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राहुल गांधी का मिडनाइट शो पार्टी के लिए कितना फायदे का सौदा साबित होगा?

हालांकि राहुल के इस प्रदर्शन में उम्मीद से कम भीड़ हुई लेकिन लोगों के बीच उनका नया और जुदा रूप पसंद किया जा रहा है

Updated On: Apr 15, 2018 09:37 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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राहुल गांधी का मिडनाइट शो पार्टी के लिए कितना फायदे का सौदा साबित होगा?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का इंडिया गेट पर मिडनाइट कैंडल मार्च शो सुपर-डूपर हिट नहीं तो फ्लॉप भी नहीं रहा. राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू और कश्मीर के कठुआ में हुई बलात्कार की घटनाओं के विरोध में गुरुवार आधी रात को इंडिया गेट पर कैंडल मार्च का नेतृत्व किया. इस मौके पर सोनिया गांधी को छोड़ कर परिवार के सभी लोग मौजूद नजर आए. राहुल गांधी का इंडिया गेट पर अचानक कैंडल मार्च करने का फैसला शायद कांग्रेस के भविष्य के लिए फायदा देने वाला सौदा साबित हो सकता है.

कांग्रेस का यह कैंडल मार्च कांग्रेस दफ्तर 24 अकबर रोड से शुरू हुआ. मानसिंह रोड होते हुए यह कैंडल मार्च इंडिया गेट पर समाप्त हुआ. राहुल गांधी के अचानक एक ट्वीट के बाद कांग्रेस के तमाम दिग्गज इस कैंडल मार्च का हिस्सा बने.

आपको बता दें कि गुरुवार रात 10 बजे से ही पार्टी ऑफिस 24 अकबर रोड पर कांग्रेस के दिग्गजों का जमावड़ा शुरू हो गया था. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में निकाली गई इस कैंडल मार्च में प्रियंका गांधी, रॉबर्ट वाड्रा, अशोक गहलोत, अजय माकन, दिग्विजय सिंह, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद, रणदीप सुरजेवाला, संजय निरूपम, कपिल सिब्बल समेत कई दिग्गजों ने भाग लिया.

पीएम मोदी के तर्ज पर आधी रात को कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कांग्रेस ऑफिस से हुई. मानसिंह रोड पर भीड़ पहुंचने पर दिल्ली पुलिस ने रोकने का प्रयास किया गया तब तक राहुल और प्रियंका गांधी मानसिंह रोड पर नहीं पहुंचे थे.

RAhul gandhi candle march

राहुल गांधी को कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस के द्वारा मानसिंह रोड पर रोकने की खबर मिली वह मानसिंह रोड पर आने का बजाए सीधे इंडिया गेट पहुंच गए. पहले राहुल गांधी का प्रोग्राम मानसिंह रोड पर आकर भीड़ के साथ इंडिया गेट तक पैदल मार्च करने का था. राहुल अपना प्रोग्राम कैंसिल कर सीधे इंडिया गेट पहुंच गए. प्रियंका गांधी भी दिल्ली पुलिस के इस कदम के विरोध में इंडिया गेट पहुंचकर बीच सड़क पर ही बैठ गई.

राहुल गांधी का इंडिया गेट पर पहुंचने के साथ ही भीड़ में अफरा-तफरी मच गई. राहुल गांधी जिधर-जिधर जाते भीड़ उनके पीछे चलने लगती. राहुल गांधी लगातार इधर से उधर चल रहे थे. ऐसा लग रहा था कि वह इंडिया गेट पर कुछ समय बिताना चाह रहे हैं. उनके सुरक्षाकर्मियों को भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था.

इंडिया गेट पर दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी जरूर थी, लेकिन दिल्ली पुलिस के रवैये से लग रहा था कि वह सिर्फ तमाशा देखने के लिए वहां आई है. भीड़ में अफरा-तफरी के बीच कुछ महिलाएं बेहोश भी हो गईं. कुछ शरारती तत्व भी भीड़ में शामिल थे, जो मीडिया की महिलाकर्मियों के साथ बदसुलूकी करते कैमरे में कैद भी हुआ.

लाख खामियां और भीड़ की कमी के बावजूद राहुल गांधी के इस शो को हिट कह सकते हैं. राहुल गांधी का गाड़ी के बोनट पर चढ़ कर मीडिया से बातचीत करना काफी कुछ बयां कर रहा था. ऐसा लग रहा था कि विपक्ष में नई जान आ गई है. राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘देश में महिलाओं के प्रति असुरक्षा की भावना है. मोदी सरकार को महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर होना पड़ेगा. देश में महिलाओं के प्रति अत्याचार की घटना लगातार बढ़ती ही जा रही है. यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि एक राष्ट्रीय समस्या है. मोदी जो को इस पर विचार करना चाहिए.’

कुलमिलाकर काफी अरसे के बाद देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस ने अपना दम दिखाया. संसद में बेशक कांग्रेसी नेताओं में आक्रामक रवैया का अभाव रहता है, लेकिन इंडिया गेट पर राहुल गांधी सहित कांग्रेस के तमाम नेताओं का आक्रमक चेहरा सामने आया.

इंडिया गेट पर कांग्रेसी नेताओं का आक्रामक रवैया देख कर ऐसा लग रहा था कि काफी अरसे के बाद कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी के सामने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. देश में वाकई में विपक्ष नाम की भी कोई संस्था होती है, यह इस कैंडल मार्च के दौरान देखने को मिला.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का अचानक कैंडल मार्च करने का फैसला चौंकाने वाला फैसला था. देश में पिछले कुछ दिनों से दो-दो रेप कांड की गूंज के बाद लोगों को महिला सुरक्षा की चिंता सताने लगी थी. आधी रात को कांग्रेस के दिग्गजों के साथ खुद प्रियंका गांधी अपनी बेटी और पति के साथ इंडिया गेट पहुंचीं. प्रियंका गांधी के आक्रामक चेहरे और अंदाज से लग रहा था कि कांग्रेस को वाकई प्रियंका जैसी ही नेता की जरूरत है.

प्रियंका गांधी को लेकर भीड़ में जिस तरह से क्रेज था उससे लग रहा था कि वह अगर राजनीति में आती हैं तो वाकई में कांग्रेस के सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा सकती है. प्रियंका गांधी की एक झलक पाने और उनसे हाथ मिलाने को लेकर लोगों में जिस तरह से पागलपन था वह वाकई में कांग्रेस के दूसरे नेताओं में दूर-दूर तक नजर नहीं आता.

priyanka gandhi

प्रियंका गांधी एक बार तो भीड़ की आक्रमकता और उदंडता को लेकर नाराज भी हो गई. प्रियंका एसपीजी घेरे को तोड़ते हुए इंडिया गेट की तरफ दौड़ने लगीं. लेकिन, आखिर में राहुल गांधी के पास पहुंचने पर फिर से मोर्चा थाम लिया.

देखा जाए तो काफी सालों के बाद राहुल गांधी ने अन्ना आंदोलन की याद ताजा कर दी. साल 2011 में अन्ना आंदोलन के दौरान भी इसी तरह ट्विटर पर लोगों से इंडिया गेट पहुंचने की अपील की जाती थी. लोग कुछ ही घंटों में इंडिया गेट को जाम कर देते थे.

हालांकि, अन्ना आंदोलन की तरह राहुल भीड़ नहीं जुटा पाए. राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी ने भीड़ की जितनी अपेक्षा की थी उतनी भीड़ इंडिया गेट या कांग्रेस दफ्तर तक वह खींचने में नाकामयाब साबित हुए. इसके बावजूद राहुल गांधी का यह अंदाज उनके पहले के अंदाज से काफी जुदा नजर आया.

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