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भारत में पहली बार हुई स्कल इंप्लाट की सफल सर्जरी, 4 साल की बच्ची को मिली नई जिंदगी

डॉक्टरों ने एक चार साल की बच्ची की खोपड़ी को 60 प्रतिशत स्कल इंप्लांट के जरिए बदला है.

Updated On: Oct 10, 2018 11:05 AM IST

FP Staff

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भारत में पहली बार हुई स्कल इंप्लाट की सफल सर्जरी, 4 साल की बच्ची को मिली नई जिंदगी

महाराष्ट्र के पुणे में डॉक्टरों ने नई सफलता हासिल की है और एक चार साल की बच्ची को नई जिंदगी दी है. भारत में पहली बार हुआ स्कल इंप्लांट सफल रहा है. डॉक्टरों ने एक चार साल की बच्ची की खोपड़ी को 60 प्रतिशत स्कल इंप्लांट के जरिए बदला है. इसके लिए बच्ची के लिए खास तैयार किया गया थ्री डी पॉलीएथलीन बोन का इस्तेमाल किया गया.

ये बोन यानी हड्डी बच्ची के स्कल डिफेक्ट के मेजरमेंट के हिसाब से अमेरिका के एक फर्म में बनाया गया था. डॉक्टरों ने बताया कि भारत में परफॉर्म किया गया ये अपनी तरह की पहली सर्जरी है. ये सर्जरी 18 मई को की गई थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, बच्ची का पिछले साल एक एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उसकी खोपड़ी को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा था. डॉक्टरों ने इसके बाद दो बहुत क्रिटिकल सर्जरी की थी. इसके बाद इस साल 18 मई को डॉक्टरों ने इस अहम स्कल इंप्लांट को अंजाम दिया.

बच्ची का शुरुआती इलाज करने वाले भारती हॉस्पिटल के डॉ जितेंद्र ओसवाल ने बताया कि बच्ची को सिर में बहुत भयंकर चोट आई थी और बहुत खून बहा था. हॉस्पिटल लाने तक वो बेहोश थी. बच्ची को तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया. सीटी स्कैन में पता चला कि खोपड़ी के पिछली हड्डी में फ्रैक्चर आने से ब्रेन में काफी सूजन आ गई है. इस टूटी हड्डी से ब्रेन पर दबाव पड़ा था. इससे ब्रेन के फ्लुइड के थक्के बन गए थे. दो दिनों बाद हुए फिर से सीटी स्कैन में पता चला कि एक बहुत ही असामान्य और दुर्लभ सी स्थिति पैदा हो गई थी, जो बहुत ही पीड़ादायक ब्रेन इंजरी में हो सकती है. दरअसल, बच्ची का ब्रेन ही अपने केंद्र से हट गया था. इसे मेडिकल टर्म में मिडलाइन शिफ्ट ऑफ द ब्रेन कहते हैं.

मेडिकल थेरेपी और ऑफिशियल वेंटिलेशन के बावजूद इस फ्लुइड के थक्कों के खत्म न होने पर बच्ची का ऑपरेशन किया गया. न्यूरोसर्जन्स ने बच्ची के डैमेज खोपड़ी का आगे का पूरा हिस्सा यानी फुल फ्रंटल, पार्शियल पैराइटल और टेंपोरल बोन निकाला दिया. इससे बच्ची के दिमाग पर पड़े ब्रेन का दबाव कम हुआ.

डॉक्टरों ने बताया कि सामान्यत: जब भी क्रैनियल बोन निकाला जाता है. इसे फ्रीज कर दिया जाता है और फिर इसे ही रि-इंप्लांट किया जाता है. लेकिन बच्ची की कम उम्र और क्रैनियल बोन के छोटे और नाजुक होने के चलते इसे हटाना ही पड़ा. स्कल बोन रिमूवल सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में सुधार आया.

लेकिन बच्ची के खोपड़ी में पीछे और साइड में बड़े गड्ढों की वजह से उसपर मानसिक रूप से काफी प्रभाव पड़ा था. लेकिन बच्ची की मां बताती हैं कि स्कल इंप्लांट के बाद वो दोबारा पहले की तरह खुश और एक्टिव रहती है. इस सर्जरी से उसे नई जिंदगी मिल गई है.

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