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सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जाए: एसोचैम

एसोचैम का कहना है कि प्राइवेट बैंकों की तरह सरकारी बैंकों में भी सरकार की हिस्सेदारी कम हो ताकि ग्राहकों और शेयरधारकों के हितों को सुरक्षित रखा जा सके

Updated On: Feb 18, 2018 06:05 PM IST

Bhasha

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सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जाए: एसोचैम

सरकारी बैंक पीएनबी में 11,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का ताजा मामला सामने आने के बाद देश के एक प्रमुख उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि सरकार को बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से कम कर लेनी चाहिए.

एसोचैम का कहना है कि प्राइवेट बैंकों की तरह सरकारी बैंकों में भी सरकार की हिस्सेदारी कम हो ताकि ग्राहकों और शेयरधारकों के हितों को सुरक्षित रखा जा सके.

एसोचैम ने कहा कि सरकारी बैंक एक के बाद दूसरे संकट में फंसते जा रहे हैं. ऐसे में सरकार के पास टैक्सपेयर्स के पैसों से इन बैंकों को उबारने की एक सीमा है. सरकार खुद इन बैंकों की सबसे बड़ी शेयरधारक है.

क्या है मुश्किल?

एसोचैम ने कहा है कि इन बैंकों में शीर्ष पदों पर सरकारी नौकरी के बाद सेवा विस्तार के तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों को बिठाया जाता है. ऐसे में वरिष्ठ प्रबंधन का काफी समय सरकारी शीर्ष पदों पर बैठे नौकरशाहों के निर्देशों पर अमल करने में ही बीत जाता है फिर चाहे ये मुद्दे सामान्य ही क्यों न हों.

एसोचैम ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक प्रबंधन का ध्यान उसके मूल बैंकिंग कार्यों की तरफ नहीं जा पाता है. ‘समस्या तब और बढ़ गई है जब इन बैंकों में आधुनिक आईटी का इस्तेमाल बढ़ा है. यह आईटी सिस्टम बैंकों के लिए वरदान या फिर विनाश दोनों ही हो सकती है. यह इस बात पर निर्भर करती है कि बैंक इस प्रौद्योगिकी का कितने सक्षम तरीके से इस्तेमाल करते हैं.’

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