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PNB स्कैम: व्हिसल ब्लोअर से मिली जानकारियों पर एजेंसियों से कार्रवाई चाहता है पीएमओ

पीएमओ चाहता है कि पीएनबी घोटाले की जांच में व्हिसल ब्लोअर द्वारा उपलब्ध कराए गए नए सबूतों की एजेंसियां जांच करें

Updated On: Apr 27, 2018 08:25 AM IST

Yatish Yadav

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PNB स्कैम: व्हिसल ब्लोअर से मिली जानकारियों पर एजेंसियों से कार्रवाई चाहता है पीएमओ

पंजाब नेशनल बैंक को 13,000 करोड़ से ज्यादा का चूना लगाने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके अंकल मेहुल चौकसी पर शिकंजा कसने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालाय (पीएमओ) ने जांच ऐजेंसियों को कार्रवाई तेज करने को कहा है. पीएमओ नीरव और मेहुल के अलावा इस घोटाले मे शामिल पंजाब नेशनल बैंक के उन अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की पक्षधर है जिन्होंने फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग और फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट जारी करके सरकारी बैंक में घोटाले की साजिश में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की.

पता चला है कि अभी हाल ही में पीएमओ ने एक सीडी फाइनेंस मिनिस्ट्री और जांच ऐजेंसियों को भेजी है. इस सीडी में इस मामले के व्हिसल ब्लोअर द्वारा दी गई कई महत्वपूर्ण और नई जानिकारियां हैं जिसमें बताया गया है कि किस तरह से कथित रूप से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेंकिंग (एलओयू) बिना बैंक के खातों में दर्ज किए बगैर जारी किए गए और उसके माध्यम से बैंक की विदेशी शाखाओँ से नीरव और उसके सहयोगियों ने आसानी से पैसा निकाल लिया.

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने जानकारी दी है कि व्हिसल ब्लोअर ने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों को जारी किए अनिधिकृत एलओयू के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

व्हिसल ब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में दिए कार्रवाई के निर्देश

सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीडी में व्हिसल ब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में उचित कार्रवाई करने के लिए ऐजेंसियों को कहा है. इस के अंतर्गत फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LOU) और फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट (FLC) दोनों के जारी किए जाने के संबंध में कार्रवाई करने को कहा गया है.

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पीएनबी ने इस साल जनवरी में आरोप लगाया था कि उसे मिड कॉर्पोरेट हाउस की मुंबई शाखा ने फर्जी तरीके से नीरव मोदी की कंपनियों को एलओयू और एफएलसी जारी कर दिया था. नीरव की कंपनियों डायमंड आर,सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड्स के लिए पीएनबी के मुंबई ब्रांच में तैनात डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी और अन्य बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी एलओयू और एफएलसी जारी कर दिए गए थे.

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पीएनबी का कहना था कि इनको जारी करने से पहले जरूरी अनुरोध आवेदन, दस्तावेज और निर्धारित प्रशासकों से इसकी अनुमति नहीं ली गई थी. इतना ही नहीं बैंक के खातों में भी इस क्रेडिट के बारे में कहीं भी दर्ज नहीं किया गया था, जिससे कि उनकी ये गड़बड़ी किसी की नजर में नहीं आ सकी. बैंक के अधिकारियों ने स्विफ्ट निर्देशों को भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं में भेज दिया था जिससे कि उन कंपनियों को वहां से आसानी से कर्ज प्राप्त हो सके.

25 जनवरी को जारी किए गए एलओयू पर तीन बार निकाले गए पैसे

स्विफ्ट के मैसेजों की जांच पड़ताल में ये सामने आया कि गोकुलनाथ शेट्टी ने 9 फरवरी 2017 को डायमंड आर यूएस के पक्ष में 44,157,91 डॉलर और सोलर एक्सपोर्ट के पक्ष में 43,353,91 डॉलर के दो एलओयू जारी किए थे. इन दोनों एलओयू पर भुगतान करने की तारीख 25 जनवरी 2018 अंकित थी. ये एलओयू इलाहाबाद बैंक, हॉन्गकॉन्ग के पक्ष में जारी किए गए थे.

उसी तरह से अगले दिन यानि 10 फरवरी 2017 को भी इलाहाबाद बैंक, हॉन्गकॉन्ग के पक्ष में तीन और एलओयू जारी किए गए. और उनकी राशि थी डायमंड आर यूएस के लिए 59,420,17 डॉलर, सोलर एक्पोर्ट्स के लिए 58,431,61 डॉलर और स्टेलर डायमंड के लिए 60,933,21 डॉलर. इन पर भी भुगतान की निर्धारित तारीख 25 जनवरी 2018 अंकित थी.

इसके चार दिन बाद 14 फरवरी को गोकुलनाथ शेट्टी ने तीन और एलओयू जारी किए. इस बार एलओयू एक्सिस बैंक हॉन्गकॉन्ग के फेवर में जारी किया गया था और अलग अलग तीन राशियां 58,568,85 डॉलर, 58,622,51 डॉलर, और 58,770,64 डॉलर इसके माध्यम से जारी की गई थी. इस पर भी भुगतान की तय तारीख 25 जनवरी 2018 अंकित की गई थी.

बैंक कर्मियों ने स्विफ्ट मैसेज के जरिए भी की गड़बड़ियां

इस बात का भी खुलासा हुआ है कि फायरस्टार ग्रुप की कंपनियों को बैंक के द्वारा कंसोर्टियम के अंतर्गत क्रेडिट लिमिट कि मंजूरी दी गई थी. ये कंपनियां थी फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और फायरस्टार डायमंड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड. फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड के लिए जहां तक क्रेडिट लिमिट की मंजूरी का सवाल है, उसमें पीएनबी मुख्य बैंक के रूप में मौजूद था जबकि फायरस्टार डायमंड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खाते में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया लीड बैंक के तौर पर मौजूद था.

PNB BANK

2013 से 2017 के बीच में ये कंपनियां नीरव मोदी की अन्य कंपनियों के साथ लेनदेन कर रही थी और क्रेडिट लिमिट की मंजूरी उस काम के लिए नहीं हो रही थी जिसके लिए उन्हें मंजूरी दी गई थी. स्विफ्ट सिस्टम में भी मेहुल चौकसी को फायदा पहुंचाने के लिए छेड़छाड़ की गई.

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पीएनबी की इस शाखा के बैंककर्मियों ने मेहुल चौकसी की गीतांजली ग्रुप ऑफ कंपनीज के पक्ष में फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया था. एफएलसी जारी करते वक्त बैंक के कोर बैंकिग सिस्टम में ट्रेड फायनेंस माड्यूल के अंतर्गत अपेक्षाकृत छोटी राशि डाली गई और उसके बाद एक रेफरेंस नंबर जेनरेट करके उस राशि का स्विफ्ट मैसेज भेज दिया गया. इसके बाद बैंककर्मियों ने सांठगांठ करके कोर बैंकिंग सिस्टम के ट्रेड फायनेंस मोड्यूल में बदलाव किए बिना स्विफ्ट मैसेज में बदलाव करके बड़ी रकम निकाल ली.

भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने नहीं दिखाई सतर्कता

ये सभी लेनदेन मॉरीशस, एंटवर्प, बहरीन, फ्रैंकफर्ट और हॉन्गकॉन्ग में किए गए. पंजाब नेशनल बैंक ने ये भी खुलासा किया कि कीमती और अर्द्ध कीमती पत्थरों के लिए क्रेडिट की सीमा केवल 90 दिनों तक निर्धारित की गई है लेकिन गीतांजलि ग्रुप के मामले में जारी किए गए एलओयू में कर्ज की सीमा 90 दिनों से कहीं ज्यादा दर्ज की गई थी.

पंजाब नेशनल बैंक का तर्क है कि इस तरह की गड़बड़ी पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को अलर्ट हो जाना चाहिए था और उन्हें इस संबंध में चेतावनी जारी करनी चाहिए थी. लेकिन इन सबके बावजूद भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं की दिमाग में किसी तरह का संदेह तक उत्पन्न नहीं हो सका और उन्होंने चेतावनी जारी करने की बात तो दूर इस संबंध में किसी तरह की पूछताछ तक नहीं की. उन बैंकों ने फर्जी एलओयू के सहारे नीरव और मेहुल की कंपनियों को फंड देना जारी रखा.

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सूत्रों के अनुसार पीएमओ ने लगभग एक दर्जन और शिकायतें भी ऐजेंसियों को भेजी हैं. ये शिकायतें अन्य बैंकों से संबंधित हैं और उन्हें मामले की जांच के लिए कहा गया है. मामले की जांच के बाद इन पर कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी. सूत्र का कहना है कि पीएनबी घोटाले के बाद बैंकों की शिकायतों में लगातार वृद्धि हो रही है और प्रतिदिन इनसे संबंधित 3 से 4 शिकायतें व्हिसल ब्लोअर्स और पीड़ितों की तरफ से दाखिल की जा रही हैं.

पीएनबी महाघोटाले से पहले भी मिली थी बैंकों से जुड़ी 560 शिकायतें

इस साल के शुरुआती तीन महीने यानि जनवरी से मार्च तक बैंकिग से जुड़ी हुई बारह सौ से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं. इन शिकायतों में करीब एक दर्जन शिकायतें छिछली और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत हो रही हैं जबकि बाकी शिकायतों को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है.

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पंजाब नेशनल बैंक के एमडी और सीईओ सुनील मेहता

पीएनबी महाघोटाले के पहले भी बैंकों से संबंधित लगभग 560 शिकायतें मिली थीं जिसमें से 473 मामलों को कार्रवाई के लिए आगे भेज दिया गया था. यहां तक कि भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी रखने वाली देश की सर्वोच्च संस्था केंद्रीय सतर्कता आयोग ने भी इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी है.

पीएनबी घोटाले के बाद से विभिन्न सरकारी बैंकों के, जिनमें इंडियन ओवरसीज बैंक, केनरा बैंक, सिंडिकेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, विजया बैंक, कॉर्पोरेशन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं. 112 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और उन पर भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश भी की गई है.

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