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पासपोर्ट बनवाना अब और हुआ आसान, सरकार ने बदले नियम

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए कई नए नियमों की घोषणा की है.

Updated On: Dec 24, 2016 10:34 AM IST

FP Staff

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पासपोर्ट बनवाना अब और हुआ आसान, सरकार ने बदले नियम

शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनवाने के नियमों को और भी ज्यादा उदार और आसान बनाने के लिए कई नए नियमों की घोषणा की है.

इस नियमों के लागू के जाने से पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले भारतीय नागरिकों को काफी फायदा होगा.

नए नियमों में जन्म प्रमाण पत्र, शादी का प्रमाण पत्र और माता या पिता या फिर कानूनी अभिभावकों के उल्लेख के बारे में कई बदलाव किए हैं.

अब से पहले जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं होते थे, उनको मजिस्ट्रेट से प्रमाण पत्र लेना होता था, लेकिन अब आधार कार्ड में उल्लेखित जन्मतिथि को मान्यता दे दी गई है.

आधार कार्ड के अलावा ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, स्कूल का प्रमाणपत्र या फिर मतदाता पहचान पत्र को भी जन्म तिथि के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा.

साधु-संन्यासियों के लिए माता-पिता के नाम पर उनके अध्यात्मिक गुरु का नाम देने की छूट दी गई है. सिंगल मदर या फादर वाले बच्चों के लिए पासपोर्ट पर माता या पिता या फिर कानूनी अभिभावक के नाम के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है.

विवाहित लोगों के लिए विवाह का प्रमाण पत्र देने की जरुरत को भी हटा दिया गया है. सरकारी लोगों या नौकरशाहों को अपने विभाग से अनापत्ति प्रमाण लेने के नियम को भी खत्म कर दिया गया है.

अनाथ बच्चों के लिए उनके अनाथालय के प्रमाण पत्र को जन्मतिथि और अभिभावक के नाम के स्थान पर इस्तेमाल करने की सुविधा की गई है.

विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित नियम इस तरह से हैं:

जन्मतिथि का प्रमाण

पासपोर्ट नियमावली, 1980 के मौजूदा वैधानिक प्रावधानों के अनुसार 26/01/1989 को या उसके बाद जन्म लेने वाले आवेदकों को पासपोर्ट बनवाने के लिए जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर अपना जन्म प्रमाणपत्र पेश करना जरुरी होता था, लेकिन नए नियमों के अनुसार ऐसे आवेदक जन्म के सबूत के तौर पर नीचे दिए गए दस्तावेजों में से कोई भी एक दस्तावेज दिखा सकते हैं-

(1). जन्म एवं मृत्य के रजिस्ट्रार या नगर निगम या भारत में जन्म लेने वाले बच्चों को पंजीकृत करने के लिए जन्म एवं मृत्यु अधिनियम, 1969 के अंतर्गत अन्य किसी निर्धारित प्राधिकारी द्वारा जारी जन्मतिथि प्रमाणपत्र.

(2). लास्ट अटेंडेड स्कूल/मान्यता प्राप्त शैक्षणिक बोर्ड द्वारा जारी ट्रांसफर/स्कूल लीविंग/10वीं सर्टिफिकेट, जिस पर आवेदक की जन्म की तारीख लिखी हो.

(3) आयकर विभाग द्वारा जारी पैन-कार्ड, जिस पर उम्मीदवार की जन्म की तारीख लिखी हो.

(4). आधार कार्ड/ई-आधार कार्ड जिस पर उम्मीदवार की जन्मतिथि लिखी हो.

(5). आवेदक के सर्विस रिकॉर्ड की प्रति (केवल सरकारी कर्मियों के संबंध में) या पे-पेंशन ऑर्डर (केवल सेवानिवृत कर्मियों के संबंध में), आवेदक के संबंधित मंत्रालय/विभाग के प्रशासन में ऑफिसर/इन-चार्ज द्वारा अटेस्टेड/सर्टिफाइड, जिसमें जन्म की तारीख लिखी हो.

(6). संबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस, जिस पर उम्मीदवार की जन्म की तारीख लिखी हो.

(7). भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी चुनाव फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी), जिस पर उम्मीदवार की जन्म की तारीख लिखी हो.

(8). पब्लिक लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन/कंपनियों दवारा जारी पॉलिसी बॉन्ड जिस पर इंश्योरेंस पॉलिसी के होल्डर की जन्म की तारीख लिखी हो.

vikas swarup

विकास स्वरूप, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय (तस्वीर, ट्विटर से साभार)

 अंतर-मंत्रालयी समिति की रिपोर्ट

पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में सिंगल पेरेंट और गोद लिए बच्चों से जुड़ी तमाम समस्याओं को निपटाने के लिए विदेश मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी. समिति की रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया है.

समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं.

(1). ऑनलाइन पासपोर्ट आवेदन पत्र में अब माता या पिता या फिर कानूनी अभिभावक के नाम में से किसी एक का नाम देना होगा. इससे सिंगल पेरेंट्स के बच्चों को पासपोर्ट जारी करने में आसानी होगी.

(2). पासपोर्ट नियमावली 1980 के 15 बिंदुओं को कम करके अब 9 कर दिया गया है. बिंदुओं ए, सी, डी, ई, जे और के को हटा दिया गया है और कुछ बिंदु किसी दूसरे बिंदु में मिला दिए गए हैं.

(3). आवेदकों द्वारा विभिन्न बिंदुओं पर दी जाने वाली जानकारी सादे कागज पर एक सेल्फ डिक्लरेशन के रूप में होगा. किसी अटेस्टेशन/शपथ/नोटरी/कार्यकारी मजिस्ट्रेट/प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की आवश्यकता नहीं होगी.

(4). शादीशुदा आवेदकों को ‘एनेक्चर के’ या विवाह प्रमाणपत्र देना जरूरी नहीं होगा.

(5). तलाक या अलग होने की स्थिति में पासपोर्ट आवेदन पत्र में अब पति/पत्नी का नाम देना जरूरी नहीं होगा. इसके लिए तलाकनामे की जरूरत भी नहीं होगी.

(6). अनाथालय में रहने वाले बच्चे जिनके पास जन्म की तारीख या 10वीं क्लास का सर्टीफिकेट नहीं हैं, वह अनाथालय/चाइल्ड केयर होम के प्रमुख की ओर से उनके आधिकारिक लेटर हेड पर आवेदन की जन्म की तारीख साबित करने वाला एक शपथ पत्र जमा कर सकते हैं.

(7). बच्चे को गोद लेने के स्थिति में इसका सर्टीफिकेट देना जरूरी नहीं होगा. सादे कागज पर भी गोद लेने को तय करने वाला शपथ पत्र दिया जा सकता है.

(8). साधु-सन्यासी पासपोर्ट आवेदन पत्र में अपने माता-पिता की नाम की जगह अपने धर्मगुरु का नाम दे सकते हैं, बशर्ते कि उन धर्मगुरु का नाम किसी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो, फोटो आईडी कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड वगैरह.

इन बदलावों को निश्चित करने के लिए सरकारी जर्नल में जल्द ही आधिकारिक सूचना प्रकाशित की जाएगी. इन बदलावों के बारे में पासपोर्ट दफ्तर और विदेश में बने पासपोर्ट दफ्तरों को सूचना दी जा रही है.

विदेश मंत्रालय को उम्मीद है कि पासपोर्ट जारी करने के लिए जरूरी नियमों में बदलावों के बाद लोगों को पासपोर्ट मिलने में आसानी होगी. इसके साथ ही मंत्रालय को भी नागरिकों को पासपोर्ट सही समय, पारदर्शी, आसान और ज्यादा भरोसेमंद तरीके से जारी करने में मदद मिलेगी.

ये सब कुछ एक सुविधापूर्ण वातावरण में बगैर किसी परेशानी के प्रशिक्षित और समर्पित कर्मचारियों द्वारा सफलतापूर्व किया जा सकेगा.

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