विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

'गला काट प्रतियोगिता' में सियासी गॉडमदर बनीं राबड़ी देवी

उनके गुस्से भरे बयान में आम जनता की नाराजगी तो दिखाई नहीं देती. अव्वल एक मां और एक पत्नी की पीड़ा ही झलकती है जो नित्यानंद के बयान के बहाने ही सही धारदार जुबान के जरिए बाहर दिखी.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Nov 22, 2017 10:37 PM IST

0
'गला काट प्रतियोगिता' में सियासी गॉडमदर बनीं राबड़ी देवी

राजनीति में राबड़ी देवी का परिचय बहुत लंबा है. सिर्फ एक पद या नाम से उनकी पहचान को सीमित नहीं किया जा सकता है. वो बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री हैं. राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष, पूर्व रेल मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी हैं. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव की मां हैं. सांसद मीसा भारती की मां हैं. सक्रिय राजनीति में राबड़ी देवी अपने बयानों से आरजेडी में जोश भरने का काम करती आई हैं.

कैसे भी हालात क्यों न हों उन्हें सीबीआई, ईडी या फिर पीएम मोदी से डर नहीं लगता है. उनके बयानों में गुस्सा 'सियासत की गॉडमदर' की तरह दिखता है और जब यदाकदा उन्हें गुस्सा आता है तो फिर ज्वालामुखी फटता है. खास बात ये है कि उनको सिर्फ पीएम मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर ही गुस्सा आता है. एक बार फिर राबड़ी देवी नाराज हो गईं. देवी के कोप के भाजन बने पीएम मोदी. राबड़ी ने ये तक कह डाला कि बिहार में पीएम मोदी का गला काटने के लिए बहुत लोग तैयार हैं.

उनके अल्फाज कुछ इस तरह की शक्ल में निकले. 'बीजेपी वाले बोलते हैं कि मोदी की तरफ उठने वाली उंगली और हाथ काट देंगे. मैं कहती हूं कि हिम्मत है तो काटो. बिहार में नरेंद्र मोदी का हाथ और गला काटने वाले भी बहुत लोग हैं.'

राबड़ी के बयान से आप समझ हो गए होंगे कि वो भी देश भर में चल रही गला काटने की गला काट प्रतियोगिता में शामिल हो गई हैं. आजकल अखबारों में गला काटने और जीभ काटने की खबरें इश्तेहारों की तरह छप रही हैं.

हाल ही में बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने भी कहा था ‘जिस परिस्थिति से देश के प्रधानमंत्री बने हैं, एक गरीब का बेटा पीएम बना है, उनका सम्मान होना चाहिए. हर व्यक्ति को इज्जत करनी चाहिए. अगर किसी ने पीएम मोदी के खिलाफ उंगली उठाई, तो हम उसकी उंगली और हाथ तोड़ देंगे और जरूरत पड़ी तो काट भी डालेंगे.’ हालांकि विवाद बढ़ते देख नित्यानंद राय ने तुरंत ही माफी भी मांग ली.

सिर, हाथ, नाक और जुबान को लेकर बड़ी-बड़ी और मुंह मांगी कीमतें भी लग रही हैं. शख्सियत के हिसाब से रेट लिस्ट बनी है. एक नजर रेट लिस्ट पर पहले डाल लेते हैं. 21 लाख से 10 करोड़  रुपए तक के रेट फिक्स कर दिए गए हैं.

फारूक अब्दुल्ला ने जैसे ही कहा कि पीओके पाकिस्तान का हिस्सा है ठीक इससे पहले की पाकिस्तान से तारीफ और शुक्रिया का कोई पैगाम आता उससे पहले ही यहीं से उनकी जुबान काटने का फरमान आ गया. उनकी जुबान के लिये कुछ लोगों ने 21 लाख रुपए फिक्स किए.

फिल्म पद्मावती पर भी गला काट कॉम्पिटिशन जारी है. निर्देशक संजय लीला भंसाली और अभिनेत्री दीपिका के सिर की सबसे ज्यादा कीमत लगाई है. संजय लीला भंसाली का सिर काटने का दस करोड़ का इनाम रखा गया है. दस करोड़ के ईनाम पर बॉलीवुड अभिनेत्री ट्विंटल खन्ना ने ट्वीट करके पूछा था कि ‘देश जानना चाहता है कि इन 10 करोड़ रुपए पर भी जीएसटी लगा है क्या’?

बात सिर्फ सिर की नहीं बल्कि लोगों की नाक पर भी गुस्सा उबल जाता है. यही वजह है कि पद्मावती का किरदार निभाने वाली अदाकारा दीपिका की नाक काटने की भी धमकी राजपूत हित में जारी की गई है.

धमकियों के सिलसिले और ईनाम के काफिले काफी पहले से चले आ रहे हैं. बस सुर अलग अलग होते हैं. ऐसा ही सुरों के सरताज सोनू निगम के साथ भी हुआ. सोनू ने जब अज़ान को लेकर 'उल्टा सुर' लगा दिया तो कट्टरपंथियों ने उनका सिर काटने का भी फतवा जारी कर दिया और साथ में सोनू के सिर के लिये दस लाख के ईनाम का टैग भी फतवे के साथ चस्पा कर दिया.

सिर उतारने की लफ्फाजी में कोई किसी से पीछे नहीं है. मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी ने खूब लिखा था – 'इश्क की दास्तान है प्यारे....सबकी अपनी अपनी जुबान है प्यारे...'. यहां इश्क की जगह सिर कलम करने के मामले में सबकी अपनी अपनी जुबान है. ये भारत के नक्शे में किसी भी प्रांत में फिसलती, बलखाती, डराती और धमकाती दिखाई दे सकती है.

अब पश्चिम बंगाल में ही बीजेपी के एक नेता को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इतना गुस्सा आया कि वो जुबान को लगाम नहीं दे सके. उन्होंने ममता बनर्जी का सिर काटने पर 11 लाख रुपए का ईनाम देने का एलान कर दिया.

ये समझने वाली बात है कि आखिर सिर या गला या जुबान या फिर नाक काटना क्या इतना आसान है?

दूसरी बात ये भी समझने वाली है कि आखिर इनका रेट कैसे फिक्स किया जाता है?

दिलचस्प ये है कि ईनाम रखने वाला भी ये जानता है कि उसकी जेब से कुछ जाने वाला नहीं है क्योंकि किसी का सिर काटना न तो किसी के बस की बात है और न ही ऐसा आदिम युग देश में है. न कोई नाक कटेगी और न जेब से रोकड़ा देना पड़ेगा.

बस इसी बात को माननीय राबड़ी देवी बहुत अच्छे से राजनीति में समझ गईं. राबड़ी राजनीति में जुबान की कीमत समझ गईं. वो ये सीख गई कि जुबान से भले ही जंग जीती न जा सके लेकिन लड़ी तो जा सकती है. यही वजह रही कि उन्होंने महिलाशक्ति और देवी रूप दिखाते हुए जुबान को कटार बना डाला. कह डाला कि बिहार में पीएम मोदी का गला काटने के लिए कई लोग तैयार है.

लेकिन वो ये तो बताएं कि आखिर पीएम मोदी से इतनी नाराजगी की असल वजह क्या है? क्या लालू प्रसाद यादव के पुराने घोटालों की चार्जशीट से वो आहत हैं?  क्या बेटे तेजस्वी के होटल आवंटन घोटाले से वो नाराज हैं?  क्या बेनामी संपत्ति के मामले में मीसा भारती और दामाद से इनकम टैक्स और ईडी की पूछताछ को लेकर वो रौद्र रूप में हैं?  या फिर मंत्री रहे बेटों के सरकारी बंगले खाली करवाने से आवेश में हैं?

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

उनके गुस्से भरे बयान में आम जनता की नाराजगी तो दिखाई नहीं देती. अव्वल एक मां और एक पत्नी की पीड़ा ही झलकती है जो नित्यानंद के बयान के बहाने ही सही धारदार जुबान के जरिए बाहर दिखी.

जांच एजेंसियों पर भड़कते हुए राबड़ी देवी बोलीं कि 'मैं सीबीआई, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) , सबका त्रिया-चरित्र जानती हूं. तुम लोगों को नोटिस भेजना है, नोटिस पर नोटिस भेजते रहो. मैंने जब गलत किया ही नहीं है, तो डरने का सवाल ही नहीं है.'

लेखक ने लेख की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि राबड़ी देवी को सीबीआई और ईडी से डर नहीं लगता. उसी कथन के सत्यापन के लिए राबड़ी देवी का स्टेटमेंट यहां लगाया गया है ताकि राबड़ी देवी एक बार फिर से गुस्सा न हो जाएं. क्योंकि उनके गुस्से से सीएम नीतीश भी डरते हैं जिन्हें कभी राबड़ी अपना देवर मानती थीं. बहरहाल , सियासत होती ही अजब है जहां रिश्तों की तरह जुबां भी गजब है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi