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पद्मावतः अहमदाबाद में मॉल पर हमला, गुड़गांव में धारा 144 लागू

देश भर में हो रहे फिल्म की विरोध के बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री ने अपील की है कि लोग इस फिल्म को न देखें, भंसाली का एजेंडा सिर्फ पैसा है इतिहास दिखाना नहीं

FP Staff Updated On: Jan 24, 2018 09:23 AM IST

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पद्मावतः अहमदाबाद में मॉल पर हमला, गुड़गांव में धारा 144 लागू

संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म पद्मावत का विरोध पूरे देश में जारी है. गुजरात में फिल्म का विरोध कर रहे लोगों ने अहमदाबाद के एक मॉल को निशाना बनाया और यहां तोड़फोड़ की. मॉल के आसपास के दुकानों समेत वहां खड़ी गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया. इन घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को काफी दिक्कतों का सामना आया और उसे हवाई फायरिंग तक करने की नौबत आ गई.

जिस मॉल पर हमला किया गया उसके मैनेजर राकेश मेहता ने कहा कि हमने पहले से ही बोर्ड लगा रखा था कि हम इस फिल्म को नहीं दिखाएंगे, उसके बाद भी इस मॉल को निशाना बनाया गया है.

सबसे खास बात यह है कि इसी कारण गुजरात के मल्टिप्लेक्सों ने पद्मावत फिल्म न दिखाने का ऐलान किया था, उसके बाद भी तोड़फोड़ की घटना हुई.

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि राज्य में ज्यादातर सिनेमा और मल्टिप्लेक्स मालिक स्वेच्छा से इस फिल्म को नहीं दिखाने का फैसला लिया है. उन्होंने इस बात को भी कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी.

गुड़गांव में रविवार तक के लिए धारा 144 लागू

भंसाली की यह फिल्म सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने और सेंसर बोर्ड की हरी झंडी के बाद 25 जनवरी को रिलीज के लिए तैयार है. उससे पहले राजपूत संगठनों और करणी सेना के विरोध के बाद हरियाणा के गुड़गांव में रविवार तक के लिए धारा 144 लगा दी गई है. कई संगठनों ने फिल्म दिखाने वाले सिनेमाघरों और मल्टिप्लेक्सों को निशाना बनाने की धमकी दी थी उसके बाद इस कदम को उठाया गया है.

गुड़गांव के डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह ने बताया कि फिल्म रिलीज होने के बाद कानून व्यवस्था में कोई गड़बड़ी न हो जाए उसे ध्यान में रखकर धारा 144 लगाई गई है. यह रविवार तक जारी रहेगी.

महाराष्ट्र के मंत्री जी अपील, न देखें पद्मावत

इस फिल्म की खिलाफत करने वालों में अब महाराष्ट्र के मंत्री का नाम भी जुड़ गया है. राज्य सरकार में मंत्री जयकुमार रावल ने लोगों से अपील की है कि वो इस फिल्म को न देखे.

उन्होंने कहा कि मैं लोगों से अपील करता हूं कि कृपया वे इस फिल्म को न देखें. इतनी सारी अन्य फिल्में हैं. सलमान खान की फिल्म टाइगर जिंदा है को ले लीजिए. यह फिल्म कितना प्रेरित करती है. आपको आर्मी में ज्वॉइन करने की तरह महसूस होता है. इस तरह के विषयों पर फिल्म आनी चाहिए.

जयकुमार रावल ने यह भी कहा कि सिर्फ और सिर्फ पैसा संजय लीला भंसाली के एजेंडे में है. उन्होंने कहा कि अगर इसके लिए संजय लीला भंसाली समाज के लिए बड़े पैमाने पर वकालत करते तो मैं उनके खजाने को भरने के लिए 10-12 लाख रुपए दे देता. पैसा ही उनका एजेंडा था. ऐसा नहीं है कि वो कुछ इतिहास दिखाना चाहते हैं.

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