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जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदियों को रखना मानवाधिकार का हनन: सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायलय ने राज्यों के हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वे स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में दखल दें

Updated On: May 13, 2018 03:50 PM IST

Bhasha

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जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदियों को रखना मानवाधिकार का हनन: सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी भरे होने पर चिंता जताते हुए सभी राज्यों के हाईकोर्ट को इस पर विचार करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जेलों में कैदियों को ठूंस कर रखना मानवाधिकार का उल्लंघन है.

सर्वोच्च न्यायलय ने राज्यों के हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वे  स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में दखल दें. जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, 'न्याय मित्र की ओर से दिए गए नोट से लगता है कि जेल अधिकारी जेलों की क्षमता से अधिक कैदी भरने के मसले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. देशभर में ऐसी कई जेल हैं, जो क्षमता से 100 फीसदी तो कहीं कहीं 150 फीसदी से ज्यादा भरी हुई है.’

पीठ ने कहा, ‘हमारे विचार से इस मामले पर हरेक हाईकोर्ट को राज्य विधि सेवा प्राधिकारण / उच्च न्यायालय विधि सेवा समिति की मदद से स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए ताकि जेलों के क्षमता से अधिक भरे होने के संबंध में कुछ समझ आ सके क्योंकि इसमें मानवाधिकारों का उल्लंघन शामिल है.’

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के महासचिव जरूरी कदम उठाने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रति प्रत्येक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजेंगे जो वापस शीर्ष अदालत को रिपोर्ट करेंगे.

 

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