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पेट्रोल, डीजल हुआ सस्ता. जानिए पांच बड़ी बातें

अंतर्राष्ट्रीय दरों के बढ़ने से 30 जुलाई के बाद से खुदरा बिक्री की कीमतें बढ़ रही हैं. 29 मई को पेट्रोल की कीमत अब तक के सबसे उच्चतम स्तर 78.43 रुपये प्रति लीटर हो गई थी.

Updated On: Aug 13, 2018 05:35 PM IST

FP Staff

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पेट्रोल, डीजल हुआ सस्ता. जानिए पांच बड़ी बातें

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम की हैं. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 77.14 रुपए प्रति लीटर, मुंबई में 84.58 रुपए प्रति लीटर, कोलकाता में 80.10 रुपए प्रति लीटर और चेन्नई में 80.14 रुपए प्रति लीटर हो गई. डीजल की कीमत दिल्ली में 68.72 रुपए प्रति लीटर, मुंबई में 72.96 रुपए प्रति लीटर, कोलकाता में 71.56 रुपए प्रति लीटर और चेन्नई में 72.59 रुपए प्रति लीटर है.

पेट्रोल और डीजल की कम हुई दरों के बारे में 5 बड़ी बातें हैं:

1. कम बिक्री कर या वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) के कारण दिल्ली में ईंधन की कीमतें सभी महानगरों और अधिकांश राज्यों की राजधानियों में सबसे कम हैं. दिल्ली में पेट्रोल पर 27 फीसदी और डीजल पर 17.24 फीसदी वैट लगाया जाता है. पेट्रोल पर मुंबई का सबसे ज्यादा वैट 39.12 फीसदी है.

2. पिछले साल जून के मध्य में सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनियों ने ईंधन के दामों की कीमत के रोजाना संशोधन का फैसला लिया था. इस फैसले से हर महीने के पहली और सोलहवीं तारीख को ईंधन के दरों में संशोधन की 15 साल पुरानी प्रथा को खत्म कर दिया गया था. उसके बाद से इंडियन ऑइल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे ईंधन की कीमतों में संशोधन करती हैं.

3. अंतर्राष्ट्रीय दरों के बढ़ने से 30 जुलाई के बाद से खुदरा बिक्री की कीमतें बढ़ रही हैं. 29 मई को पेट्रोल की कीमत अब तक के सबसे उच्चतम स्तर 78.43 रुपये प्रति लीटर हो गई थी. उसके बाद कीमतें कम होनी शुरु हुई. इस दिन डीजल की कीमत 69.30 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी.

4. वैश्विक स्तर पर, तेल की कीमतों में सोमवार को गिरावट आई. वैश्विक व्यापार में तनाव और उभरते बाजारों में आर्थिक संकट ने ईंधन की कीमतें कम करने में मदद की. व्यापारियों का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार विवादों के चलते तेल की मांग कमजोर पड़ी. साथ ही तुर्की का आर्थिक संकट भी संभावित बाजारों में पांव पसार रहा है.

5. तेल बाजारों की सतर्कता के बावजूद, कीमतों को गिरने से संभालने की कोशिश की गई. नवंबर से संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों को लागू करना शुरू कर देगा जिससे पेट्रोलियम क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा. पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों (ओपेक) के संगठन के सदस्यों में ईरान तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है.

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