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SC की लाइब्रेरी में पहली बार लगेगी महिला वकील की तस्वीर

जिस वकील की तस्वीर लाइब्रेरी में लगने जा रही है उन्हें जनहित याचिकाओं का जननी भी कहा जाता है

FP Staff Updated On: Dec 02, 2017 04:21 PM IST

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SC की लाइब्रेरी में पहली बार लगेगी महिला वकील की तस्वीर

सोचिए उन कैदियों पर कैसी बीतती होगी जो फैसले के इंतजार में सालों तक सलाखों के पीछे रहते हैं. दामन पर लगे दाग के साथ जिंदगी गुजरती है. घर, परिवार और रिश्तेदारों को भी समाज उस इंसान से जोड़कर ही देखता है. इतने सारे कष्टों के साथ जीने के बाद एक दिन फैसला आता है कि आप बाइज्जत बरी किए जाते हैं, तो ये एक तरह का मजाक ही लगता है. क्योंकि बरी होने के बाद भी वो इज्जत वापस नहीं मिलती और ना ही समय. ऐसे ही कैदियों के लिए मसीहा बन कर आईं थी एक वकील जिनका नाम था पुष्पा कपीला हिंगोरानी. विचाराधीन कैदियों की रिहाई के लिए 1979 में उन्होंने कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर थी. कोर्ट ने इसके बाद 40,000 विचाराधीन कैदियों को रिहा किया. देश में ऐसा यह पहला मामला था.

उनके इन्हीं कार्यों को सम्मान देने के लिए कपिला की तस्वीर सुप्रीम कोर्ट के लाइब्रेरी में लगाई जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में ये पहला मौका है जब किसी महिला वकील की तस्वीर लगाई जा रही है.

कपिला हिंरोगानी को जनहित याचिकाओं का जननी भी कहा जाता है. कपिला की तस्वीर दुनिया के जाने-माने नामों एमसी सीतलवाड़, सीके दफ़्तरी और आरके जैन की तस्वीरों के साथ लगाई जाने वाली है. तस्वीर जारी करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था.

वे देश की पहली महिला वकील रहीं, जिन्होंने इंग्लैंड से कानून की डिग्री लेने के बाद  विचाराधीन कैदियों के हित में कानून सुधार के लिए कई प्रयास किए. नैरोबी में जन्मी हिंगोरानी महात्मा गांधी से बेहद प्रभावित थीं और इसलिए उन्होंने डिग्री के बाद भारत में रहना और देशहित में काम करना चुना. 60 सालों के अपनी कार्यकाल दौरान वे अपने परिवार से भी दूर रहीं. हिंगोरानी का 86 साल की आयु में 2013 में निधन हुआ.

खबर और तस्वीर साभार- न्यूज 18

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