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CJI दीपक मिश्रा का उतार-चढ़ावों से भरा रहा है कार्यकाल, अंतिम दिनों में सुनाए कई महत्वपूर्ण फैसले

बीते 13 महीने से कुछ ज्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं

Updated On: Oct 01, 2018 07:51 PM IST

FP Staff

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CJI दीपक मिश्रा का उतार-चढ़ावों से भरा रहा है कार्यकाल, अंतिम दिनों में सुनाए कई महत्वपूर्ण फैसले

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में दीपक मिश्रा का सोमवार को अंतिम कार्यदिवस था. रोज की तरह वो इस आखिरी दिन भी काम पर आए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में केस की कार्रवाई में भी हिस्सा लिया.

दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं. इसके अगले दिन यानी 3 अक्टूबर को रंजन गोगोई देश के 46वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लेंगे. दीपक मिश्रा बीते 13 महीने से कुछ ज्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस हैं.

अपने कार्यकाल के आखिरी कुछ दिनों में सीजेआई दीपक मिश्रा ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को जाने की अनुमति, समलैंगिकता, एडल्टरी, आधार मामला, प्रमोशन में रिजर्वेशन, भीमा कोरेगांव हिंसा में एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी, अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले से जुड़े एक केस समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला दिया है.

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चीफ जस्टिस के कार्यकाल के तौर पर दीपक मिश्रा काफी विवादों और चर्चाओं में भी रहे. कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने बीते अप्रैल में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया था, जिसे राज्यसभा के सभापति ने शुरुआत में ही खारिज कर दिया था.

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठतम जजों ने इसी साल जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कार्य आवंटन (केसों के रोस्टर) पर एतराज जताया था. बाद में सीजेआई दीपक मिश्रा ने जजों के कार्य आवंटन का रोस्टर सार्वजनिक कर दिया.

41 साल पहले शुरू की थी वकालत, 22 साल पहले बने थे एडिश्नल जज 

दीपक मिश्रा का जन्म 3 अक्टूबर, 1953 को हुआ था. उन्होंने 14 फरवरी 1977 को उड़ीसा हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. 17 जनवरी, 1996 को उन्हें ओडिशा हाईकोर्ट का एडिश्नल जज बनाया गया. बाद में उनका तबादला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट कर दिया गया. वो 19 दिसंबर, 1997 को स्थायी जज बने. इसके बाद 23 दिसंबर, 2009 को वो पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 24 मई, 2010 को दीपक मिश्रा दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. यहां से प्रमोशन पाकर वो 10 अक्टूबर, 2011 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. फिर 28 अगस्त, 2017 को दीपक मिश्रा देश के 45वें चीफ जस्टिस बने.

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