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राफेलः पूर्व रक्षा सचिव का बयान, कहा- रक्षा मंत्रालय ने कीमत पर नहीं जताई थी कोई आपत्ति

वहीं मोहन कुमार ने मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि जो कुछ भी सामने आया है, उसका कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है

Updated On: Feb 08, 2019 02:35 PM IST

FP Staff

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राफेलः पूर्व रक्षा सचिव का बयान, कहा- रक्षा मंत्रालय ने कीमत पर नहीं जताई थी कोई आपत्ति

राफेल डील पर नए सिरे से राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. रिपोर्ट में पूर्व रक्षा सचिव जी मोहन कुमार की नोटिंग का जिक्र है. वहीं जी मोहन कुमार ने मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि जो कुछ भी सामने आया है, उसका कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है. बता दें कि राफेल डील के समय जी मोहन रक्षा सचिव थे.

नोट में कीमत के बारे में ही नहीं कई और अहम बातों का भी जिक्र था

द हिंदू की रिपोर्ट आने के बाद राफेल समझौते के समय रक्षा सचिव रहे जी मोहन कुमार का बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा है, उस नोट का कीमत से कोई लेना-देना नहीं था. वह सिर्फ सोवरेन गारंटी, सामान्य नियमों और शर्तों के बारे में था. उस नोट में सिर्फ कीमत के बारे में ही नहीं बल्कि कई और अहम बातों का भी जिक्र था. दरअसल शुक्रवार को अंग्रेजी अखराब द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिस वक्त रक्षा मंत्रालय राफेल फाइटर जेट लीड को लेकर काम कर रहा था उसी वक्त प्रधानमंत्री कार्यालय फ्रांस की सरकार के साथ डील कर रहा था जिसकी वजह से समझौते की मेज पर भारत का पक्ष कमजोर पड़ गया.

पीएमओ की बेवजह दखल की वजह से समझौता कमजोर बनता जा रहा है

रिपोर्ट के मुताबिक 24 नवंबर 2015 को एक नोट तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को गई थी जिसमें डिफेंस सेक्रेट्री जी मोहन कुमार ने आरोप लगाया था कि पीएमओ की बेवजह दखल की वजह से समझौता कमजोर और तनावपूर्ण बनता जा रहा है. इसी रिपोर्ट के हवाले से आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- रक्षा मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री ने समानांतर बात की और हमारी स्थिति कमजोर की. इस पर प्रधानमंत्री जवाब दें.’ राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेस में (24 नवंबर 2015) रक्षा मंत्रालय के नोट का अंश दिखाया. इस रिपोर्ट की गूंज आज लोकसभा में सुनाई दी. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि मामले की जांच संसद की संयुक्त समिति से करवाई जाए ताकि सबकुछ शीशे की तरह साफ हो जाए.

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