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खालिस्तान विवाद के बीच जस्टिन ट्रूडो से मिले पीएम मोदी

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से पीएम मोदी की इस मुलाकात में खालिस्तान के मुद्दे पर भी बातचीत हो सकती है

Updated On: Feb 23, 2018 01:17 PM IST

FP Staff

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खालिस्तान विवाद के बीच जस्टिन ट्रूडो से मिले पीएम मोदी

कनाडा के प्रधानमंत्री सात दिवसीय दौरे पर भारत आए हुए हैं. आज पीएम नरेंद्र मोदी ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात की. उन्होंने परिवार समेत राष्ट्रपति भवन पहुंचे ट्रूडो का स्वागत किया. इस दौरान राष्ट्रपति भवन में ट्रूडो को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. इसके बाद पीएम मोदी की जस्टिन ट्रूडो से हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई. दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत भी होगी.

ट्रूडो के दौरे में पीएम मोदी के मौजूद न रहने की चर्चा कई दिनों से हो रही थी. दूसरी तरफ, मंगलवार को मुंबई में कनाडा हाई कमीशन द्वारा आयोजित एक पार्टी में खालिस्तान आतंकी जसपाल अटवाल के शामिल होने पर भी विवाद चल रहा है.

राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद जस्टिन ट्रूडो सपरिवार राजघाट पहुंचे. यहां पर उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धाजंलि अर्पित की.

इससे पहले, पीएम मोदी ने गुरुवार रात ट्वीट करके कहा कि मैं प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से शुक्रवार को मुलाकात करने और सभी क्षेत्रों में भारत-कनाडा संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए उत्सुक है.

पीएम मोदी ने अन्य ट्वीट में कहा कि आशा करता हूं पीएम ट्रूडो और उनके परिवार की अब तक की यात्रा बहुत ही आनंददायक रही होगी. उन्होंने ट्वीट में कहा कि मैं विशेषकर उनके बच्चों से मिलने के लिए उत्सुक हूं. पीएम मोदी ने अपने 2015 की कनाडा यात्रा की तस्वीर लगाई है जिसमें ट्रूडो के साथ उनकी बच्ची और पीएम मोदी है.

इस ट्वीट के जवाब में जस्टिन ट्रूडो ने लिखा कि उसे अभी भी वो मुलाकात यादा है. अभी तक की भारत यात्रा शानदार रही है. हमलोग आज आपसे मुलाकात करेंगे.

जस्टिन ट्रूडो के इस दौरे में कुछ ऐसी घटनाएं भी हुई हैं जो चर्चा का विषय बनी हुई है. कनाडा के पत्रकारों ने जस्टिन ट्रूडो के आगमन पर पीएम मोदी का स्वागत के लिए नहीं जाने को लेकर भी सवाल उठाया था. इसके अलावा जब वो ताजमहल देखने गए थे तब उनके साथ सिर्फ आगरा के डीएम ही मौजूद थे. अहमादाबाद यात्रा के साथ भी ऐसा ही हुआ.

जानकार बताते हैं कि जस्टिन ट्रूडो के कैबिनेट में जो सिख मंत्री शामिल हैं वो खालिस्तान समर्थक हैं. उन लोगों ने कई बार खालिस्तान के समर्थन में बयान भी दिया है. इसी बात से भारत को नाराजगी है. उम्मीद की जा रही है कि इस मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर भारत अपना पक्ष रखेगा.

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