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14 दिन से अनशन कर रहे हार्दिक की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

पाटीदारों के लिए आरक्षण और किसानों की कर्ज माफी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की तबीयत बिगड़ गई है

Updated On: Sep 07, 2018 04:59 PM IST

FP Staff

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14 दिन से अनशन कर रहे हार्दिक की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

आरक्षण और किसानों की कर्ज माफी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की तबीयत बिगड़ गई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. शुक्रवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था. हार्दिक के अनशन का शुक्रवार को 14वां दिन है. डॉक्टरों ने बिगड़ती सेहत को देखकर उन्हें पहले ही अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी लेकिन हार्दिक राजी नहीं हुए.

इतने लंबे के अनशन के बाद भी सरकार की तरफ से सकारात्मक प्रस्ताव नहीं मिलने के बाद हार्दिक ने गुरुवार से पानी नहीं पीने का ऐलान कर दिया था. इस कारण स्थिति और खराब हो गई. हार्दिक की हालत मंगलवार से ही काफी बिगड़ी हुई है. गुरुवार को उन्हें एक जगह से लाने ले जाने के लिए व्हील चेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था.

वहीं गुजरात कांग्रेस ने घोषणा की है कि यदि राज्य सरकार पाटीदार नेता हार्दिक पटेल से बातचीत नहीं करती है तो वह उनके समर्थन में 24 घंटे का उपवास रखेगी.

किसानों को मजबूर न करे सरकार

पाटीदार आरक्षण समिति ने हार्दिक के इस फैसले पर चिंता जताई और सरकार की उदासीनता की आलोचना की है. समिति ने कहा है कि सरकार हार्दिक के जीवन के साथ खेल रही है. समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि वो किसानों को मजबूर न करे.

हार्दिक पटेल किसानों की कर्ज माफी और सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में ओबीसी वर्ग के तहत पाटीदार समुदाय के लिए आरक्षण की मांगों को लेकर 25 अगस्त से अनशन कर रहे हैं.

डॉक्टरों ने मंगलवार को हार्दिक पटेल के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर की थी. जिसके कुछ घंटों बाद राज्य की बीजेपी सरकार ने गांधीनगर में पाटीदार समुदाय के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की थी.

इस मुद्दे पर बातचीत के लिए कुछ पाटीदार संगठन मंगलवार को राज्य के मंत्रियों से मिले थे, जिसके बाद हार्दिक के नेतृत्व वाले पाटीदार अनामत आंदोलन समिति ने इन संगठनों पर बीजेपी के एजेंट होने का आरोप लगाया है. अब पाटीदार संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि अब वे इस मामले में तब तक मध्यस्थता नहीं करेंगे जब तक 'पास' उन्हें लिखित में इसका अधिकार नहीं देती.

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