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भीमा-कोरेगांव हिंसा: पुणे कोर्ट ने आनंद तेलतुंबडे को रिहा करने का दिया आदेश

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में संलिप्तता के आरोप झेल रहे आनंद तेलतुंबडे को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, 11 फरवरी तक अंतरिम प्रोटेक्शन हासिल है

Updated On: Feb 02, 2019 05:48 PM IST

FP Staff

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भीमा-कोरेगांव हिंसा: पुणे कोर्ट ने आनंद तेलतुंबडे को रिहा करने का दिया आदेश

पुणे सेशंस कोर्ट ने एक्टिविस्ट आनंद तेलतुंबडो को रिहा करने के आदेश दिए हैं. पुणे पुलिस ने शनिवार को एल्गार परिषद और माओवादियों से संबंध के मामले में दलित शिक्षाविद् (स्कॉलर) आनंद तेलतुंबडे को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था.

दरअसल, भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में संलिप्तता के आरोप झेल रहे ‘गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ के प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, 11 फरवरी तक अंतरिम प्रोटेक्शन हासिल है. इस दौरान वो चाहे तो अग्रिम जमानत के लिए संबंधित अथॉरिटी के पास जा सकते हैं. लेकिन इसके बावजूद पुणे पुलिस ने शनिवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद पुणे की सेशंस कोर्ट ने उनकी रिहाई के आदेश दिए हैं.

बता दें कि शुक्रवार को पुणे की एक विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी. इसके पहले तेलतुंबडे ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील की थी. कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था. पुणे की विशेष अदालत में तेलतुंबडे की अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए एडिशनल सेशन जज किशोर वडाने ने पाया कि उनके खिलाफ जांच में उनकी संलिप्तता दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत इकट्ठा किए गए हैं, जिसके बाद उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था.

पुलिस के अनुसार माओवादियों ने पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद सम्मेलन का समर्थन किया था और यहां दिए गए भड़काऊ भाषण के बाद अगले दिन भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी.

तेलतुंबडे उन सात लोगों में शामिल थे जिनके घरों पर पिछले साल 28 अगस्त को पुणे पुलिस ने रेड मारा था. इनमें से चार- सुधा भारद्वाज, वरवरा राव, वर्नन गोंजाल्विस और अरुण परेरा पहले से ही पुलिस हिरासत में हैं. इन चारों को पिछले साल पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

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