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पंजाब के युवाओं का पलायन, पार्ट-2: भारतीयों को इराक भेजने वाले एजेंटों की तलाश

इराक में कामगारों की मांग ने पंजाब में अवैध ट्रैवेल एजेंटों को फलने-फूलने का मौका दिया, जो कि अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोहों के गठजोड़ से अपना काम करते हैं

Updated On: Mar 30, 2018 08:40 AM IST

Arjun Sharma

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पंजाब के युवाओं का पलायन, पार्ट-2: भारतीयों को इराक भेजने वाले एजेंटों की तलाश

Editor's Note: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 20 मार्च को संसद को बताया कि 39 भारतीय वर्करों, जिनमें से ज्यादातर पंजाब से थे, की इराक में बीते साल इस्लामिक स्टेट ने हत्या कर दी है. पंजाब में बेरोजगारी की बड़ी समस्या को देखते हुए हजारों साधनहीन व गरीब युवा मध्यपूर्व में जोखिम की अनदेखी कर अपनी किस्मत बनाने वहां जाते हैं. चार हिस्से की रिपोर्ट की श्रृंखला की दूसरी कड़ी इलाके में भारतीय कामगारों की हालत पर केंद्रित है. पहली कड़ी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

कपूरथला के गोबिंदर सिंह उन 39 लोगों में से एक हैं, जिनको इराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट के हाथों मार डाला गया. उनको इराक भेजने के लिए उनके परिवार द्वारा लिया गया 1.5 लाख रुपए का कर्ज अभी भी चुकता नहीं हुआ है. गोबिंदर सिंह के भाई दविंदर सिंह बताते हैं कि गोबिंदर को दुबई में कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम दिलाने के वादे पर गुरदासपुर जिले में ट्रैवल एजेंट को 1.5 लाख रुपया दिया गया था. 'ट्रैवल एजेंट ने वादा किया था कि मेरे भाई को दुबई भेजा जाएगा, लेकिन इसकी जगह जुलाई 2013 में उन्हें इराक भेज दिया गया. गोबिंदर से हमारी अंतिम बार मार्च 2014 में बात हुई थी.' मोसुल पर इस्लामिक स्टेट का जुलाई 2014 में कब्जा हो गया था.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, '1991 में खाड़ी युद्ध से पहले इराक में 80,000 से अधिक भारतीय नागरिक थे. इराक युद्ध शुरु होने से पहले इनमें से अधिकांश इराक छोड़ चुके थे. 2003 के हमले के बाद ठेकेदारों द्वारा इराक में विदेशी सैन्य ठिकानों को कई तरह की सेवाएं मुहैया कराने के लिए हजारों कामगारों की भर्ती की गई. इनमें से कई खतरनाक सुरक्षा हालात में असहाय छोड़ दिए गए.'

अवैध ट्रैवल एजेंटों के बढ़ने से बढ़ी 'मानव तस्करी'

बाद में इराक में और कामगारों की मांग ने पंजाब में अवैध ट्रैवेल एजेंटों को फलने-फूलने का मौका दे दिया, जो कि अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोहों के गठजोड़ से अपना काम करते हैं. कानूनन सिर्फ विदेश मंत्रालय से लाइसेंस प्राप्त इमिग्रेशन एजेंसी ही लोगों को उचित दस्तावेजों के साथ वर्क वीजा पर दूसरे देश भेज सकती है.

गोबिंदर के परिवार ने बताया कि ट्रैवेल एजेंट, जिसका नाम राजबीर सिंह था, काफी समय से कथित रूप से गायब है और उसका अपने परिवार से भी संपर्क नहीं है. पुलिस अभी तक उसे तलाश नहीं कर पाई है.

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, जालंधर जिला प्रशासन के पास सिर्फ 287 रजिस्टर्ड ट्रैवेल एजेंट हैं. 170 लुधियाना में और 134 अमृतसर में रजिस्टर्ड ट्रैवेल एजेंट हैं. मोसुल में मारे गए ज्यादातर (39 में से 27) लोग पंजाब के दोआबा क्षेत्र के रहने वाले थे, जिसमें होशियारपुर, कपूरथला और जालंधर जिले शामिल हैं. सरकार ने राज्य में ट्रैवेल एजेंटों पर निगरानी रखने के लिए पंजाब ट्रैवेल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन अधिनियम, 2012 के तहत नियम बनाए हैं, लेकिन इसका पालन शायद ही कभी होता है. पंजाब में गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सभी ट्रैवेल एजेंटों के लिए जरूरी है कि वह संबंधित जिले के उपायुक्त के पास रजिस्ट्रेशन कराएं, जिसके बाद ही उन्हें लाइसेंस मिलेगा. अधिकारी का कहना है कि 'फिर भी कानून में खामियां हैं. अवैध तरीके से काम कर रहा शख्स अगर किसी नौकरी के अभ्यर्थी से सीधे संपर्क करता है तो उसे तब तक नहीं पकड़ा जा सकता जब तक उसकी गतिविधियों के बारे में पुलिस को शिकायत ना दी जाए.'

दुबई के नाम पर इराक ले जाया गया

सविंदर कौर के बेटे निशान सिंह का नाम भी इराक में मारे गए लोगों की विदेश मंत्रालय द्वारा पुष्टि की गई सूची में शामिल हैं. सविंदर बताती हैं कि उन्होंने निशान को दुबई, जहां एक ट्रैवेल एजेंट ने कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी का वादा किया था, भेजने के लिए 1.70 लाख रुपये का कर्ज लिया था. 'मेरे बेटे समेत कुल 11 लोग अमृतसर से दुबई गए थे. बाद में उन्हें बताया कि जिस कंपनी में काम करने के लिए उन्हें भेजा गया था, वह कंपनी अपना काम बंद कर चुकी है. उन्हें कहा गया कि वो लोग इसी कंपनी की एक दूसरी ब्रांच में इराक में काम कर सकते हैं. उन लोगों ने आसानी से हां कह दी,' निशान के परिवार ने भी जिस ट्रैवेल एजेंट का नाम लिया, वह राजबीर सिंह है.

रजिस्टर्ड ट्रैवेल एजेंट शिकायत करते हैं कि जालसाज एजेंट छुट्टा घूम रहे हैं, जब कि रजिस्टर्ड एजेंटों को परेशान किया जा रहा है. 66 साल के बृज मोहन, जो पहले जालंधर में ट्रैवेल एजेंट के तौर पर काम कर चुके हैं, बताते हैं कि अधिकारियों की बहुत ज्यादा सख्ती देखने के बाद उन्होंने धंधा छोड़ दिया. वह बताते हैं कि अधिकारियों द्वारा लाइसेंसी एजेंटों को अपने क्लाइंटों का विवरण साझा करने के लिए कई बार बुलाया जाता था, जो कि असुविधाजनक था.

'जब भी कोई अवैध ट्रैवेल एजेंट पकड़ा जाता, पुलिस सब पर शक करने लगती, भले ही वो सारे दस्तावेजों के साथ दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए काम कर रहा हो. पुलिस को निर्दोष ट्रैवेल एजेंटों को परेशान नहीं करना चाहिए, बल्कि उन लोगों पर शिकंजा कसने के लिए नीति बनानी चाहिए जो गैरकानूनी तरीके से काम कर रहे हैं.' यह कहना है बृज मोहन का.

वह बताते हैं कि खाड़ी देशों में काम चाहने वालों को अवैध एजेंट इनमें से किसी भी देश के विजिटर वीजा पर भेजते हैं, और फिर वहां से उन्हें तस्करी के सहारे इराक और सीरिया में विभिन्न कंस्ट्रक्शन कंपनियों में भेज दिया जाता है. बृज मोहन का कहना है कि 'किसी शख्स को इंप्लायमेंट वीजा पर भेजना मुश्किल है, क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा कागजी कार्यवाही करनी होती है.'

Family members of abducted Indians

विदेश भेजने का वादा करने वालों के खिलाफ सतर्क होना होगा

ट्रैवेल एजेंट एसोसिएशन ऑफ पंजाब का मानना है कि लोगों में, खासकर ग्रामीण इलाकों में, जागरूकता और समझदारी पैदा करने की जरूरत है. एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलजीत हायर का कहना है कि लोगों को उनके बारे में सतर्क रहना चाहिए जो उन्हें विदेश भेजने का वादा करते हैं. कुलदीप के अनुसार 'आवेदकों को ट्रैवेल एजेंटों का रजिस्ट्रेशन नंबर मांगना चाहिए और जांचना चाहिए कि क्या उनके पास लाइसेंस है.'

कुलदीप कहते हैं कि उनकी एसोसिशएन ने राज्य सरकार को सुझाव दिया था कि अधिकृत ट्रैवेल एजेंटों के एक बार में सभी दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए जिससे कि उन्हें लगातार परेशान ना किया जाए. वह बताते हैं कि 'सैकड़ों ट्रैवेल एजेंट अब भी जिला प्रशासन से जरूरी लाइसेंस लिए बिना काम कर रहे हैं. पंजाब पुलिस ऐसे एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है और इस बात से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं कि क्या वह वाकई इन एजेंटों द्वारा विदेश भेजे गए लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है.'

जालंधर के उपायुक्त वरिंदर कुमार शर्मा कहते हैं कि युवाओं को बिना उचित कागजी कार्यवाही के विदेश भेजने वाले जालसाज ट्रैवेल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

अमृतसर में पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरपाल सिंह ने बताया कि 'पंजाब से 27 लोगों को इराक भेजने वाले एजेंटों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. यह लोग अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं. उचित जांच के बाद पूरा ब्योरा सामने आ जाएगा.'

(लुधियाना में रहने वाले अर्जुन शर्मा फ्रीलांस लेखक तथा 101Reporters.com के सदस्य हैं. 101Reporters.com  जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग करने वाले संवाददाताओं का देश भर में फैला नेटवर्क है. यहां पेश आलेख में कपूरथलाके जगजीत धांजू से प्राप्त कुछ सूचनाओं का उपयोग हुआ है.)

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