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पहले अपने ढाई सालों का हिसाब दें प्रधानमंत्री: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने पीएम मोदी की गाजीपुर रैली का जवाब प्रेस कांफ्रेंस कर दिया है.

Updated On: Nov 18, 2016 02:27 PM IST

Arun Tiwari Arun Tiwari
सीनियर वेब प्रॉड्यूसर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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पहले अपने ढाई सालों का हिसाब दें प्रधानमंत्री: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने पीएम मोदी की गाजीपुर रैली का जवाब प्रेस कांफ्रेंस कर दिया है. मायावती ने कहा कि पीएम बातें और उनका फैसला हवा-हवाई है.

मायावती ने कहा कि पीएम कह रहे हैं कि अमीर को नींद की गोली खानी पड़ रही  है लेकिन देश में उल्टा हो रहा है. सच्चाई में ‘गरीब नींद की गोली खाकर सो रहा है और अमीर चैन की नींद सो रहे हैं. अमीर लोगों की व्यवस्था भी कर दी गई थी.’

 ढाई सालों में क्या किया?

उन्होंने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि ढाई सालों में क्या विकास हुआ? पीएम बेईमान लोगों से हिसाब जरूर मांगे. हम उनके साथ हैं. लेकिन अपने कामों का हिसाब भी तो दें.

उन्होंने कहा कि पीएम ने अपने भाषण में यूपी के विकास के बारे में कुछ नहीं बोला. यूपी की जनता ने विकास के लिए वोट दिया था. लोक सभा चुनाव में किस्स-किस्म के वादे किए गए थे. इसी में ये भी वादा किया गया था कि सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर बाहर का काला धन लाया जाएगा. लोगों ने बहकावे में आकर वोट दिया. 24 घंटे बिजली और रोजगार का भी वादा किया गया था. ढाई वर्षों में कुछ भी नहीं किया.

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छिछोरे बयान न दे भाजपा

मायावती ने कहा कि अपनी विफलता छिपाने के लिए बीजेपी के नेता विपक्षी नेताओं पर निजी आरोप न लगाएं. बीएसपी के कार्यकर्ता अपने नेता को काली कमाई की माला नहीं पहनाते. वे अपने बचाए हुए सफेद धन से ऐसा करते हैं. बीजपी के नेताओं को काम करना चाहिए न कि ऐसे छिछोरे बयान नहीं देने चाहिए.

पूरे देश में इनके नेताओं को नोटों की माला पहनाई जाए तो इनको अच्छा लगता है. लेकिन एक दलित की बेटी को लोग नोटों की माला पहनाएं तो इनको बुरा लगता है. इससे पता चलता है कि दलितों के प्रति इनकी क्या मानसिकता है! इनकी मानसिकता अभी भी दलितों के बारे में बदली नहीं है.

गौरतलब है कि पीएम ने गाजीपुर की रैली में कहा था कि यूपी तो कई नेता ऐसे हैं जिनकी मुंडी नोटों की माला की वजह से नजर नहीं आती.

दस महीने क्यों बर्बाद हो गई?

मायावती ने नोट बैन पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अगर 10 महीने से तैयारी चल रही थी तो इतनी अव्यवस्था क्यों है? बैंकों में अभी तक पैसा नहीं आया है. ये डिसिजन जनता का ध्यान डायवर्ट करने के लिए लिया गया है.

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