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कबीर की धरती से क्या बोले PM मोदी, जानें 10 मुख्य बातें

पीएम ने कहा, आज मेरी बरसों की कामना पूरी हुई है. संत कबीर दास जी की समाधि पर फूल चढ़ाने का, उनकी मजार पर चादर चढ़ाने का, सौभाग्य प्राप्त हुआ

Updated On: Jun 28, 2018 01:23 PM IST

FP Staff

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कबीर की धरती से क्या बोले PM मोदी, जानें 10 मुख्य बातें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को उत्तर प्रदेश में महान संत कबीर की नगरी मगहर पहुंचे. उनके साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे. यहां पीएम ने संत कबीर की मजार पर चादर चढ़ाया और संत कबीर एकैडमी का शिलान्यास किया. इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को भी संबोधित किया जिसकी मुख्य बातें ये हैं-

1-आज मेरी बरसों की कामना पूरी हुई है..संत कबीर दास जी की समाधि पर फूल चढ़ाने का, उनकी मजार पर चादर चढ़ाने का, सौभाग्य प्राप्त हुआ. मैं उस गुफा में भी गया, जहां कबीर दास जी साधना करते थे.

2-आज ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा है..आज ही से भगवान भोलेनाथ की यात्रा शुरू हो रही है. मैं तीर्थयात्रियों को सुखद यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी देता हूं. कबीर दास जी की 500वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज से ही यहां कबीर महोत्सव की शुरुआत हुई है.

3-यहां संत कबीर अकादमी का शिलान्यास किया गया है. यहां महात्मा कबीर से जुड़ी स्मृतियों को संजोने वाली संस्थाओं का निर्माण किया जाएगा. कबीर गायन प्रशिक्षण भवन, कबीर नृत्य प्रशिक्षण भवन, रीसर्च सेंटर, लाइब्रेरी, ऑडिटोरियम, हॉस्टल, आर्ट गैलरी विकसित किया जाएगा.

pm modi maghar

4-कबीर की साधना ‘मानने’ से नहीं, ‘जानने’ से आरंभ होती है.. वो सिर से पैर तक मस्तमौला, स्वभाव के फक्कड़, आदत में अक्खड़, भक्त के सामने सेवक, बादशाह के सामने प्रचंड दिलेर, दिल के साफ, दिमाग के दुरुस्त, भीतर से कोमल, बाहर से कठोर थे. वो जन्म के धन्य से नहीं, कर्म से वंदनीय हो गए.

5-वो धूल से उठे थे लेकिन माथे का चंदन बन गए. वो व्यक्ति से अभिव्यक्ति और इससे आगे बढ़कर शब्द से शब्दब्रह्म हो गए. वो विचार बनकर आए और व्यवहार बनकर अमर हुए. संत कबीर दास जी ने समाज को सिर्फ दृष्टि देने का काम ही नहीं किया बल्कि समाज को जागृत किया.

6-कबीर ने जाति-पाति के भेद तोड़े, “सब मानुस की एक जाति” घोषित किया और अपने भीतर के अहंकार को ख़त्म कर उसमें विराजे ईश्वर का दर्शन करने का रास्ता दिखाया. वे सबके थे, इसीलिए सब उनके हो गए.

7-ये हमारे देश की महान धरती का तप है, उसकी पुण्यता है कि समय के साथ, समाज में आने वाली आंतरिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए समय-समय पर ऋषियों, मुनियों, संतों का मार्गदर्शन मिला. सैकड़ों वर्षों की गुलामी के कालखंड में अगर देश की आत्मा बची रही, तो वो ऐसे संतों की वजह से ही हुआ.

फोटो पीटीआई से

फोटो पीटीआई से

8-कुछ दलों को शांति और विकास नहीं, कलह और अशांति चाहिए. उनको लगता है जितना असंतोष और अशांति का वातावरण बनाएंगे, उतना राजनीतिक लाभ होगा. सच्चाई ये है ऐसे लोग जमीन से कट चुके हैं. इन्हें अंदाजा नहीं कि संत कबीर, महात्मा गांधी, बाबा साहेब को मानने वाले हमारे देश का स्वभाव क्या है.

9-8-समाजवाद और बहुजन की बात करने वालों का सत्ता के प्रति लालच आप देख रहे हैं. 2 दिन पहले देश में आपातकाल को 43 साल हुए हैं. सत्ता का लालच ऐसा है कि आपातकाल लगाने वाले और उस समय आपातकाल का विरोध करने वाले एक साथ आ गए हैं. ये समाज नहीं, सिर्फ अपने और अपने परिवार का हित देखते हैं.

10-जनधन योजना के तहत उत्तर प्रदेश में लगभग 5 करोड़ गरीबों के बैंक खाते खोलकर, 80 लाख से ज्यादा महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, करीब 1.7 करोड़ गरीबों को बीमा कवच देकर, 1.25 करोड़ शौचालय बनाकर, गरीबों को सशक्त करने का काम किया है.

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