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अगर आप नौकरी करती हैं और मां बनने वाली हैं तो मिलेगी 26 हफ्ते की छुट्टी...!

लोकसभा ने गुरुवार को संसद में मेटरनिटी बेनेफिट बिल- 2016 को पास कर दिया है.

Updated On: Mar 10, 2017 01:41 PM IST

FP Staff

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अगर आप नौकरी करती हैं और मां बनने वाली हैं तो मिलेगी 26 हफ्ते की छुट्टी...!

लोकसभा ने गुरुवार को संसद में मेटरनिटी बेनेफिट बिल- 2016 को पास कर दिया है. इस बिल के पास होने के साथ ही अब देश की गर्भवती और मां बनने वाली महिलाओं 26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जाएगी. इस समय ये छुट्टी सिर्फ 12 हफ्तों की होती है.

राज्यसभा में ये बिल पहले ही 11 अगस्त 2016 को पास कर दिया गया था, अब लोकसभा में पारित होने के बाद इसके कानून बनने के रास्ते साफ हो गये हैं. कानून बनने के साथ ही इसे हर उस संस्थान में लागू करना होगा जिसमें 10 या उससे ज्यादा लोग काम करते हैं.

इस कानून के बनने से देशभर की तकरीबन 18 लाख कामकाजी महिलाओं को फायदा होगा. लेकिन ये सुविधा पहले दो बच्चों के जन्म पर ही मिलेगा. तीसरे बच्चे का जन्म होने की सूरत में छुट्टी की अवधि घटकर 12 हफ्ते की रह जाएगी.

ये मेटरनिटी बेनेफिट (एमेंडमेंट) बिल 2016, उन महिलाओं को भी 12 हफ्ते की छुट्टी देता है जो 3 महीने से छोटे बच्चे को गोद लेती हैं और उनको भी जो सरोगेसी के जरिए मां बनती हैं.

मेटरनिटी लीव की अवधि उस दिन से गिनी जाएगी जिस दिन से गोद लेने वाली या कमिशनिंग मां (सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली) की गोद में बच्चा सौंपा जाएगा.

मेटरनिटी बेनेफिट एक्ट 1961 में संशोधन करते हुए श्रममंत्री बंदारू दत्तात्रेय ने कहा था कि उनकी कोशिश गर्भवती महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा फायदे देने की होगी.

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लोकसभा की कार्यवाही (तस्वीर-पीटीआई)

महिलाओं को तोहफा

गुरुवार को संसद में नया कानून पेश करते हुए और चार घंटे तक चली बहस के बाद उन्होंने कहा कि, ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दूसरे दिन ये उनकी तरफ से देश की महिलाओं को एक छोटा सा तोहफा है.’

उन्होंने कहा, ‘गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की देखभाल एक बहुत बड़ी जरुरत है जिसे पूरा किया जाना चाहिए.’

महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने इस मौके पर खुशी जाहिर करते हुए कहा- ‘ये महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में उठाया गए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है. इससे हजारों महिलाओं की मदद होगी और स्वस्थ बच्चे पैदा होंगे. हम लंबे समय से इसपर काम कर रहे थे.’

ये बिल छोटे बच्चों की मांओं को घर से काम करने की भी सुविधा देता है. इसके अलावा उन सभी काम करने वाली जगहों पर क्रेच की सुविधा को अनिवार्य किया गया है जहां 50 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं.

इस दौरान मालिकों और दफ्तरों के मैनेजरों को महिला कर्मचारियों को चार बार क्रेच जाकर अपने बच्चे से मिलने की सुविधा देनी होगी. इसमें महिलाओं का रेस्ट पीरियड भी शामिल होगा.

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बिल में ये भी कहा गया है कि सभी व्यवसायिक संस्थानों को अपनी महिला कर्मचारियों को नौकरी ज्वाइन करते समय उन्हें दी जाने वाली इन सभी सुविधाओं की जानकारी देनी जरुरी होगी. ये जानकारी कागजी और ऑनलाइन कॉपी में होनी चाहिए.

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कांग्रेस सांसद सुश्मिता देव ने पैटरनिटी लीव की मांग की (तस्वीर-पीटीआई)

पेटरनिटी लीव की मांग

हालांकि, बहस में शामिल कांग्रेस सांसद सुश्मिता देव ने मांग की, कि सरकार मैटरनिटी लीव की अवधि बढ़ाने के साथ-साथ पैटरनिटी लीव का प्रावधान भी लाए.

देव का तर्क था कि, ‘नया कानून निजी सेक्टर में महिलाओं की नौकरी की संभावनाओं का काफी कर सकता है. ऐसा न होने के लिए जरूरी है कि सरकार या तो पेटरनिटी लीव का प्रावधान लाए या संस्थाओं को ऐसी स्थितियों के लिए फंड दे.’

देव का तर्क था, ‘अगर महिला और पुरुष दोनों को ही सुविधा मिलती है तो ये सोच पनपेगी की पुरुष भी छुट्ठी पर जा रहे हैं, और ये महिलाओं के लिए नुकसानदायक नहीं होगा.’

उन्होंने तीसरे बच्चे के जन्म पर छुट्टी कम होने पर भी सवाल किया. खासकर, तब जब ये सरकार का कोई गुप्त फैमिली प्लानिंग पॉलिसी का हिस्सा न हो.

ये बिल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सहमति के बाद ही कानून के तौर पर पास हुआ है.

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