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कोविंद का राष्ट्र के नाम संबोधनः सुविधाभोगी नहीं, त्याग करनेवाला राष्ट्र बनाना होगा

कोविंद ने कहा कि जहां बेटियों को, बेटों की ही तरह, शिक्षा, स्वास्थ्य और आगे बढ़ने की सुविधाएं दी जाती हैं, ऐसे समान अवसरों वाले परिवार और समाज ही एक खुशहाल राष्ट्र का निर्माण करते हैं

Bhasha Updated On: Jan 25, 2018 09:54 PM IST

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कोविंद का राष्ट्र के नाम संबोधनः सुविधाभोगी नहीं, त्याग करनेवाला राष्ट्र बनाना होगा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के जीवन को खुशहाल बनाने को लोकतंत्र की सफलता की कसौटी बताया. एक ऐसे समाज की वकालत की जहां किसी दूसरे नागरिक की गरिमा और निजी भावना का उपहास किए बिना किसी के नजरिए से या इतिहास की किसी घटना के बारे में भी हम असहमत हो सकते हैं.

69वें गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कोविंद ने कहा कि ऐसे उदारतापूर्ण व्यवहार को ही भाईचारा कहते हैं.

उन्होंने कहा कि अनुशासित और नैतिकतापूर्ण संस्थाओं से एक अनुशासित और नैतिक राष्ट्र का निर्माण होता है. ऐसी संस्थाएं, अन्य संस्थाओं के साथ, अपने भाई-चारे का सम्मान करती हैं. वो अपने कामकाज में ईमानदारी, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखती हैं.

कोविंद ने कहा, ‘हमारे संविधान निर्माता बहुत दूरदर्शी थे. वे ‘कानून का शासन’ और ‘कानून द्वारा शासन’ के महत्त्व और गरिमा को भली-भांति समझते थे. वे हमारे राष्ट्रीय जीवन के एक अहम दौर के प्रतिनिधि थे.’

संविधान का निर्माण सामाजिक बदलाव का दस्तावेज था 

उन्होंने कहा, ‘हम सौभाग्यशाली हैं कि उस दौर ने हमें गणतंत्र के रूप में अनमोल विरासत दी है.’ उन्होंने पल भर भी आराम नहीं किया. बल्कि दुगने उत्साह के साथ संविधान बनाने के महत्त्वपूर्ण कार्य में पूरी निष्ठा के साथ जुट गए. उनकी नजर में हमारा संविधान, हमारे नए राष्ट्र के लिए केवल एक बुनियादी कानून ही नहीं था, बल्कि सामाजिक बदलाव का एक दस्तावेज था.

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कोविंद ने कहा कि हमें आजादी एक कठिन संघर्ष के बाद मिली थी. इस संग्राम में, लाखों लोगों ने हिस्सा लिया. उन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया. महात्मा गांधी के नेतृत्व में, ये महान सेनानी, मात्र राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त करके संतुष्ट हो सकते थे.

राष्ट्रपति ने कहा, ‘हम सबका सपना है कि भारत एक विकसित देश बने. उस सपने को पूरा करने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं. हमारे युवा अपनी कल्पना, आकांक्षा और आदर्शों के बल पर देश को आगे ले जाएंगे.

उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के जीवन को खुशहाल बनाना ही हमारे लोकतंत्र की सफलता की कसौटी है. गरीबी के अभिशाप को, कम-से-कम समय में, जड़ से मिटा देना हमारा पुनीत कर्तव्य है. यह कर्तव्य पूरा करके ही हम संतोष का अनुभव कर सकते हैं.

राष्ट्रपति बनने के बाद गणतंत्र दिवस पर पहली बार किया संबोधित 

राष्ट्रपति पद पर आने के बाद गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में कोविंद ने कहा ‘साल 2022 में, हम अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे. ये महत्वपूर्ण अवसर हैं. स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान के निर्माताओं के दिखाए रास्तों पर चलते हुए, हमें एक बेहतर भारत के लिए प्रयास करना है.’

कोविंद ने कहा कि संविधान का निर्माण करने, उसे लागू करने और भारत के गणराज्य की स्थापना करने के साथ ही, हमने वास्तव में ‘सभी नागरिकों के बीच बराबरी’ का आदर्श स्थापित किया, चाहे हम किसी भी धर्म, क्षेत्र या समुदाय के क्यों न हों.

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के राष्ट्र निर्माण के अभियान का एक अहम उद्देश्य एक बेहतर विश्व के निर्माण में योगदान देना भी है. ऐसा विश्व, जो मेलजोल और आपसी सौहार्द से भरा हो और जिसका अपने साथ, और प्रकृति के साथ, शांतिपूर्ण संबंध हो. यही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सही अर्थ है. यही आदर्श हजारों वर्षों से हम सबको प्रेरणा देता आया है.

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राष्ट्रपति ने ऐसे राष्ट्र पर जोर दिया जहां संपन्न परिवार अपनी इच्छा से सुविधा का त्याग कर देता है. यह सब्सिडी वाली एलपीजी हो, या कल कोई और सुविधा. ताकि इसका लाभ किसी जरूरतमंद परिवार को मिल सके. नि:स्वार्थ भावना वाले नागरिकों और समाज से ही, एक नि:स्वार्थ भावना वाले राष्ट्र का निर्माण होता है.

देश के निर्माण में एक-एक नागरिक का अहम योगदान 

उन्होंने कहा कि देश का हर-एक युवा, हर-एक बच्चा देश के लिए नए सपने देख रहा है जिसमे हमारे देश की ऊर्जा, आशाएं, और भविष्य समाए हुए हैं. कोविंद ने कहा कि जहां बेटियों को, बेटों की ही तरह, शिक्षा, स्वास्थ्य और आगे बढ़ने की सुविधाएं दी जाती हैं, ऐसे समान अवसरों वाले परिवार और समाज ही एक खुशहाल राष्ट्र का निर्माण करते हैं.

उन्होंने कहा कि देशवासियों की सेवा करने वाली हर नर्स, साफ सफाई में लगा हर स्वच्छता कर्मचारी, शिक्षित बनाने वाला हर अध्यापक, नई खोज से जुड़ा हर वैज्ञानिक, देश को नया स्वरूप प्रदान करने वाला हर इंजीनियर का राष्ट्र निर्माण में योगदान है.

यही नहीं देश की रक्षा में लगा हर सैनिक, देशवासियों की पेट भरने वाला हर किसान, सुरक्षा में लगा हर पुलिस और अर्ध-सैनिक बल, पालन पोषण करने वाली हर मां, उपचार करने वाला हर डॉक्टर सहित अन्य लोगों का राष्ट्र निर्माण में योगदान है.

राष्ट्रपति ने कहा कि यह उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के महान प्रयासों और बलिदान को, आभार के साथ याद करने का दिन है जिन्होंने अपना खून-पसीना एक करके, हमें आज़ादी दिलाई, और हमारे गणतंत्र का निर्माण किया. यह दिन हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को नमन करने का भी दिन है.

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