहुल गांधी ने जनता से संवाद की कोशिश शुरू कर दी है. कांग्रेस अध्यक्ष की कोशिश है कि सरकार पर हमला बोलते वक्त जनता का साथ लिया जाए. वर्धा की रैली में भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे पर कुछ ऐसा ही किया.

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