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पीएनबी स्कैम: हमारे बैंकों में निगरानी की व्यवस्था नहीं है- पूर्व RBI गवर्नर

एक ही कस्टमर के साथ दो अलग देशों में डीलिंग हो रही है. जब इस तरह के मामले सामने आएं तो बैंकर को अत्यधिक सचेत होना चाहिए

Updated On: Feb 16, 2018 03:59 PM IST

Dinesh Unnikrishnan

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पीएनबी स्कैम: हमारे बैंकों में निगरानी की व्यवस्था नहीं है- पूर्व RBI गवर्नर

पंजाब नेशनल बैंक इन दिनों 11 हजार करोड़ से ज्यादा के फ्रॉड के मामले से जूझ रहा है. इस धोखाधड़ी के केंद्र में हैं अरबपति नीरव मोदी जिनपर आरोप है कि उन्होंने पीएनबी के बैंक अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ करके अनधिकृत तरीके से एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) जारी करवा के कुछ भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से कर्ज ले लिया. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है. लेकिन इस जांच के मुख्य आरोपी नीरव मोदी पीएनबी द्वारा मामला सामने लाने से पहले ही देश छोड़कर जा चुके थे. इस बड़े घोटाले ने सरकार और आरबीआई समेत बैंकिग सेक्टर्स को जबरदस्त झटका दिया है. यहां तक कि इसको लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक दूसरे पर कीचड़ उछालने की राजनीति भी शुरु हो गई है.

इस मामले को लेकर फ़र्स्ट पोस्ट ने आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर और पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डॉयरेक्टर के सी चक्रवर्ती से बात की. श्री चक्रवर्ती ने कहा कि नीरव मोदी मामले को अकेले नहीं देखा जाना चाहिए. ऐसा इसलिए हुआ कि लंबे समय से बैंकों की कार्यप्रणाली पुराने ढ़र्रे पर चल रही है और उनका रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम और ऑडिटिंग अप्रभावी तरीके से काम कर रही है. श्री चक्रवर्ती का कहना था कि प्रभावी ऑडिटिंग और निरंतर पर्यवेक्षण से ऐसे फ्रॉड के केसों से बचा जा सकता है.

k c Chakrabarty

बातचीत के संपादित अंश

इस घोटाले को आप कैसे देखते हैं ?

देखिए मैं पीएनबी के इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता क्योंकि इस मामले की पूरी जानकारी मेरे पास नहीं है. लेकिन सामान्य रुप से कहें तो बैंकिंग सिस्टम में इस तरह के ट्रांजेक्शन्स पर तब तक आपत्ति नहीं जताई जाती जब तक कि कोई इसके बारे में रिपोर्ट नहीं करता. जहां तक लेटर ऑफ क्रेडिट का सवाल है तो ये दो अलग देशों के दो ग्राहकों के बीच का मामला है. लेकिन यहां पर एक ही कस्टमर के साथ दो अलग देशों में डीलिंग हो रही है. जब इस तरह के मामले सामने आएं तो बैंकर को अत्यधिक सचेत होना चाहिए. वैसे ये तभी होता है जब बैंक के पास फंड नहीं हो लेकिन फिर भी बैंकर को तो सचेत होना ही चाहिए.

आप इसे क्या कहेंगे धोखाधड़ी या अक्षमता ?

निश्चित रुप से फ्रॉड,क्योंकि इसमें बैंक के ब्रांच मैनेजर को ऐसा करने की अधिकार ही नहीं है. पीएनबी प्रबंधन भी ऐसा ही कह रहा है.

लेकिन ऐसा कैसे संभव है कि निगरानी के बाद भी सालों से ये गोरखधंधा चलता आ रहा है?

मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा क्योंकि मुझे इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है लेकिन आश्चर्य की बात है कि बिना बैंक के दस्तावेजों में दर्ज हुए बिना रुपया निकला कैसे ? पूरा मामला संदेहास्पद है. भारतीय बैंकों की समस्या है कि उनके पास जोखिम प्रबंधन की क्षमता या व्यवस्था ही नहीं है. अगर बैंकों के पास रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम कारगर तरीके से काम कर रहा होता तो ऐसे धांधली के मामलों से बचा जा सकता है. लेकिन होता ये है कि बैंक नियम का पालन न करने वाले अधिकारियों को मुनाफा होने की स्थिति में पुरस्कृत करते हैं और नुकसान होने पर धांधली और धोखा चिल्लाते हैं. होना ये चाहिए कि अगर आप निश्चित किए गए तरीकों से अलग काम करते हैं तो आपको तुरंत सजा मिलनी चाहिए.

क्या ये सिस्टम की समस्या है?

हमारे पास जोखिम आधारित निगरानी व्यवस्था नहीं है. अगर कर्ज मूल्यांकन और स्वीकृति को क्रेडिट ऑपरेशन में अलग अलग रखा जाए तो पीएनबी फ्रॉड जैसी घटनाएं नहीं घटेंगी. सबसे अच्छी व्यवस्था है कि क्रेडिट ऑपरेशन को रिस्क ऑपरेशन और क्रेडिट मूल्यांकन से अलग रखा जाए, इसे ही केंद्रीयकृत कर्ज स्वीकृति व्यवस्था कहते हैं. लेकिन बैंकों को इस व्यवस्था पर विश्वास ही नहीं है.

क्या अभी जिस तरह से बैंकों ऑडिटिंग होती है उसमें किसी तरह की समस्या है?

एक बैंक में प्रति वर्ष हजारों की संख्या में ट्रांजेक्शन होता है. ऐसे में कई बार बहुत सारे मामले ऐसे होते हैं जिसमें बैंक मैनेजर जो चाहे वो अपने ऑडिट में लिख देता है ऐसी ऑडिटिंग बोगस होती है. ब्रांच मैनेजर ने जो लिख दिया ऑडिटर्स उसे ही मानते हैं ऐसी व्यवस्था बदलनी चाहिए. ऑडिट हमेशा जोखिम आधारित होना चाहिए. लेकिन जोखिम प्रबंधन अभी भी बैंकों में शुरुआती दौर में ही है.

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे क्या किया जा सकता है?

हमें चाहिए उचित गवर्नेंस, समुचित जोखिम प्रबंधन, जोखिम आधारित निगरानी, जोखिम आधारित ऑडिट. जोखिम प्रबंधन महत्वपूर्ण कड़ी है. इसके अलावा प्रबंधन, नियामक और नीति निर्माताओं को उत्तरदाई बनाया होगा. इसके अभाव में फ्रॉड जैसी घटनाएं किसी भी बैंक के साथ घट सकती है और ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीएनबी इसका शिकार बन गया है.

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