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क्या पी चिदम्बरम तक पहुंच सकती है कार्ति मामले की आंच

सुब्रमण्यम स्वामी लगातार पी चिदंबरम पर इस डील में शामिल होने का आरोप लगा रहे हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Mar 06, 2018 08:46 PM IST

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क्या पी चिदम्बरम तक पहुंच सकती है कार्ति मामले की आंच

सीबीआई की विशेष अदालत ने देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की सीबीआई रिमांड तीन दिन और बढ़ा दी है. सीबीआई ने पिछले सप्ताह ही आईएनएक्स मीडिया डील मामले में कार्ति चिदंबरम को चेन्नई से गिरफ्तार किया था.

मंगलवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सीबीआई की तरफ से केस की पैरवी कर रहे वकील तुषार मेहता ने दावा किया कि कार्ति से पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं इसलिए रिमांड 9 दिन और बढ़ा दी जाए. इस पर कार्ति के वकील अभिषेक मनु सिंधवी ने विरोध करते हुए तर्क दिया है कि जिस मामले में कार्ति से पूछताछ की जा रही है, उस मामले सीबीआई अब तक एफआईआर भी दर्ज नहीं कर पाई है. ऐसे में रिमांड बढ़ाने का कोई मतलब नहीं बनता.

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनते हुए कार्ति की रिमांड तीन दिन बढ़ाते हुए इसी महीने की 9 तारीख को फिर से कोर्ट में पेश करने का आदेश दे दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी मंगलवार को कार्ति चिदंबम को कोई राहत नहीं मिल सकी. कार्ति को फेमा मामले में ईडी द्वारा संरक्षण की मांग को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इससे और मामले में जो जांच चल रही है उस पर असर पड़ेगा.

देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और सीबीआई की तरफ से केस की पैरवी कर रहे तुषार मेहता ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सीबीआई का पक्ष रखा. तुषार मेहता ने कोर्ट को कहा कि पिछले छह दिनों की सीबीआई रिमांड में मिले सबूत और जानकारी बंद लिफाफे में अदालत को दे गई है. इससे साबित होता है कि सीबीआई की जांच बिल्कुल सही दिशा में चल रही है.

मंगलवार को सुनवाई के दौरान कार्ति चिदंबरम को पिता और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी अदालत में मौजूद रहे. पूरी सुनावाई के दौरान वह चुपचाप कोर्ट की कार्रवाई को सुनते रहे. बाद में अदालत ने कार्ति चिदंबरम को अपने पिता और मां नलिनी चिदंबरम से 10 मिनट के लिए मिलने की अनुमति दी.

सीबीआई पिछले पांच दिनों की रिमांड के दौरान कार्ति को मुंबई भी ले गई थी. सीबीआई ने कार्ति को बायकुला जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी से आमने-सामने बैठा कर पूछताछ की थी.

सीबीआई ने कार्ति को 28 फरवरी को चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था. इसके बाद से कार्ति लगातार सीबीआई कस्टडी में हैं. कार्ति पर आईएनएक्स मीडिया के एफआईपीबी क्लीयरेंस के लिए करीब 6.5 करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप है.

कार्ति को अभी भी सीबीआई कुछ और आरोपियों के सामने बैठा कर पूछताछ करने वाली है. सीबीआई इस केस में कुछ और लोगों की भूमिका को उजागर करने की लगातार दलील दे रही है. मंगलवार को सीबीआई के इसी तर्क को स्वीकार करते हए कोर्ट ने कार्ति की रिमांड और बढ़ा दी.

आतंकवादी नहीं हैं कार्ती

Photo Source: Karti Chidambaram Twitter

दूसरी और बचाव पक्ष के वकील अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि कार्ति चिदंबरम कोई आतंकवादी नहीं है जिसे बिना कस्टडी में लिए पूछताछ नहीं की जा सकती है. मेरा क्लाइंट कोर्ट में चुप है इसका मतलब यह नहीं कि वह दोषी है. मेरा क्लाइंट जांच में सीबीआई को पहले भी मदद करता रहा है और आगे भी करेगा.

सीबीआई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में आईएनएक्स मीडिया कंपनी और कार्ति चिदंबरम की भूमिका की जांच कर रहा है. कार्ति पर आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया के लिए गलत तरीके से फॉरन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड(एफआईपीबी) की मंजूरी अपने पिता के रसूख के कारण दिलवाई. आईएनएक्स मीडिया को इस मंजूरी से 305 करोड़ रुपए मिले थे. इसके एवज में कार्ति को 10 लाख डॉलर यानी लगभग 6.5 करोड़ रुपए मिले. इसके बाद भी कंपनी और कार्ति से जुड़ी कंपनियों के बीच लगभग 3.5 करोड़ रुपए की और डील हुई.

इसके साथ ही कार्ति पर आरोप है कि इंद्राणी मुखर्जी की कंपनी के खिलाफ टैक्स का मामला खत्म कराने के लिए भी पिता के रुतबे का इस्तेमाल किया. सीबीआई पिछले साल ही कार्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. कार्ति की यह गिरफ्तारी आईएनएक्स मीडिया (अब 9एक्स मीडिया) को दी गई मंजूरी को लेकर है.

आईनएनएक्स मीडिया के निदेशक रहे पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी इस समय शीना बोरा हत्याकांड में जेल में बंद हैं. यह पूरा मामला शीना बोरा हत्याकांड के खुलासे के बाद सामने आया था.

स्वामी का हमला

subramanian swami

बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी लगातार पी चिदंबरम पर इस डील में शामिल होने का आरोप लगा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछले साल ही फरवरी महीने में कहा था कि चिदंबरम के खिलाफ ठोस सबूत पेश करें.

इसके साथ ही बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि एयरसेल-मैक्सिस डील केस में चिदंबरम को भी सीबीआई जांच के घेरे में लाया जाए. स्वामी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एयरसेल को मलेशिया की मैक्सिस कंपनी को बेचा गया था और ये डील इंडियन टेलिकॉम रूल्स के मुताबिक नहीं हुई थी.

उन्होंने दावा किया था कि यह डील टेलिकॉम सेक्टर में 74 फीसदी एफडीआई के विरूद्ध थी. चिदंबरम ने गैर कानूनी तरीके से विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) को मंजूरी दी थी. सीबीआई ने तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की ओर से 2006 में एयरसेल-मैक्सिस करार को एफआईपीबी की मंजूरी दिए जाने की परिस्थितियों की जांच कर रही है.

कुल मिलाकर सीबीआई लगातार कोशिश कर रही है कि कार्ति चिदंबरम से मिले अहम सुराग के जरिए पी चिदंबरम तक पहुंचा जाए. ऐसे में यह माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में देश के पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भी सीबीआई के रडार पर आ सकते हैं?

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