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गांधी, अंबेडकर से प्रेरित होकर मांगा था याकूब के लिए क्षमादान: गोपालकृष्ण गांधी

कहा, मृत्युदंड को गलत मानता हूं इसलिए लिखा था पत्र.

Bhasha Updated On: Jul 18, 2017 04:31 PM IST

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गांधी, अंबेडकर से प्रेरित होकर मांगा था याकूब के लिए क्षमादान: गोपालकृष्ण गांधी

उपराष्ट्रपति पद के लिए 18 विपक्षी दलों के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी ने आज कहा कि वह किसी राजनैतिक दल के नहीं बल्कि, भारत के नागरिकों के प्रतिनिधि हैं और वो भारतीय राजनीति से आम आदमी के उठते भरोसे को दूर करने का प्रयास करेंगे.

उन्होंने आगे यह भी साफ किया कि वो मृत्युदंड के खिलाफ महात्मा गांधी और बीआर अंबेडकर के विचारों से प्रभावित हैं, जिसकी वजह से ही उन्होंने आतंकवादी याकूब मेमन और पाकिस्तान में मृत्युदंड पाए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को क्षमादान दिए जाने की वकालत की.

'मृत्युदंड को गलत मानता हूं'

यह पूछे जाने पर कि शिवसेना ने गांधी की उम्मीदवारी का इस आधार पर विरोध किया है कि उन्होंने आतंकवादी याकूब मेमन को क्षमादान देने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा था, गांधी ने कहा कि मृत्युदंड के मामले में वह महात्मा गांधी एवं बी आर अंबेडकर के विचारों से प्रभावित हैं जिन्होंने हमेशा फांसी का विरोध किया था.

उन्होंने कहा कि इस मामले में याकूब के लिए उन्होंने एक स्वतंत्र नागरिक के तौर पर पत्र लिखा था क्योंकि वह मृत्युदंड को गलत मानते हैं.

गांधी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए मंगलवार को नामांकन भरने के बाद संसद भवन स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को जाकर नमन किया.

इसके बाद उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘मैं एक सामान्य नागरिक हूं और इस चुनाव में नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक निर्दलीय एवं स्वतंत्र नागरिक की तरह खड़ा हुआ हूं.’ उन्होंने 18 विपक्षी दलों को उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किए जाने के लिए आभार भी जताया.

'लोगों के लिए ही है राजनीति'

उन्होंने कहा कि वह जनता और राजनीति के बीच बढ़ती खाई को लेकर काफी चिंतित हैं. वो चाहते हैं कि इस खाई को दूर किया जाए. उन्होंने कहा कि उनकी तीन प्राथमिकताएं हैं.

पहली- लोगों के मन में यह भरोसा दिलाना कि राजनीति उनके लिए ही है और राजनीति से उनके ध्वस्त हो रहे भरोसे को कायम करना.

दूसरा- विभाजनकारी ताकतों से मुकाबला ताकि भविष्य बेहतर बन सके.

तीसरा- देश की करीब-करीब आधी जनसंख्या युवा होने के बावजूद बेरोजगार और मायूस है. इस वर्ग की समस्याओं की ओर ध्यान दिया जाना.

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