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काशी में नाम को लेकर महापुरुषों में 'रस्‍साकशी'

पीएम मोदी 22 सितंबर को वाराणसी में 2 पुलों का लोकार्पण करने वाले हैं. उन्हीं पुलों का नाम रखने की रस्साकशी जारी है.

Shivaji Rai Updated On: Sep 16, 2017 09:35 AM IST

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काशी में नाम को लेकर महापुरुषों में 'रस्‍साकशी'

महापुरुष महानता का जीवंत पर्याय होता है. उसमें न कोई छोटा होता है और ना कोई बड़ा, ना ही महान विभूतियों की कोई आपसी तुलना होती है. आपसी तुलना को किसी नजरिए से सही भी नहीं ठहराया जा सकता. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आजकल महापुरुषों की एक दूसरे से तुलना हो रही है.

कोई किसी महापुरुष को श्रेष्‍ठ बता रहा है तो कोई किसी महापुरुष को उच्‍चतर. सभी के अपने-अपने तर्क और अपने-अपने मापदंड हैं. इन सबके साथ सियासी लाभ-हानि को लेकर गुणा-भाग भी चरम पर है.

प्रधानमंत्री को करना है पुल, योजनाओं का शिलान्यास 

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को वाराणसी आ रहे हैं. अपने दो दिन के प्रवास के दौरान पीएम कई योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास करेंगे. इनमें सबसे अहम है, गंगा नदी पर बने दो पुल. जिनका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है.

narendra modi in varanasi

पहला 'सामने घाट पुल' है जो रामनगर को वाराणसी से जोड़ता है. और दूसरा बलुआ पुल जो चंदौली को वाराणसी से जोड़ता है. इन दोनों पुलों का निर्माणकार्य लगभग पूरा हो चुका है लेकिन इन पुलों का नाम अभी तय नहीं हुआ है. चूंकि वाराणसी कई महान विभूतियों की जन्‍मस्‍थली और कर्मस्‍थली रही है. लिहाजा पुल का नाम महापुरुषों के नाम पर रखने को लेकर राजनीतिक दलों से लेकर आमजन के बीच रस्‍साकशी चल रही है.

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सभी लोग चाहते हैं कि पुल का नाम अमुक महापुरुष के नाम पर हो. यह रस्‍साकशी शासन के स्‍तर पर भी बनी हुई है. रस्‍साकशी को देखते हुए सूबे की सरकार भी नामकरण को लेकर बहुत संजीदा है. सरकार के बड़े ओहदाकार काशीवासियों की मंशा को भांप रहे हैं.

दीनदयाल से काशी नरेश विभूति नारायण सिंह तक शामिल 

वैसे तो कई महापुरुषों के नाम चर्चा में हैं पर खासतौर पर 6 नामों को लेकर प्रशासनिक स्‍तर पर प्रस्‍ताव दिए गए हैं. इन नामों में है, पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्‍त्री, बीजेपी के संस्‍थापक पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय, पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह, काशी हिंदू विश्‍वविद्यालय के संस्‍थापक पंडित मदन मोहन मालवीय. संत कीनाराम और अवधूत भगवान राम है.

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बीजेपी की मंशा है कि पुलों का नाम ऐसे महापुरुष के नाम पर हो जिससे निर्माण कार्य का पूरा श्रेय स्‍वतः ही बीजेपी सरकार को मिलता दिखे. इसी को देखते हुए उत्‍तर प्रदेश बीजेपी के अध्‍यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने 'बलुआ पुल' का नाम बीजेपी के संस्‍थापक पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय के नाम पर करने का प्रस्‍ताव दिया है. वहीं कांग्रेस और दूसरे दल के नेता दीनदयाल उपाध्‍याय के नाम का विरोध कर रहे हैं. महेंद्र नाथ पांडेय का कहना है कि बलुआ पुल और मुगलसराय की दूरी महज कुछ मील की है और मुगलसराय का दीनदयाल उपाध्‍याय के निधन से जुड़ाव है. लिहाजा पुल का नाम उनके नाम पर ही होना चाहिए.

राजनीतिक शख्स‍ियत से संत महात्मा के समर्थक दे रहे तर्क 

वहीं दूसरा वर्ग जिसमें गैर-बीजेपी दलों के नेता शामिल हैं उनका कहना है कि मुगलसराय रेलवे स्‍टेशन का नाम पहले से ही दीनदयाल उपाध्‍याय के नाम पर है. लि‍हाजा दूसरे महापुरुष के नाम पर पुल का नाम हो, उनका तर्क है कि वाराणसी की कई विभूतियां हैं जिनके नाम पर पुल का नाम रखना उचित होगा. कुछ लोग पंडित मदन मोहन मालवीय के नाम पर चाहते हैं तो कुछ संत कीनाराम और संत अवधूत भगवान राम के नाम पर चाहते हैं.

राजनीतिक शख्स‍ियत को लेकर ही नहीं, संत-महात्‍मा के नाम पर भी रस्‍साकशी कम नहीं है. दोनों संतों के श्रद्धालु भी नाम को लेकर शासन-प्रशासन स्‍तर पर अपना-अपना तर्क रख रहे हैं. कोई कीनाराम को चाहता है तो कोई अवधूत भगवान राम को. दोनों संतों में श्रद्धा रखने वाले लोगों की संख्‍या भी लाखों में है. लिहाजा संशय होना लाजिमी है.

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'सामने घाट पुल' को लेकर भी जोर आजमाइश कम नहीं है. रामनगर की रामलीला के महत्‍व को देखते हुए एक तबका इस पुल का नाम रामलीला सेतु रखना चाहता है तो दूसरा पुल का नाम पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह के नाम पर चाहता है.

CM Yogi Adityanath

पीएम से पहले सीएम योगी करेंगे नाम फाइनल 

एक तबका ऐसा भी है जो चाहता है कि पुल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री के नाम पर हो. योगी सरकार के मंत्री नीलकंठ तिवारी के अलावा बीजेपी के दो स्‍थानीय विधायक रविंद्र जायसवाल और सौरभ श्रीवास्‍तव ने भी अलग-अलग नामों का प्रस्‍ताव दिया है.

सूत्रों की मानें तो नामकरण को लेकर प्रशासनिक स्‍तर पर भी उहापोह और तनाव बना हुआ है. जानकार बता रहे हैं कि काशीवासियों की मंशा को समझने के लिए प्रधानमंत्री के आगमन से पहले सीएम योगी खुद वाराणसी का दौरा करेंगे और स्‍थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से नाम पर चर्चा करेंगे. उसके बाद नाम की आधिकारिक घोषणा होगी.

फिलहाल वाराणसी में महापुरुषों, विभूतियों और संत-महात्‍माओं को लेकर लघुत्‍तम-महत्‍तम, बड़ा-छोटा और शह-मात का दौर जारी है.

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