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तूतीकोरिन में पुलिस फायरिंग को डीएमके ने बताया दूसरा 'जलियांवाला बाग'

स्टालिन ने ट्वीट कर कहा, 'प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग का ऑर्डर किसने दिया? भीड़ को तितर-बितर करने के लिए ऑटोमेटिक हथियारों का इस्तेमाल क्यों किया गया.'

Updated On: May 23, 2018 03:08 PM IST

FP Staff

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तूतीकोरिन में पुलिस फायरिंग को डीएमके ने बताया दूसरा 'जलियांवाला बाग'

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट प्लांट के खिलाफ के प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग को लेकर डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने पलानीस्वामी सरकार पर जमकर प्रहार किया. वहीं डीएमके के एक अन्य नेता इस गोलीबारी की तुलना जलियांवाला बाग से की है. डीएमके ने सभी दलों से इस घटना के खिलाफ 25 मई को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.

इस फायरिंग में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई. इसे लेकर स्टालिन ने सवाल किया कि प्रदर्शनकारियों को पहले कोई चेतावनी क्यों नहीं दी गई और भीड़ को तितर बितर करने के लिए ऑटोमेटिक हथियार क्यों इस्तेमाल किए गए.

स्टालिन ने ट्वीट कर कहा, 'प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग का ऑर्डर किसने दिया? भीड़ को तितर-बितर करने के लिए ऑटोमेटिक हथियारों का इस्तेमाल क्यों किया गया. किस कानून के तहत इसकी इजाजत दी गई? यहां रबर या प्लास्टिक के बुलेट्स का इस्तेमाल क्यों किया गया? फायरिंग के पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी क्यों नहीं दी गई?'

डीएमके के एक अन्य नेता शर्वणन ने तमिलनाडु सरकार को फासिस्टवादी करार देते हुए इस घटना की तुलना जलियाबाला बाग जैसे नरसंहार से की है. उन्होंने कहा, 'हाल में हुए एक सर्वे बताता है कि तमिलनाडु में सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन होते हैं. इसकी एक वजह सरकार की नाकामी है. यह जलियावाला बाग जैसा नरसंहार था. सरकार को अब अपना बोरिया बिस्तर बांध कर चले जाना चाहिए.'

दरअसल यहां के स्थानीय लोग स्टरलाइट कारखाने के खिलाफ लंबे समय से विरोध प्रदर्शन और कारखाने को बंद करने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि इस कारखाने के कारण इलाके में भूमिगत जल (अंडरग्राउंड वाटर) भी प्रदूषित हो रहा है. हाल ही में इस कंपनी ने शहर में अपने कारखाने को बढ़ाने की घोषणा की थी, जिससे स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा. वहीं भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने फायरिंग कर दी, जिसमें कम से कम 11 लोग मारे गए.

इस घटना से जुड़ा एक सनसनीखेज वीडियो सामने आया है, जिसमें सादे कपड़े में मौजूद एक पुलिसकर्मी पुलिस बस के ऊपर चढ़कर प्रदर्शनकारियों पर निशाना लगाता दिख रहा है. इस घटना को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक ने बताया कि अब तक 42 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 17 लोगों की सर्जरी की गई है. वहीं दस शवों को मॉर्चरी में रखा गया है.

इस बीच स्टरलाइट यूनिट के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने प्लांट में तांबा गलाने की नई यूनिट के निर्माण पर रोक लगा दी है.

उधर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ईके. पलानीस्वामी ने घटना की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की. गृह मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे पलानीस्वामी ने कहा, 'पुलिस को लोगों के जानमाल की रक्षा के लिए मुश्किल परिस्थितियों में कार्रवाई करनी पड़ी, क्योंकि प्रदर्शनकारी बार-बार हिंसा कर रहे थे... पुलिस को हिंसा रोकनी थी.'

पलानीस्वामी ने कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज के तहत एक सदस्यीय आयोग के गठन की घोषणा की जो घटना की जांच करेगा. उन्होंने इस घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को तीन-तीन लाख और मामूली रूप से घायल लोगों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की.

(साभार: न्यूज़18)

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