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PNB घोटाला: सिर्फ बैंक अधिकारियों के निलंबन से नहीं बनेगी बात, बड़े लोगों तक भी पहुंचे जांच की आंच

क्या सरकार ने आरबीआई और बैंकों को इस लूट के बारे में कुछ दिशा-निर्देश जारी करने में ऐसी कोई सक्रियता दिखाई जिसके जरिए टॉप पर बैठे लोगों को कठघरे में खड़ा किया जा सके?

Updated On: Feb 18, 2018 01:27 PM IST

Yatish Yadav

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PNB घोटाला: सिर्फ बैंक अधिकारियों के निलंबन से नहीं बनेगी बात, बड़े लोगों तक भी पहुंचे जांच की आंच

सरकारी मालिकाना हक वाले पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) प्रबंधन, कथित 11,360 करोड़ रुपए वाले नीरव मोदी घोटाला मामले में अब तक ऐसे 18 अधिकारियों को निलंबित कर चुका है जो सुपरविजन के लेवल पर लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं. बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) सुनील मेहता ने कहा कि बैंक 2011 से कुछ बीमारियों से पीड़ित है, और अब इस कैंसर को खत्‍म करने के लिए सर्जरी की जा रही है.

तो क्‍या 18 कर्मचारियों को नाप देने भर से, मेहता और पीएनबी अपनी जिम्मेदारी से मुक्‍त हो गए? बिल्‍कुल नहीं. जैसा कि व्हिसलब्‍लोअर दिनेश दुबे बताते हैं कि बैंकिंग व्यवस्था में गहरे स्‍तर पर गड़बड़ी चलती है. जूनियर और मिडिल लेवल के वर्कर्स का निलंबन सिर्फ एक दिखावा है. क्या सरकार ने आरबीआई और बैंकों को दिन की रोशनी में हुई इस लूट के बारे में कुछ दिशा-निर्देश जारी करने में ऐसी कोई सक्रियता दिखाई जिसके जरिए टॉप पर बैठे लोगों को इंसाफ के कठघरे में खड़ा किया जा सके?

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्‍होंने नीरव मोदी लोन केस की पड़ताल की. और दूसरे ऐसे आला अधिकारी भी इसके दायरे में आए जिन्‍हें साल 2011 के बाद से बैंक की आंतरिक आडिट रिपोर्ट बनाने का काम दिया गया था.

उक्‍त अधिकारी ने कहा, 'कथित अनियमितताओं और ठगी की शिकायत रोज ही मंत्रालय में आती हैं. मंत्रालय का काम इन्‍हें कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजना है. मुझे यकीन है कि अगर पिछले कुछ वर्षों में मंत्रालय को कोई शिकायत मिली होगी, तो वह संबंधित बैंक और आरबीआई को उचित कार्रवाई करने के लिए भेजी गई होगी.'

बचाव में क्या कह रहा है बैंक

पीएनबी के महाप्रबंधक, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और मार्केटिंग, बीएन मिश्रा ने बैंक के स्कैंडल से निपटने के उपायों का बचाव करते हुए कहा कि बैंक, इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ पहले से ही कार्रवाई कर रहा है और वह यह सुनिश्चित करेगा कि दोषी बख्शे नहीं जाएं. मिश्रा ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि 18 निलंबित पीएनबी अधिकारियों में से कम से कम दो टॉप मैनेजमेंट के हैं.

उन्‍होंने कहा, 'आंतरिक जांच अभी भी चल रही है और इस समय अन्‍य अधिकारियों के निलंबन की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता. हम जिम्मेदारी तय करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे और इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.'

sunil mehta pnb

इलाहाबाद बैंक के पूर्व निदेशक दिनेश दुबे ने कहा कि मेहता एक अच्छे बैंकर हैं, लेकिन उन्हें नीरव मोदी के मामा मेहुल चौकसी के बारे में पता होना चाहिए था, क्योंकि वह उस समय इलाहाबाद बैंक के महाप्रबंधक के रूप में काम कर रहे थे, जब चौकसी के मालिकाना हक वाले गीतांजलि जेम्स के लोन प्रपोजल ने वर्ष 2013 में बोर्ड की बैठकों में हलचल मचा दी थी.

इस कथित घोटालेबाजों ने पहले 2011 में पीएनबी को टारगेट किया था और मेहता ने मई 2017 में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का कामकाज संभाला था. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, मेहता ने कहा कि उनके बैंक को इस घोटाले के बारे में केवल जनवरी 2018 के तीसरे सप्ताह में ही पता चला.

वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने आगे कहा, 'बड़ा सवाल यह है कि जब वह जनवरी 2016 तक इलाहाबाद बैंक में काम कर रहे थे तब वो क्‍या चौकसी की कहानी के बारे में पहले से जानते थे. और क्या मेहता बैंक के शीर्ष प्रमुखों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहे हैं. इस मौके पर, यह सभी अटकलें हैं और पूरे घोटाले का एक अधूरा दृश्‍य लगता है. यह मुद्दा एनडीए या यूपीए के बारे में नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में गहरे पैठे भ्रष्टाचार के बारे में है.'

गीतांजलि जेम्स के प्रस्ताव के खिलाफ वाले नोट से नाराज क्यों थी शुभलक्ष्मी पानसे 

दिनेश दुबे के मुताबिक, उस बैंक के प्रबंध निदेशक गीतांजलि जेम्स के प्रस्ताव के खिलाफ उनके असंतोष वाले नोट से नाखुश थे. दुबे ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, 'तब प्रबंध निदेशक शुभलक्ष्मी पानसे मुझसे परेशान थीं और उन्होंने कोलकाता में आयोजित एक बोर्ड की बैठक में अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी. मैंने वित्त सचिव को हमारी इस मौखिक खींचतान के बारे में लिखा भी था.'

शुभलक्ष्मी पानसे ने अक्टूबर, 2012 से 31 जनवरी, 2014 तक इलाहाबाद बैंक के एमडी के रूप में काम किया. उन्हें स्वतंत्र निदेशक, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के रूप में नियुक्त किया गया. वह भारत में बैंकों के बोर्डों के प्रशासन की समीक्षा करने के लिए 2014 में आरबीआई की बनाई गई एक समिति की सदस्य भी थीं. पैनल ने 12 मई, 2014 को रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

इस रिपोर्ट में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ गैर-प्रदर्शनकारी संपत्ति (एनपीए) की बढ़ती समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा गया, '2013-14 के दौरान, बैंकों में लोन परिसंपत्ति की गुणवत्ता खराब हो रही है. लोन एसेट पोर्टफोलियो की गुणवत्ता पर भी ध्‍यान देना जरूरी है, क्योंकि एनपीए और अन्य फंसी हुई संपत्ति की कम रिपोर्टिंग वित्तीय हालत की इंटीग्रिटी की संवेदनशीलता पर असर डालती है.'

allahabad bank

दुबे ने वित्त सचिव को भेजे अपने पत्र में लिखा, 'शुक्रवार 22 नवंबर, 2013 को, एमसीबीओडी और अन्य 4 समितियों की एक बैठक और बोर्ड बैठक भी ग्रैंड ओबेरॉय होटल कोलकाता में हुई थी. बोर्ड की बैठक में, गीतांजलि ज्वैलर्स के बारे में एक एजेंडा था. यह एजेंडा पिछली बोर्ड बैठकों में पहले से ही 4 बार आ चुका था. हर एक मौके पर, मैंने अपना असंतोष दर्ज कराया. लेकिन फिर भी, उस एजेंडे को मंजूरी के लिए इस बैठक में लिया गया. सीएमडी ने मुझसे कहा कि इसे पारित करने के लिए अपनी सहमति दें, लेकिन मैंने अस्वीकार कर दिया और फिर से अपना असंतोष दर्ज करा दिया.'

सीएमडी ने यह भी कहा कि मैंने उनके खिलाफ वित्त सचिव को शिकायत की. मुझे इस मुद्दे पर साढ़े तीन पन्‍नों का एक नोट जमा करना पड़ा. एक शेयरधारक निदेशक मुझ पर नाराज हो गया और बैंक के अन्‍य नामित निदेशक ने मुझसे कहा, 'घर की बात घर में ही रहने देते. इस पर, मैंने उत्तर दिया कि मेरी नियुक्ति भारत सरकार के वित्त विभाग ने की है और मैं उनके प्रति जवाबदेह हूं, जबकि आपकी नियुक्ति बैंक के बोर्ड ने की है.'

मैंने पूछा कि क्यों इस एजेंडे पर मेरे विचारों को लगातार अनदेखा किया गया है. इस पर, उसी निदेशक मंडल ने मुझसे पूछा कि एजेंडे को मंजूरी देने के संबंध में क्या उपाय हो सकते हैं. इसके लिए, मैंने पूछा कि वो बोर्ड से अनुमोदन के बिना एलसी को कैसे बदल सकते हैं और यह नियमों के खिलाफ है. अगर वो अपने दम पर ऐसा करते हैं, तो बोर्ड की मंजूरी क्या जरूरत थी? उन्होंने कहा, 'जो कुछ हुआ उसे भूल जाओ और कृपया करके यह बताएं कि अब कौन से विकल्प बाकी हैं.'

दुबे ने बाद में दावा किया कि उन्हें सरकार और बैंक के शीर्ष अधिकारियों के द्वारा इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए, तत्कालीन वित्तीय सेवा सचिव राजीव टकरु ने इस बात से इनकार किया कि दुबे पर पद छोड़ने के लिए दबाव डाला गया. टकरू ने उस विभाग में काम किया, जो फरवरी, 2013 से फरवरी, 2014 तक बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बीमा कंपनियों के कामकाज को देखता था.

टकरु ने कहा, 'मैंने उनसे (दिनेश दुबे) से पहली और आखिरी बार तब मुलाकात की जब वो अपना इस्तीफा पत्र देने आए. मुझे याद है कि उन्होंने हिंदी में मेरी मेज पर ही इस्तीफा लिखा था और पद छोड़ने के लिए निजी कारणों का हवाला दिया. उन्होंने बैंक में समस्याओं के बारे में कुछ नहीं कहा और न ही गीतांजलि जेम्‍स से संबंधित बातों का उन्‍होंने कुछ भी जिक्र किया. बाद में उनके इस्तीफे को मैंने वित्त मंत्री को सौंप दिया और कई दिन बाद इसे स्वीकार कर लिया गया '

वित्त मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि अगर दुबे ने इलाहाबाद बैंक में बड़े घोटाले के बारे में शिकायत की होती, तो आरबीआई और बैंक इस पर कुछ कार्रवाई करता.

सूत्रों ने कहा, 'हमें गीतांजलि जेम्‍स खिलाफ शिकायत से संबंधित अभिलेखों को जांच करनी होगी. हालांकि, आरबीआई के पास इस संबंध में एक्‍शन टेकन रिपोर्ट होनी चाहिए.'

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क्‍या जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है?

सीबीआई ने 13 फरवरी, 2018 को पीएनबी प्राधिकरण की दायर शिकायत के आधार पर मेहुल चौकसी के मालिकाना हक वाली गीतांजलि जेम्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. एजेंसी ने कहा कि वह इलाहाबाद बैंक के अधिकारियों के खिलाफ दुबे के आरोपों की जांच करेगा. इसमें यह भी कहा गया है कि दस्तावेजों को इकट्ठा करने के बाद व्हिसल ब्लोअर और पूर्व निदेशक की बताई अवधि से संबंधित रिकॉर्डों की जांच की जाएगी.

जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने गीतांजलि समूह, अन्य निदेशकों की इससे जुड़ी कंपनियों, कारखानों और आवासीय परिसर के स्थानों पर तलाशियां ली हैं.

सीबीआई सूत्रों ने कहा, 'अब तक मुंबई, पुणे, सूरत, जयपुर, हैदराबाद और कोयंबटूर में तलाशियां ली गई हैं. हमने लगभग 20 जगहों को कवर किया है और जांच से संबंधित कुछ जरूरी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है.'

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को समन जारी कर दिया है, भले ही विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उन्हें उनकी जगहों के बारे में जानकारी नहीं है. ईडी ने शुक्रवार को नीरव मोदी से जुड़े 35 स्थानों पर छापे मारे और 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के हीरे और सोने के आभूषण जब्त किए. अभी तक, एजेंसी ने 5,600 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त करने का दावा किया है.

सूत्रों ने कहा, 'हम इसमें देखेंगे कि 2011 के बाद से इस मामले में क्या हुआ है. हम जल्द ही बैंक अधिकारियों से सवाल पूछ सकते हैं. अगले कुछ दिनों में, हम बयान रिकॉर्ड करना शुरू करेंगे.

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