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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बीते 7 हफ्तों में आई भारी कमी, जानिए क्या है आज का रेट

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी बनी हुई है

Updated On: Nov 27, 2018 02:52 PM IST

FP Staff

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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बीते 7 हफ्तों में आई भारी कमी, जानिए क्या है आज का रेट

पेट्रोल डीजल की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है. मंगलवार को भी पेट्रोल की कीमत में 42 पैसे और डीजल में 40 पैसे की कमी की गई है. अब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 74.07 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 68.89 रुपए प्रति लीटर हो गई है.

वहीं अगर इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों की बात करें तो इसमे भी नरमी बनी हुई है और डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है. इन सब कारणों की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कटौती हुई है.

ग्राहकों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि पिछले 53 दिनों में पेट्रोल के दामों में 11.73 रुपए प्रति लीटर की कटौती दर्ज की गई है वहीं डीजल में 13.64 रुपए प्रति लीटर की गिरावट हुई है. इसके पीछे वजह यह है कि 3 अक्टूबर के बाद इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड के दाम में 30 फीसदी से ज्यादा और डब्ल्यूटीआई की कीमत में 33 फीसदी की कमी आई है. सीएनबीसी आवाज के मुताबिक यह हैं आज के रेट-

हालांकि सवाल ये है कि क्या इंटरनेशनल मार्केट में जितने दाम गिरे हैं, भारतीय ग्राहकों को उसका पूरा फायदा मिल रहा है?

एक अक्टूबर से क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 24 फीसदी कमी आई है. पेट्रोल की कीमतें इस बीच 8.8 फीसदी कम हुई हैं. ऐसा क्यों हुआ है? इसके तकनीकी पहलुओं पर तमाम विशेषज्ञ अपनी बातें रख सकते हैं. अंग्रेजी अखबार द हिंदू के अनुसार एक विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत में यह उम्मीद नहीं कर सकते कि जिस अनुपात में इंटरनेशनल मार्केट में दाम गिरेंगे, ग्राहकों को उसी अनुपात में फायदा हो. लेकिन इतने लंबे समय तक इतना बड़ा गैप नहीं होना चाहिए.

द हिंदू को दिए अपने बयान में ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री प्रैक्टिस, PwC इंडिया के पार्टनर और लीडर दीपक माहुरकर ने कहा था, ‘पेट्रोल के दाम तय होना जटिल प्रक्रिया है. जो लोग सीधे जुड़े नहीं हैं, उनके लिए इसे समझना बहुत मुश्किल है. कीमतों में इंटरनेशनल प्रॉडक्ट की कीमतों के अलावा इन-लैंड कीमतों का भी फर्क पड़ता है.’ इसके साथ डीलर के कमीशन का हिस्सा भी फर्क डालता है.

उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि ग्लोबल प्राइस पर बैरेल 65 डॉलर है. उसके बाद ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा, क्रॉस सब्सिडी घाटा, हैंडलिंग का घाटा, एक्सपोर्ट पैरिटी यानी निर्यात समता कीमत, डीलर कमीशन और फिर अलग-अलग जगहों के टैक्स.. ये सब जोड़ने के बाद कीमत आती है.

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