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प्रशांत भूषण ने फिर लगाए सीजेआई पर आरोप, जानिए विवाद की जड़

इस मामले पर कोर्ट में हुई तीखी बहस के बावजूद प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज नहीं हुआ

FP Staff Updated On: Jan 17, 2018 02:30 PM IST

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प्रशांत भूषण ने फिर लगाए सीजेआई पर आरोप, जानिए विवाद की जड़

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने एक बार फिर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा पर निशाना साधा है. उन्होंने मेडिकल घोटाले को लेकर चीफ जस्टिस पर गंभीर आरोप लगाए. प्रशांत भूषण ने मंगलवार को एमसीआई घोटाले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि इस घोटाले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की भूमिका की जांच होनी चाहिए. जजों के कोलेजियम को सीजेआई के खिलाफ मिली शिकायतों पर गौर करना चाहिए. सीजेआई पर जो आरोप लगे हैं वो बेहद गंभीर हैं.

न्यूज़ 18 के मुताबिक, भूषण ने कहा, चीफ जस्टिस ने हाइकोर्ट के जज पर मामला दर्ज करने की इजाज़त नहीं दी. जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी हाईकोर्ट जज के खिलाफ एफआईआर के लिए चीफ जस्टिस की इजाज़त चाहिए.

इसके आगे उन्होंने कहा कि विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि सीबीआई के अफसर 16 दिसंबर 2017 को चीफ जस्टिस से मिले थे. अफसरों के पास कुछ पुख्ता सबूत थे. जिनके चलते जस्टिस शुक्ला के खिलाफ एक कम से कम करोड़ रिश्वत का मामला बनता है.

ऐसा पहली बार नहीं है, जब प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ निशाना साधा हो. इससे पहले भी प्रशांत भूषण और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बीच कोर्ट में तब तीखी बहस हो गई थी, जब दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच जजों की एक बेंच ने दो जजों (जिसमें सीजेआई पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जस्टिस चेलमेश्वर शामिल थे) वाली सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के फैसले को बदल दिया था. यह मामला सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर रिश्वतखोरी से जुड़ा हुआ था.

प्रशांत भूषण

जजों के नाम पर कथित रिश्वतखोरी के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में 10 नवंबर को हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ था. सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने 2 जजों की बेंच के उस ऑर्डर को रद्द कर दिया था, जिसमें मामले की सुनवाई के लिए बड़ी बेंच बनाने को कहा गया था. इस मामले पर कोर्ट में हुई तीखी बहस के बावजूद प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज नहीं हुआ. जबकि कुछ वकीलों का कहना था कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवहेलना का मामला बन सकता है. सीजेआई दीपक मिश्रा और जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा था कि भूषण पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का मामला नहीं बनता. हालांकि अदालतें ऐसे काम नहीं करती हैं.

क्या है मामला?

दरअसल यह मामला उड़ीसा हाई कोर्ट के रिटायर जज आई एम कुद्देशी से जुड़ा हुआ है. कुद्देशी के ऊपर आरोप है उन्होंने अपने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए घूस ली थी. सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. इस मामले में यह भी आरोप है कि कई सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर भी घूस ली गई है. प्रशांत भूषण इस मामले में एनजीओ ‘कैंपेन फॉर जूडिशियल एकाउंटैबिलिटी’ और याचिकाकर्ता कामिनी जायसवाल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

प्रशांत भूषण और एनजीओ ने मांग की थी कि इस मामले की जांच सीबीआई की जगह कोई अन्य एसआईटी बनाकर कराई जाए. भूषण ने कहा था कि सीबीआई पर उन्हें भरोसा नहीं है. इसी याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर की बेंच ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ या पांच जजों की बेंच करे. यह मामला दो जजों के सामने सुनवाई के लिए आने वाला था.

Justice-Deepak-Mishra

इसके बाद सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की गठित बेंच ने जस्टिस चेलमेश्वर की बेंच को रद्द कर दिया था. इस बेंच ने कहा- ‘सीजेआई सुप्रीम कोर्ट के मुखिया हैं. उनके आवंटन के बिना कोई बेंच केस नहीं सुन सकती.’

प्रशांत भूषण ने लगाया था सीजेआई पर भी आरोप

प्रशांत भूषण पांच जजों के बेंच के फैसले से संतुष्ट नहीं थे. मामले पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सहित अन्य जजों और याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बीच गर्मा-गर्म बहस हुई.

भूषण ने अपनी आवाज तेज करते हुए चीफ जस्टिस से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने को कहा, क्योंकि सीबीआई की एफआईआर में कथित तौर पर उनका भी नाम है. सीजेआई ने बदले में भूषण से प्राथमिकी की सामग्री को पढ़ने को कहा और उन्हें अपना आपा खोने के खिलाफ चेतावनी दी. भूषण के साथ याचिकाकर्ताओं में से एक अधिवक्ता कामिनी जायसवाल भी थीं.

जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'मेरे खिलाफ निराधार आरोप लगाने के बावजूद हम आपको रियायत दे रहे हैं और आप उससे इनकार नहीं कर सकते. आप आपा खो सकते हैं लेकिन हम नहीं.' भूषण ने कथित तौर पर न्यायाधीशों से संबंधित भ्रष्टाचार के इस मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन की मांग करते हुए कहा था कि सीजेआई का नाम इसमें है. हालांकि प्रशांत भूषण ने जब एफआईआर पढ़ा तो एफआईआर में सीजेआई का नाम नहीं था.

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