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उत्तरप्रदेश में अवैध बूचड़खाने के खिलाफ एनजीटी में याचिका

याचिका में कहा गया है कि जानवरों के अवशेषों और उसके गंदे पानी से पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है

Updated On: Mar 28, 2017 06:43 PM IST

Bhasha

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उत्तरप्रदेश में अवैध बूचड़खाने के खिलाफ एनजीटी में याचिका

यूपी में अवैध बूचड़खाने के खिलाफ पर्यावरण प्रेमी एक शख्स ने मंगलवार को एनजीटी का रुख किया. उनका कहना कि अवैध बूचड़खानों से पर्यावरण को नुकसान होता है. मीट को धोने में इस्तेमाल होने वाला पानी खुले नाले में बहा दिया जाता है जिसके चलते पर्यावरण प्रदूषित होता है.

जस्टिस जवाद रहीम की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध याचिका में राज्य में अवैध बूचड़खाना बंद करने के एनजीटी के 2015 के आदेश की दोबारा जांच करने की मांग भी की गई है.

जानवरों के अवशेषों, गंदा पानी खुले नाले में बहाने से प्रदूषण

याचिका में मामले में उत्तरप्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य भूजल विभाग और अन्य को पक्ष बनाया गया है.

वकील अनुजा चौहान के जरिए दाखिल की गई याचिका में अलीगढ़ में चार ‘अवैध’ बूचड़खाने के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

Slaughter House

देश में सबसे ज्यादा बूचड़खाने वाले प्रदेशों की सूची में उत्तर प्रदेश का नंबर दूसरा है (फोटो: रॉयटर्स)

उन्होंने आरोप लगाया है कि बूचड़खाने से जानवरों के अवशेष और मृत जानवरों के खून से मिले गंदे पानी को खुले नाले में बहा दिया जाता है जो गंगा और यमुना की सहायक नदियों में जाकर उन्हें प्रदूषित करती है.

याचिका में बूचड़खाने द्वारा बिना अनुमति के अवैध रूप से भूजल दोहन का मामला भी उठाया गया है. साथ ही जानवरों की हड्डियों को भट्टियों में डालने पर उसमें से निकले धुआं से वायु प्रदूषण के मुद्दे को भी उठाया गया है.

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