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Pulwama Terrorist Attack: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को कश्मीर में प्रमुखता क्यों दे रहा है ISI

पुलवामा में गुरुवार को भीषण आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी

Updated On: Feb 17, 2019 04:41 PM IST

FP Staff

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Pulwama Terrorist Attack: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को कश्मीर में प्रमुखता क्यों दे रहा है ISI

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को भीषण आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. हमले की जिम्मेदारी लेने वाला आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद है जिसका प्रमुख मसूद अजहर है और यह पाकिस्तान से ऑपरेट होता है. पुलवामा में हुए हमले के बाद यह सवाल बार-बार उठा कि आखिर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ही इतना पसंद क्यों है?

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक खुफिया पुलिस रिपोर्ट ने बीते साल बताया था कि लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन इंटरनेशनल जांच के घेरे में हैं. लश्कर का संस्थापक हाफिज सईद दुनिया के सबसे वांछित आतंकियों में एक है और उसके सिर पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम है.

जैश-ए-मोहम्मद के सबसे आगे आने का कारण (घाटी में उग्रवाद का) लश्कर और उसके प्रमुख की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय जांच के कारण हो सकता है. क्योंकि साल 2017 आतंकियों के लिए बहुत घातक साबित हुआ था. लश्कर और हिजबुल के कई टॉप कमांडर मारे गए थे. जिसके बाद पाकिस्तान से ऑपरेट करने वाले आतंकियों ने घाटी में जैश कैडर को जिंदा किया और उसे फिदायीन हमलों के लिए तैयार किया जिससे इस बीच लश्कर और हिजबुल को तैयार होने का मौका मिल जाए.

सुरक्षाबलों का मानना है कि कश्मीर में जैश ने अगस्त 2016 से अपने पैर जमाने शुरू किए थे. जिसकी शुरुआत कुपवाड़ा और पुंछ से हुई थी. उस दौरान हिजबुल कमांडर बुरहान बानी की मौत पर कश्मीर में प्रदर्शन हो रहे थे. जैश को जिंदा करने में सबसे महत्वपूर्ण स्थानीय कमांडर नूर मुहम्मद तांत्रे उर्फ नूर त्राली था.

2018 में जैश ने कश्मीर में आतंकियों को स्नाइपर हमलों के लिए तैयार किया था. अक्टूबर 2018 में, जब सुरक्षा बलों ने एक जैश स्नाइपर दस्ते को खत्म किया, तो उसका शीर्ष कमांडर उस्मान हैदर, जैश प्रमुख मसूद अजहर का भतीजा निकला था.

जैश एक देवबंदी इस्लामिक संगठन है, जिसके देवबंदी अफगान तालिबान, पाक तालिबान, एंटी शिया लश्कर-ए-झांगवी और अल-कायदा से करीबी संबंध हैं.

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