S M L

केंद्र ने सेना भर्ती में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से किया इनकार

केंद्र ने भारतीय सेना की भर्ती में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के आरोप को ‘निराधार और बेबुनियादी’ बताया

Updated On: Feb 10, 2018 05:10 PM IST

Bhasha

0
केंद्र ने सेना भर्ती में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से किया इनकार
Loading...

केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में उन दो याचिकाओं का पुरजोर विरोध किया है जिनमें मिलिटरी इंजीनियरिंग से जुड़ी भर्ती में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया गया है.

कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल की बेंच को केंद्र ने भारतीय सेना की भर्ती में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के आरोप को ‘निराधार और बेबुनियादी’ बताया.

इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में दायर दोनों याचिकाओं को खारिज करने की मांग की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सेना महिलाओं के खिलाफ ‘‘संस्थागत भेदभाव’’ करती है क्योंकि वह दो कोर में उनकी भर्ती नहीं करती.

बहरहाल, भारतीय सेना ने साफ कर दिया है कि शॉर्ट सर्विस कमिशन (महिला अधिकारियों) की भर्ती के लिए 1992 में महिला विशेष भर्ती योजना शुरू की गई है. इससे पहले महिला अधिकारियों की भर्ती की कोई व्यवस्था नहीं थी.

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट

याचिका में क्या दी गई दलील?

याचिका दायर करने वाले वकील कुश कालरा ने कहा कि लिंग के आधार पर यह भेदभाव समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. लिंग के आधार पर इस अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए. वकील ने याचिका में दलील दी है कि महिलाओं की भर्ती ना करने के पीछे सेना मानती है कि वे में स्थायी कमिशन के लायक नहीं हैं जबकि सेना की शिक्षा कोर एक स्थायी कमीशन है.

याचिकाकर्ता ने योग्यता की उन शर्तों को हटाने का आदेश देने की मांग की जिनमें सेना की शिक्षा कोर में महिलाओं को भर्ती रोकने का प्रबंध है. इजीनियरिंग भर्ती से जुड़ी अपनी एक दूसरी याचिका में कालरा ने कहा कि भर्ती के विज्ञापन में केवल पुरुष कैंडिडेट से ही आवेदन मांगे जाते हैं.

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi