S M L

सोशल मीडिया पर छिड़ी मुहीम से बेघर ऑक्सफोर्ड ग्रेजुएट को मिला घर

सोशल मीडिया पर उनकी कहानी के वायरल होने के बाद राजा सिंह को गुरू नानक सुखशाला नर्सिंग होम में अपना नया घर मिल गया है

Updated On: May 01, 2018 09:34 PM IST

FP Staff

0
सोशल मीडिया पर छिड़ी मुहीम से बेघर ऑक्सफोर्ड ग्रेजुएट को मिला घर
Loading...

76 साल के राजा सिंह फुल्ल को फर्राटे से अंग्रेजी बोलता देखकर ये सोच पाना मुश्किल है कि वे रोज अंधेरा टूटने से पहले सुलभ कॉम्प्लेक्स की कतार में खड़े रहते हैं. सामान के नाम पर कुछ जोड़ी कपड़े, पगड़ी और एक छोटा आईना है. परिवार के नाम पर महज यादें हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट राजा सिंह सालों बेघर की जिंदगी बिताते रहे. हाल ही में इंटरनेट पर इनकी कहानी वायरल होने के साथ इन्हें सिर पर छत मिली. सोशल मीडिया पर उनकी कहानी के वायरल होने के बाद फ्ह अब उन्हें गुरू नानक सुखशाला नर्सिंग होम में अपना नया घर मिल गया है.

भाई के बुलाने पर ब्रिटेन छोड़ आए दिल्ली

नियति से खतरनाक 'सेंस ऑफ ह्यूमर' शायद ही किसी के पास हो. राजा को रंक और रंक को एक झटके में राजा बनाने वाली नियति ने राजा सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही किया. आक्सफोर्ड से पढ़ाई के बाद वे ब्रिटेन में रह रहे थे. वहीं पर काम और शादी की. जिंदगी की गाड़ी एकदम ठीक-ठाक चल रही थी कि तभी उनके भाई का बुलावा आया. ये दरअसल नियति की पहली दस्तक थी. भारत में रह रहे भाई ने काम में अपनी मदद के लिए उन्हें बुलाया था. राजा सिंह सब छोड़-छाड़कर परिवार के साथ भारत लौट आए.

भाईयों ने मिलकर कई काम साथ शुरू किए. बिजनेस ठीक जमने लगा था कि तभी भाई को पीने की लत लग गई. इसी लत ने उनकी जान ले ली. अब राजा सिंह अकेले थे. उन्होंने काम चालू रखने की कोशिश की. लेकिन हमेशा पढ़ाई-लिखाई से जुड़े रहने की वजह से बिजनेस में कुछ खास नहीं कर सके. छोटे-छोटे कामों के जरिए घर चलाया ताकि बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेज सकें. राजा सिंह ने सोचा कि जो मौका उन्हें मिला, वो बच्चों को भी मिलना चाहिए. अब भी नियति उनके पीछे थी. दिल्ली में मुफलिसी झेल चुके बच्चों ने वहीं रहने का फैसला कर लिया. बच्चों से दूरी ने राजा सिंह की पत्नी को तोड़ दिया और एकाएक वे भी चल बसीं. पत्नी के जाने और बच्चों के ठंडेपन ने राजा सिंह का मन पूरी तरह से बदल दिया.

रेलवे स्टेशन पर काटते थे राते

तब से वे सड़कों पर रहते रहे. अनगिनत रातें अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर काटीं. तड़के जागकर सुलभ शौचालय जाकर अपने कामों से निवृत होते. वहीं नहाते. एक छोटे आईने में देखकर पगड़ी बांधते. इसके बाद चाय के साथ कुछ खाकर एयरपोर्ट के पास चले जाते. ऐसे लोगों की मदद करते, जो वीज़ा फॉर्म भरने में परेशान होते हैं. बदले में कोई कुछ देता तो ले लेते. कभी खुद आगे होकर कुछ नहीं मांगा. यही उनके पेट भरने का एकमात्र जरिया रहा.

तमाम मुफलिसी और उम्र के साथ आई कमजोरी के बावजूद सिंह ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं पसारा. इनपर एक फेसबुक पोस्ट इन दिनों वायरल हो रही है, जिसके बाद से बहुत से लोग मदद ऑफर कर रहे हैं. हालांकि राजा सिंह का कहना है कि वे खुद कमाकर अपना पेट भरना चाहते हैं, जैसा वे आज तक करते आए हैं. पोस्ट के चंद रोज बाद ही उन्हें सिर पर छत मिल गई लेकिन अब भी 76 साल का ये ऑक्सफोर्ड ग्रेजुएट जीविका कमाने के लिए उतना ही दृढ़ है.

(साभार - न्यूज 18)

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi