S M L

'स्टे लेने की संस्कृति' ही मामलों के निपटारे में देरी की मुख्य वजह है: राष्ट्रपति

उन्होंने कहा, ‘देश की अदालतों में तीन करोड़ तीस लाख मामले लंबित हैं, इनमें से 2.84 करोड़ मामले निचली अदालतों में, 43 लाख मामले हाई कोर्ट में, और करीब 58,000 मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं’

Updated On: Sep 01, 2018 06:19 PM IST

Bhasha

0
'स्टे लेने की संस्कृति' ही मामलों के निपटारे में देरी की मुख्य वजह है: राष्ट्रपति

शनिवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि अदालतों में मामलों के निर्णय में होने वाली देरी की एक वजह ‘नियम के रूप में स्टे चाहने की संस्कृति’ है और न्यायापालिका इस पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने देश की तमाम अदालतों में लंबित मामलों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय कानूनी व्यवस्था में बहुत विलंब होता है. आधारभूत ढांचे में कमी और निचली अदालतों सहित न्यायपालिका में बड़ी संख्या में पदों का खाली होना इसके कारणों में शामिल है.

राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) द्वारा आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में भारत की न्यायपालिका का सम्मान बेसहारा लोगों के लिए कानून के रक्षक के तौर पर होता है. यह भी सच है कि हमारे न्यायाधीशों के समक्ष मामलों का अंबार लगा रहता है. इसके परिणामस्वरूप, भारतीय कानूनी प्रक्रिया की पहचान मामलों के निस्तारण में लगने वाले लम्बे समय के रूप में हो गई है.’

भारत की अदालतों में लंबित हैं तीन करोड़ तीस लाख मामले

उन्होंने कहा, ‘देश की अदालतों में तीन करोड़ तीस लाख मामले लंबित हैं. इनमें से 2.84 करोड़ मामले निचली अदालतों में लंबित हैं. 43 लाख मामले हाई कोर्ट में लंबित हैं और करीब 58,000 मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘स्टे लेने की एक संस्कृति अपवाद की बजाय एक मानक जैसी बन गई है. बार-बार होने वाले स्टे को लेकर धीरे-धीरे नई सोच आ रही है. न्यायपालिका इस रवैए पर रोक लगाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है.’ उन्होंने भरोसा जताया कि समूची कानूनी बिरादरी बेहद अपरिहार्य परिस्थित को छोड़कर इस प्रवृत्ति से बचने का संकल्प लेगी.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने एससीएओआरए का ई-जर्नल जारी किया. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तकनीकी रूप से ज्यादा बेहतर युवा वकीलों को अदालतों में जिरह का मौका मिले. इसी के साथ उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कहा कि उन्हें  युवाओं को इसके लिए मौका देना चाहिए.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi