S M L

पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों ने बनाया रिकॉर्ड, सरकार का अगला कदम क्या होगा?

विदेशों से कच्चा तेल खरीदना महंगा हो गया है. इसलिए कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है

Updated On: Sep 05, 2018 03:24 PM IST

FP Staff

0
पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों ने बनाया रिकॉर्ड, सरकार का अगला कदम क्या होगा?
Loading...

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार 12वें दिन बढ़ोतरी दर्ज की गई है. देशभर में पट्रोल और डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं. दिल्ली में बुधवार को पेट्रोल की कीमतों में 9 पैसे का इजाफा हुआ है. वहीं, मुंबई में 8 पैसे बढ़े है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतें फिलहाल घटने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है, क्योंकि रुपया कमजोर है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही है. ऐसे में विदेशों से कच्चा तेल खरीदना महंगा हो गया है. इसलिए कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है.

दिल्ली

पेट्रोल 79.40 रुपये/लीटर डीजल 71.43 रुपये/लीटर

मुंबई

पेट्रोल 86.80 रुपये/लीटर डीजल 75.82 रुपये/लीटर

कोलकाता

पेट्रोल 82.31 रुपये/लीटर डीजल 74.27 रुपये/लीटर

चेन्नई

पेट्रोल 82.51 रुपये/लीटर डीजल 75.48 रुपये/लीटर

क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम- पेट्रोल और डीजल के लागातार बढ़ते दामों के लिए गिरता रुपया और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें जिम्मेदार हैं. डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट जारी है. कच्चा तेल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है. इसके चलते तेल कंपनियों की लागत में भी इजाफा हो रहा है.LIC की इस पॉलिसी में सिर्फ 103 रुपये रोजाना बचाकर मिल जाएंगे 13 लाख

अब सरकार का क्या करेगी?-सरकार ने पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दाम से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की संभावनाओं को खारिज कर दिया. सरकार ने कहा है कि राजस्व वसूली में किसी तरह की कटौती की उसके समक्ष बहुत कम गुंजाइश है. एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट के चलते आयात महंगा हो रहा है.

इन दोनों ईंधन के दाम में करीब आधा हिस्सा, केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा लिए जाने वाले कर का होता है. पेट्रोल, डीजल के दाम में निरंतर वृद्धि पर टिप्पणी करते हुए, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, 'पेट्रोल, डीजल की कीमतों में निरंतर वृद्धि जरूरी नहीं है, क्योंकि ईधनों पर अत्यधिक करों की वजह से दाम ऊंचे हैं. अगर करों में कटौती की जाती है, तो कीमतें काफी कम हो जाएंगी.

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हम पहले से ही जानते हैं कि चालू खाते के घाटे पर असर होगा. यह जानते हुए हम राजकोषीय घाटे के संबंध में कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं, हमें इस मामले में समझदारी से फैसला करना होगा. राजकोषीय घाटे का मतलब होगा आय से अधिक व्यय का होना जबकि चालू खाते का घाटा देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह और उसके बाहरी प्रवाह के बीच का अंतर होता है. चुनावी वर्ष में सरकार सार्वजनिक व्यय में कटौती का जोखिम नहीं उठा सकती है. इसका विकास कार्यों पर असर होगा.

(साभार: न्यूज़18)

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi