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राष्ट्रपति ने की पीएम मोदी के हार्ड वर्क की तारीफ, कहा 'क्विक लर्नर'

राष्ट्रपति का पांच साल का कार्यकाल इस साल जुलाई में खत्म होने जा रहा है.

Updated On: Mar 18, 2017 01:13 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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राष्ट्रपति ने की पीएम मोदी के हार्ड वर्क की तारीफ, कहा 'क्विक लर्नर'

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि संसदीय लोकतंत्र में हमें पूरे देश को साथ लेकर चलने की जरुरत है. उनके मुताबिक सत्ता में विराजमान लोगों को इसका ख्याल रखना चाहिए कि विचार..विमर्श और सर्वसम्मति ही शासन का श्रेष्ठ रास्ता होता है.

उन्होंने कहा कि उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह के अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उदार पांडित्य और महान विद्वता से काफी कुछ सीखा है जो बरसों तक उनके सहकर्मी और मित्र रहे हैं.

उन्होंने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीख करते हुए कहा, 'मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्पष्ट रुख, उर्जा और कड़ी मेहनत करने की क्षमता से भी बहुत प्रभावित हुआ हूं. उनके भीतर किसी भी चीज को बहुत जल्दी सीखने और उसे अपनी तरह से करने का हुनर है.'

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की शानदार जीत के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी के भाषण की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, 'विचार..विमर्श और सर्वसम्मति ही शासन का श्रेष्ठ रास्ता होता है.'

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ये सारी बातें इंडिया टुडे द्वारा आयोजित कॉनक्लेव में कहा. उनके मुताबिक संसदीय लोकतंत्र में प्रचंड बहुमत के खुमार से बचना चाहिए. जो सत्ता में है, उन्हें जरूर से समूचे राष्ट्र को शासन प्रक्रिया से जोड़ना चाहिए और साथ लेकर चलना चाहिए.

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वाराणसी में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी

मोदी की सराहना

चुनाव में शानदार जीत के बाद दिए मोदी के बधाई भाषण की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं यह सुनकर बहुत खुश हूं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य विधानसभाओं के हालिया चुनाव में अपनी पार्टी को मिली जीत के बाद विनम्रता की बात कही.'

उन्होंने कहा, 'चुनावी फैसले हालांकि, बहुमत के आधार पर तय किए जाते हैं लेकिन राज्यों का शासन ‘सर्वमत’ के सिद्धांत पर होना चाहिये.  यह भारत की परंपरा भी है और हमारे लोगों का बहुमत इसे कार्यरूप में देखने की आकांक्षा रखता है.'

कार्यक्रम में बांटे गए भाषण में राष्ट्रपति ने संसद में अक्सर पड़ने वाले व्यवधान के मुद्दे को भी उठाते हुए कहा, 'मैं थोड़ी नाराजगी के साथ बोल रहा हूं क्योंकि मेरा पूरा सार्वजनिक जीवन संसद में मेरी भूमिका से परिभाषित हुआ है.'

उन्होंने कहा, 'इसलिए मेरे लिए भारतीय लोकतंत्र के इस मूलभूत स्तंभ को निष्प्रभावी बनते देखना थोड़ा मुश्किल है.'

मुखर्जी ने कहा कि उनके विचार से संसद की कार्यवाही में लगातार बाधा पड़ने, सदस्यों की कम उपस्थिति, संसद एवं राज्य विधानमंडलों में सत्र के दिनों का घटना तथा बजट एवं वित्तीय प्रस्तावों सहित अहम विधेयकों का गैर जिम्मेदाराना तरीके से पारित होने का कोई औचित्य नहीं है.

मुखर्जी ने कहा कि यह सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष दोनों के लिए फायदेमंद रहेगा कि वे, 'बाधा के इस कुचक्र' को तोड़ें.  साथ ही राजनीतिक नेतृत्व से अपील की जाए कि वे इस बात पर सहमत हों कि हर तरह के विरोध और शिकायतों को इस तरीके से उठाया जाए कि संसद एवं विधानमंडलों का कामकाज बाधित नहीं हो.

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उन्होंने संविधान में मौजूद मूल्यों और सिद्धांतों की भी पुरजोर हिमायत की, जिसका सभी को सम्मान करना चाहिए. खासतौर, पर उन लोगों को जो अथॉरिटी हैं और सार्वजनिक जीवन में हैं.

उन्होंने कहा कि कार्यपालिका के कार्य और कानून अवश्य ही संविधान के अनुरूप होने चाहिए. इसके अलावा राजनीतिक दलों की रोजाना की गतिविधियां और इससे जुड़े सभी लोगों को भी संविधान और हमारी न्यायपालिका द्वारा परिभाषित इसके प्रावधानों के अनुरूप काम करना चाहिए.

Narendra Modi

चुनाव प्रचार के दौरान मंच पर पीएम मोदी की स्वागत

एकजुटता जरूरी

राष्ट्रपति ने कहा कि अपने हाथों में कानून लेने की लोगों और समूहों की प्रवृत्ति का सख्ती से प्रतिरोध किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की प्रगति संभव नहीं है यदि वह एकजुट ना हो.

उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष से लिए उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का इतिहास जो मुख्य सबक हमें सिखाता है, उसमें यह भी है कि एकजुट रहने पर हम खड़े रहेंगे लेकिन विभाजित होने पर गिर जाएंगे.

राष्ट्रपति ने कहा, यदि हमारे देश में लोग धर्म...जाति या राजनीति के आधार पर एक दूसरे के खिलाफ हो जाएंगे तो जो तरक्की हम चाहते हैं उसे हासिल करना असंभव होगा.

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अलग राय रखने वाले लोगों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने पर बहस के मद्देनजर राष्ट्रपति ने कहा कि, मुक्त भाषण एवं अभिव्यक्ति की गारंटी न सिर्फ हमारा संविधान देता है बल्कि यह हमारी एक अहम सभ्यता और परंपरा भी रही है.

मुखर्जी ने कहा कि भारतीय लोग तर्कवादी के रूप में जाने जाते हैं लेकिन वे कभी असहिष्णु नहीं रहे हैं. वहीं, इस तरह के कार्यक्रम स्वतंत्र बहस एवं चर्चा के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं जो हमारे समाज में होने चाहिए.

उनका पांच साल का कार्यकाल इस साल जुलाई में खत्म होने जा रहा है. जिसके बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बसे अपने गांव में जाकर रहना चाहते हैं और हर साल दुर्गा पूजा मनाना चाहते हैं.

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