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पीएनबी घोटाला : जांच एजेंसियों के लिए यक्ष प्रश्न- आखिर पैसा गया कहां ?

सीबीआई और ईडी, नीरव मोदी के सहयोगियों और पंजाब नेशनल बैंक से बार-बार हैरान हो कर पूछ रहे हैं कि आखिर कहां है घोटाले के 11,360 करोड़ रुपए?

Updated On: Feb 20, 2018 03:31 PM IST

Yatish Yadav

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पीएनबी घोटाला : जांच एजेंसियों के लिए यक्ष प्रश्न- आखिर पैसा गया कहां ?

पीएनबी घोटाले में जांच एजेंसियों को जो बात सबसे ज्यादा चौंका रही है वो है घोटाले का पैसा. यही वजह है कि सीबीआई और ईडी, नीरव मोदी के सहयोगियों और पंजाब नेशनल बैंक से बार-बार हैरान हो कर पूछ रहे हैं कि आखिर कहां है घोटाले के 11,360 करोड़ रुपए? अब जांच एजेंसियों को लग रहा है कि नीरव मोदी की कंपनियों ने जो कारोबार के कागजात पेश किए हैं वो सब जाली हैं और ये सब फर्जी खरीद-बिक्री और बैंकों की आखों में धूल झोंकने के लिए तैयार किए गए हैं.

सूत्रों का कहना है कि इन घोटालों का अधिकतर नगद बहामा और जर्सी जैसे टैक्स हैवन में पहुंचाया जा चुका है. आयकर विभाग ने नीरव मोदी के विदेशी काम धंधों की कुछ जानकारी साझा की है जिसके अनुसार वो बहामा, मॉरीशस, सिंगापुर और जर्सी जैसी जगहों पर से कई अकाउंट संचालित कर रहे थे. अनुमान है कि इन खातों का इस्तेमाल पीएनबी के घोटाले से मिली रकम को ठिकाने लगाने में किया गया था. जांचकर्ताओं के अनुसार एक बड़ी रकम लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के माध्यम से एंटवर्प, फ्रैंकफर्ट, बहरीन और हांगकांग से इकट्ठा की गई और उन्हीं रुपयों को आखिरी ठिकाने तक पहुंचाने में नीरव की खड़ी की गई फर्जी कंपनियों की तरफ से मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा लिया गया.

सूत्रों के अनुसार वो साइप्रस को भी जांच में सहयोग के लिए एक पत्र लिखने जा रहे हैं. नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने यहां से एक बड़ी राशि उगाही की और इसे मॉरीशस की फर्जी कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर कर दिया. सिंगापुर एक दूसरा ठिकाना था जहां उसने तीन स्तरों पर फर्जी कंपनियां खड़ी करके रकम इकट्ठा की.

मुंबई जेम्स प्राइवेट लिमिटेड, श्रीजी मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड और जैन डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की तीन फर्जी कंपनियां नीरव और उसके मामा मेहुल चौकसी ने खड़ी कीं. इन कंपनियों का इस्तेमाल बोगस खरीद ब्रिक्री और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था. इसके अलावा आयकर विभाग की जांच ने खुलासा किया है कि गुजरात के सूरत में नीरव मोदी के ब्रांड ने अपनी एसईजेड यूनिट्स के माध्यम से पिछले छ सालों में सैंकड़ों करोड़ रुपए टैक्स की छूट प्राप्त की है.

nirav modi-mehul chauksi

आयकर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार उन्हें जो इस मामले में सुबूत और तथ्य मिले हैं वो बड़े गोरखधंधे की तरफ साफ इशारा करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार ये पाया गया है कि विदेशों से इम्पोर्ट किए गए उच्च क्वालिटी के डायमंड्स एसईजेड से घरेलू बाजार में पहुंचा कर नगद बेच दिए गए जबकि कम गुणवत्ता वाले डायमंड्स को को ऊंची कीमतों पर निर्यात कर दिया गया. स्टाक में गोरखधंधे की कीमत आयकर जांचकर्ताओं ने वर्ष 2016-17 में 1217 करोड़ लगाई है. इसमें आयातित डायमंड्स की बेहिसाब घरेलू बिक्री भी शामिल है.

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भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं का है दावा कि उन्होंने नियमों का पूर्ण रूप से पालन किया. भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओँ को नहीं मालूम था कि पीएनबी का आंतरिक सुरक्षा का सिस्टम ध्वस्त हो गया है. यूको बैंक के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर चरण सिंह ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि उनके बैंक की इस घोटाले में 2,656 करोड़ की राशि फंसी थी और उन्होंने नियमों के अनुसार हांगकांग के अधिकारियों को इस घोटाले और लेटर ऑफ क्रेडिट के बारे में पूरी जानकारी दी.

सिंह का कहना है कि उन्होंने रुपए पीएनबी के नोस्त्रो खाते में जमा करवाए वो भी तब जब उन्हें स्विफ्ट चैनल के माध्यम से इसकी गारंटी मिली. बैंकिंग सेक्टर में इसका अर्थ होता है कि पीएनबी उन्हें ये पैसा वापस करेगा. सिंह ने कहा कि उन्होंने हांगकांग में अधिकारियों के साथ-साथ बीएसई को भी इस संबंध में जानकारी दी है. सिंह को उम्मीद है कि पीएनबी अपनी दी हुई गारंटी का सम्मान करते हुए उनके बैंक की पूरी रकम वापस करेगा.

यूको बैंक ने मुंबई की पीएनबी ब्रांच से स्विफ्ट मैसेज मिलने के बाद 146 लेटर ऑफ क्रेडिट चौकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स, जिली इंडिया और नक्षत्र को जारी किए थे. पीएनबी के इस आरोप पर भी भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने इस तरह के ट्रांजेक्शन्स पर किसी तरह की आपत्ति क्यों नहीं उठाई? सिंह कहते हैं कि विदेशी शाखाओं को किसी नीरव मोदी और चौकसी से कोई मतलब नहीं था बल्कि वो पीएनबी के साथ डील कर रहे थे ऐसे में पीएनबी के इस आरोप का कोई मतलब नहीं बनता. सिंह ने कहा कि बैंकिंग सिस्टम में ये माना जाता है कि कोई भी बैंक सारी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद ही गारंटी जारी करता है. ऐसे में ये वाजिब नहीं है कि विदेशी शाखाओं को इसके लिए दोष दिया जाए.

Nirav Modi-PNB fraud case

वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पीएनबी घोटाले में फंसी भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने संबंधित देश की रेगुलेटिरी बॉडी को इससे संबंधित सभी रिपोर्ट सौंप दिए हैं. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पीएनबी से इस तरह के घोटाले की उम्मीद नहीं थी. इस बैंक के 11,360 करोड़ के इस घोटाले में 1900 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं और इसने इस मामले को हांगकांग के अधिकारियों के साथ साथ भारतीय एक्सचेंज्स को भी इसकी जानकारी दे दी है.

ऑल इंडिया यूनियन बैंक स्टाफ फेडरेशन कमेटी के एस.डी मिश्रा ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी राशि बिना टॉप मैनेजमेंट की जानकारी के जारी हो ही नहीं सकती. मिश्रा पीएनबी की ऑडिट टीम पर भी सवाल उठाते हुए कहते हैं कि इस गोरखधंधे को बैंक की दस्तावेजों में खोजना इतना मुश्किल भी नहीं था. मिश्रा ने कहा कि हालांकि इस घोटाले से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन इस मामले में नजीर पेश करते हुए बैंक के बड़े अधिकारियों की जांच करके दोषी पाए जाने पर उन्हें सजा देना चाहिए क्योंकि पूरे भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है.

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