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औलिया के दरगाह में महिलाओं के प्रवेश वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई संभव

'निजामुद्दीन दरगाह की प्रवृति एक सार्वजनिक स्थान की है और लिंग के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान पर किसी के प्रवेश का निषेध भारत के संविधान के ढांचे के विपरीत है.'

Updated On: Dec 07, 2018 04:52 PM IST

FP Staff

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औलिया के दरगाह में महिलाओं के प्रवेश वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई संभव

दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के गर्भ गृह में महिलाओं की प्रवेश की इजाजत मांगने वाली एक याचिका की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में अगले हफ्ते हो सकती है. याचिका पुणे से लॉ की पढ़ाई करने वाली एक लड़की ने दायर की है.

याचिका में दावा किया गया है कि 27 नवंबर को जब वो दरगाह गई थी तब दरगाह के बाहर महिलाओं के प्रवेश निषेध का एक नोटिस टांग दिया गया था. दरगाह प्रमुख सूफी संत निजामुद्दीन औलिया की कब्र पर बनाई गई है.

याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और मंदिर के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश जारी करने के और इस प्रवेश पर रोक को 'असंवैधानिक' घोषित करने की मांग की गई. याचिका में कहा गया है कि- 'निजामुद्दीन दरगाह की प्रवृति एक सार्वजनिक स्थान की है और लिंग के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान पर किसी के प्रवेश का निषेध भारत के संविधान के ढांचे के विपरीत है.'

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक वकील कमलेश कुमार मिश्रा के माध्यम से दायर पीआईएल में दलील दी गई कि अधिकारियों या दिल्ली पुलिस से बार बार जानकारी मांगने के बावजूद उन्हें किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिला है.

याचिका में सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया गया है. उस फैसले में कोर्ट ने महिलाओं को मंदिर में प्रार्थना करने की इजाजत दी. इसमें अजमेर शरीफ दरगाह और हाजी अली दरगाह जैसे कई अन्य मंदिरों का भी उल्लेख किया गया है जो महिलाओं के प्रवेश पर रोक नहीं लगाते हैं.

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