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पहले भी हुई है गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की कोशिश, लेकिन...

ऐसा नहीं है कि किसी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण का लाभ देने के लिए पहली बार प्रयास किया हो. इससे पहले भी कई प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन सब किसी न किसी कारण से असफल हो गए

Updated On: Jan 08, 2019 01:27 PM IST

FP Staff

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पहले भी हुई है गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की कोशिश, लेकिन...

केंद्र की मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को शिक्षा और नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लिए संसद के निचले सदन लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश कर दिया है. इस विधेयक को सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने लोकसभा में पेश किया. सरकार तय आरक्षण कोटा से अलग 10 प्रतिशत आरक्षण देने जा रही है. इसी लिए सरकार को संविधान संशोधन विधेयक लाने की जरूरत पड़ रही है. हालांकि अभी भी विधेयक के प्रावधानों के बारे में जानकारी सामने नहीं आई है.

ऐसा नहीं है कि किसी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण का लाभ देने के लिए पहली बार प्रयास किया हो. इससे पहले भी कई प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन सब किसी न किसी कारण से असफल हो गए. आइए जानते हैं कब और किस सरकार ने ऐसा प्रयास किया था.

पीवी नरसिम्हा राव- 1991

अपने आप में ऐसा पहला प्रयास कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार ने किया था. प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए ओबीसी आरक्षण पॉलिसी में बदलाव करने का फैसला लिया था.

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और कोर्ट ने आरक्षण देने की सीमा 50 प्रतिशत तय कर दी यानी इससे ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता था.

अटल बिहारी वाजपेयी- 2003

न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, आम चुनाव से एक साल पहले और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभा से कुछ ही दिन पहले अगस्त, 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने मंत्रियों के एक समूह (जीओएम) का गठन किया था. इसका नेतृत्व पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी कर रहे थे. इस जीओएम का गठन आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के लिए किया गया था.

इसमें आडवाणी के अलावा, उस समय के कानून मंत्री अरुण जेटली, सामाजिक न्याय मंत्री सत्यनारायण जाटिया और रेल मंत्री नीतीश कुमार शामिल थे. इस समूह ने अन्य दलों से इस मामले में आयोग बनाने को लेकर कई दौर की बैठक की थी. लेकिन बाद में यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया.

अटल बिहारी वाजपेयी- 2004

2004 आम चुनाव से पहले जनवरी, 2004 में केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एक आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के लिए मापदंड तय करने के लिए एक आयोग का गठन किया था. पूर्व केंद्रीय गृह सचिव वाल्मीकि प्रसाद सिंह ने चार सदस्यीय आयोग के अध्यक्ष थे. लेकिन इस आयोग से भी कुछ हासिल नहीं हुआ क्योंकि 2004 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार हो गई थी.

मनमोहन सिंह- 2006

कांग्रेस नित यूपीए -1 की सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के विचार का पता लगाने के लिए जुलाई, 2006 में एक आयोग का गठन किया था. इस आयोग का काम राज्यों से इस बारे में राय लेने का था.

इस आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड मेजर जनरल एसआर सिन्हा ने 4 चार साल बाद 2010 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में तमाम तरह के सुझाव दिए गए थे लेकिन इसे भी अमली जामा नहीं पहनाया जा सका.

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